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जेपी नड्डा बोले- पवित्र ग्रंथ गीता केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं मानवता को देती है कर्म का संदेश

Sun, 08 Dec 2019 09:56 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 08 Dec 2019 09:56 AM IST
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JP Nadda reached at International Gita Mahotsav 2019 in Kurukshetra
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंचे जेपी नड्डा। - फोटो : अमर उजाला

भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं अपितु जीवन जीने की शैली है और पूरी मानवता को कर्म करने का संदेश देती है। इस पवित्र ग्रंथ से प्रेरणा लेनी चाहिए और उपदेशों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2019 के मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि के रुप में बोल रहे थे। 

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इससे पहले भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर, खेलमंत्री संदीप सिंह, सांसद नायब सिंह सैनी, सांसद सुनीता दुग्गल, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, पूर्व मंत्री ओपी धनखड़, विधायक सुभाष सुधा, भाजपा के प्रदेश महामंत्री चौधरी वेदपाल, प्रसिद्ध गायक अभिजीत भटाचार्य ने दीपशिखा प्रज्जवलित करके विधिवत रूप से संध्या का शुभारंभ किया। 
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इस दौरान प्रशासन की तरफ से कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर, खेलमंत्री संदीप सिंह और गायक अभिजीत भट्टाचार्य सहित अन्य मेहमानों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेशवासियों को 5156वीं गीता जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से ठीक 5155 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र की ही धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ही नहीं पूरी मानवता को कर्म करने का संदेश दिया। 
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यह भारत की समृद्धि का प्रतीक है और गीता के उपदेश हर समय और हर काम के लिए प्रासंगिक है। यह हरियाणा और कुरुक्षेत्र का सौभाग्य है कि इस पावन धरा पर पवित्र ग्रंथ गीता का उद्गम हुआ। अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने चिर परिचित अंदाज में गानों का सिलसिला शुरु किया। 


उन्होंने किशोर के गाने मुसाफिर हूं यारों, ना घर है ना ठिकाना...वादा रहा सनम जुदा ना होंगे हम, हमारी चाहतों का मिट ना सके फसाना, सुना ना सुनो सुन लो ना... टनटनाटन टन टन तारा चलती है क्या नौ से बारह सहित अन्य गीतों को अपनी सुरीली आवाज में प्रस्तुत करके समां बांधा और हजारों पर्यटकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इन गानों के बीच में लोगों को कुछ सामाजिक संदेश देने का काम भी किया।

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