चंडीगढ़: कोरोना संकट में कंपनियों की मनमानी, सैलरी काटी, कुछ को नौकरी से भी निकाला
लॉकडाउन के एलान के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापारियों और फैक्ट्री मालिकों से अपने कर्मचारियों का साथ देने और उनकी सैलरी नहीं काटने की अपील की थी लेकिन शहर के कई फैक्ट्री मालिकों पर प्रधानमंत्री की अपील का असर नहीं हुआ।
कई उद्यमियों ने मार्च की सैलरी नहीं दी तो कई ने कर्मचारियों को नौकरी से ही निकाल दिया। यहां तक की व्हॉट्सएप पर टर्मिनेशन लेटर भेजे जा रहे हैं। समस्या यह है कि कर्मचारी लॉकडाउन की वजह से न तो किसी अधिकारी के पास जा सकते हैं और न ही लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
प्रशासन के दावों से अलग, हकीकत काफी दर्दनाक है। रायपुर खुर्द में रहने वाले विपिन कुमार एक नामी कंपनी में सेल्समैन थे। लॉकडाउन की वजह से घर पर बैठना पड़ा तो कुछ दिन बाद उन्हें एरिया मैनेजर का फोन आया और उसने विपिन से इस्तीफा मांग लिया। विपिन को कंपनी की तरफ से व्हॉट्सएप पर इस्तीफे का फॉरमेट तक बनाकर भेजा गया और कहा गया कि उन्हें बस इसे फॉरवर्ड करना है।
उन्होंने इसके लिए मना कर दिया तो गुरुवार को उनको टर्मिनेट कर दिया गया। वह अब तक नहीं समझ पा रहे हैं कि इसमें उनकी क्या गलती है। सिर्फ यही नहीं, कुछ नामी ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाली कंपनियों ने भी अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी है। कंपनी को पैसा न देना पड़े इसलिए उन्होंने कर्मचारियों को अपने रजिस्टर में गैरहाजिर दिखा दिया है। ऐसे लोगों की संख्या भी हजारों में हैं।
फोन कर बोल दिया अब नौकरी पर मत आना
सेक्टर-56 में रहने वाले विवेक को मोबाइल पर कॉल कर कह दिया गया कि अब से वह नौकरी पर न आएं। नौकरी से ही उनका परिवार चल रहा था, अब वह क्या करेंगे समझ नहीं पा रहे हैं। न ही उन्हें अब तक मार्च की तनख्वाह मिली है। वह दड़वा स्थित एक कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनी में मर्चेंडाइजर का काम करते थे। मलकीत सिंह (बदला हुआ नाम) एलांते मॉल के एक शोरूम में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे।
उन्हें अभी तक फरवरी और मार्च की तनख्वाह नहीं मिली है। वह अपनी पहचान छुपाना चाहते हैं, क्योंकि उनका कहना है कि शोरूम का मालिक उन्हें नौकरी से निकाल देगा। ऐसे तमाम लोग हैं, जिन्हें लॉकडाउन की वजह से या तो नौकरी से निकाल दिया गया और अगर किसी को तनख्वाह मिली है तो सिर्फ आधी।
प्रशासन के मजदूरों के आंकड़े भी सवालों के घेरे में
चंडीगढ़ प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार शहर में सिर्फ 20 हजार कर्मचारी हैं जबकि ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के नेशनल काउंसिल सदस्य जीवाराज का कहना है कि यह आंकड़े गलत हैं। उनका कहना है कि लेबर विभाग अगर ठीक से काम करता तो मालूम पड़ता कि असल में वर्करों की संख्या लाखों में हैं। कालोनी नंबर-4, संजय कालोनी, हल्लोमाजरा, रामदरबार, दड़वा, मौलीजागरां, धनास, विकास नगर, मनीमाजरा व चंडीगढ़ के पुनर्वास कालोनी में रहने वाले अधिकतर लोग इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्रियों में ही काम करते हैं।
कितने ही मॉल और होटल में काम कर रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि मात्र 20,000 मजदूरों से से ही चंडीगढ़ चल रहा है। जीवाराज ने कहा कि फैक्ट्रियों ने कभी मस्टर रोल बनाया ही नहीं। अक्सर लेबर कोर्ट में देखा जाता है कि कर्मचारी सालों काम करता है लेकिन मस्टर रोल में उसका नाम नहीं होता। इसके अलावा ज्यादातर कर्मचारियों को आज भी तनख्वाह नगद में दी जा रहीं है। ऐसे हजारों लोगों को लॉकडाउन की वजह से नौकरी से निकाला जा चुका है।
कर्मचारियों को दिए जा रहे हैं 2000 रुपये
यूनियन लगातार वर्करों के संपर्क में हैं। फोन, सोशल मीडिया द्वारा उनसे बात हो रही है। फैक्ट्रियों के मालिक पूरी तनख्वाह के बजाए 2000-3000 रुपये देकर किनारा कर रहे हैं। जिनको पूरी तनख्वाह नहीं दी जा रही हैं या नौकरी से निकाला जा रहा है, उन वर्करों की लिस्ट बनाकर प्रशासन को जल्द सौंपी जाएगी। - कंवलजीत सिंह, प्रधान, एआईसीसीटीयू, चंडीगढ़
शिकायत मिली तो करेंगे कार्रवाई
हमारे अधिकारी फैक्ट्री मालिकों के संपर्क में हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी कर्मचारी को नौकरी से न निकाला जाए और उन्हें पूरी तनख्वाह मिले। हमने कर्मचारियों से भी आग्रह किया है कि अगर ऐसी कोई समस्या है तो वह लेबर कमिश्नर, डीसी व किसी भी अधिकारी से किसी भी माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। हमें शिकायत मिलेगी तो जरूर कार्रवाई करेंगे। - मनोज परिदा, एडवाइजर