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जज नोट कांड: हाईकोर्ट की जज ने गवाही में बताया, क्या हुआ था उस दिन?

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 May 2016 01:34 AM IST
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कोर्ट - फोटो : file photo
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस (रिटायर्ड) निर्मल यादव से जुड़े ‘जज नोटकांड’ केस की जिला अदालत में विशेष सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई। मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तत्कालीन जज एवं वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट की जज जस्टिस निर्मलजीत कौर के विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज किए गए।

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उन्होंने अपनी गवाही में बताया कि घटना वाले दिन 13 अगस्त 2008 को उनके सेक्टर-11 स्थित आवास पर एक पैकेट आया था। इसमें 15 लाख रुपये थे। उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पता चला कि संजीव बंसल नामक व्यक्ति ने किसी निर्मल सिंह के लिए यह पैसे भेजे थे जो गलती से उनके घर पहुंच गए। गवाही के बाद बचाव पक्ष की ओर से उनका क्रास एग्जामिनेशन भी किया गया। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी। उस दिन केस से जुड़े अन्य लोगों की गवाही होगी।


सीबीआई केस के अनुसार जस्टिस के सरकारी आवास पर गलती से रिश्वत के 15 लाख रुपये पहुंच गए थे। वहीं, बचाव पक्ष के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने बताया कि अपने बयान में जस्टिस निर्मलजीत कौर ने कहा कि संबंधित घटना से करीब एक महीना पहले ही वह जज बनीं थीं। इसलिए उनके घर मुबारकबाद देने वालों के बधाई संदेश और मिठाइयां आदि आ रहे थे। इससे पहले जब तक वह सरकारी वकील थीं तो कुछ डॉक्यूमेंट्स भी उनके पास आते थे।

इसी दौरान उनके पास एक पैकेट आया जिसमें 15 लाख रुपये थे, जिसकी उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी। 
जस्टिस निर्मलजीत कौर ने हाईकोर्ट  केजस्टिस मेहताब सिंह गिल से भी इस मामले को लेकर विचार विमर्श किया था। इसके अलावा संजीव बंसल से भी पैसे को लेकर पूछा था। संजीव बंसल ने उन्हें बताया कि रकम निर्मल सिंह नामक शख्स के लिए थी। जस्टिस मेहताब सिंह के पूछने पर भी बंसल ने भी यही जवाब दिया। 

पिछले साल हुए थे आरोप तय 
मामले में 6 साल बाद पिछले साल जनवरी में ही जस्टिस यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में आरोप तय हुए थे। इसके बाद ही केस का ट्रायल शुरू हुआ। अन्य आरोपियों में दिल्ली के होटल व्यवसायी रविंदर सिंह भसीन, हरियाणा के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल, बिजनेसमैन राजीव गुप्ता और निर्मल सिंह शामिल हैं। 13 अगस्त, 2008 को सेक्टर-11 थाना पुलिस को जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर तैनात पुलिसकर्मी ने 15 लाख रुपये पहुंचने की शिकायत दी थी। आरोप के मुताबिक पंचकूला के एक प्लाट का एकतरफा फैसला करने की एवज में 15 लाख रुपये रिश्वत दी जानी थी जो गलती ने जस्टिस निर्मलजीत कौर की कोठी पर पहुंच गए थे। 

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