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जजों की गाड़ियां भी वेटिंग में, हमें भी पुलिस का डर है : हाईकोर्ट

Mon, 26 Dec 2016 06:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 26 Dec 2016 06:57 PM IST
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Judges's cars also in waiting, we are afraid of the police: HC
हाईकोर्ट - फोटो : file photo

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की धीमी प्रक्रिया व कंपनियों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए हुए चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जजों की गाड़ियां भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की वेटिंग में हैं, हमे लगता है कि कहीं चालान न कट जाए।

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 इन प्लेट का इस्तेमाल बस पुलिस द्वारा चालान काटाने के लिए किया जा रहा है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी पर एडिशनल सॉलिसिएटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कोर्ट को भारत सरकार और यूटी प्रशासन की ओर से 9 जनवरी तक सरकार का पक्ष रखने का आश्वासन दिया। इसपर हाईकोर्ट ने सुनवाई 9 जनवरी तक टाल दी।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वतंत्र राय ने हरियाणा में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठप पड़ा काम दोबारा आरंभ करवाने के आदेश जारी करने की अपील की थी। 
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याची की ओर से दलील दी गई कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण अपराध की वारदातों मे कमी आएगी और इसका बहुत अधिक फायदा देखने को मिलेगा। हाईकोर्ट ने इसपर याची से पूछा कि क्या उन्होंने ऐसा कोई मामला देखा है या ऐसा कोई आंकड़ा मौजूद है जहां इस प्लेट की वजह से अपराध रुका हो या अपराधि की पहचान हुई हो। 

इस बारे में कोई ठोस जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी के पास इन प्लेट्स को लगाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है। चंडीगढ़ में तो हाल यह है कि जजों की गाडियां भी इन नंबर प्लेट्स के लिए कतारों में हैं। 

अगली सुनवाई पर एडिशनल सॉलिसिएटर जनरल देंगे याचिका पर जवाब

Judges's cars also in waiting, we are afraid of the police: HC
कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

कोर्ट ने कहा कि बिना तैयारी के और बिना प्लानिंग के यह हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी गई हैं। पुरानी गाड़ियों पर भी इन्हें अनिवार्य किया गया है जबकि कंपनियों के पास नई गाड़ियों पर तक इन प्लेटों को लगाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। 

इससे फायदा तो केवल कंपनियों को और पुलिस वालों को हुआ है। कंपनियां यह ठेका लेकर काम पूरा न होने की दलील देकर आर्र्बिट्रेशन में चली जाती हैं और सरकार से वसूली करती हैं वहीं दूसरी ओर पुलिस ताक में रहती है कि कोई बिना ऐसी नंबर प्लेट वाला मिले और उनकी जेब गर्म हो। 

कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार इसे अनिवार्य बनाया गया है उसे करने से पहले पूरी तैयारी होनी चाहिए थी। इसके लिए बाकायदा योजना बना कर कंपनियों को इसका कार्य सौंपना चाहिए था। वर्तमान में पंजाब में यह ठेका लेने वाली कंपनी सरकार के साथ आर्बिट्रेशन में है और हरियाणा में यह काम ठप पड़ा हुआ है। देश के अन्य हिस्सों में भी स्थिति कोई बेहतर नहीं है। 

इसपर हाईकोर्ट ने कोर्ट में मौजूद एडिशनल सॉलिसिएटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन को इस याचिका की कॉपी उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। जैन ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अगली सुनवाई पर वे केंद्र और चंडीगढ़ का इस मामले में पक्ष रखेंगे। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर बिना नोटिस जारी किए सुनवाई 9 जनवरी को रखी है। 

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