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पिता मिल्खा सिंह को याद कर भावुक होकर रो पड़े जीव मिल्खा सिंह
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चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय गोल्फर जीव मिल्खा सिंह शुक्रवार को अपने पिता को याद कर भावुक हो उठे। अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उनकी आंखें छलक पड़ीं। मौका था चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में आयोजित मिल्खा सिंह मेमोरियल गोल्फ टूर्नामेंट की प्रेस वार्ता का। इसमें जीव मिल्खा के साथ क्लब के प्रधान रविबीर सिंह भी शामिल हुए।
उड़नसिख मिल्खा सिंह के निधन के बाद पहली बार उनके नाम पर मेमोरियल गोल्फ टूर्नामेंट 28 अगस्त को चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में खेला जाएगा। इसमें क्लब के गोल्फर्स और सदस्य हिस्सा लेंगे। एक दिवसीय इस टूर्नामेंट के विजेता शाम को घोषित कर दिए जाएंगे। विजेता को मिल्खा सिंह ट्रॉफी दी जाएगी। इससे पहले क्लब में जब स्लाइड के माध्यम से मिल्खा सिंह की जीवन यात्रा दिखाई गई तो बेटे जीव मिल्खा बिलख पड़े। उनके गले से शब्द नहीं निकल सके। आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला। बाद में उन्होंने कहा कि माता पिता को खोने का दर्द पूरे परिवार को सता रहा है। उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। यह टूर्नामेंट मिल्खा सिंह को फैंस के दिलों में हमेशा जिंदा रखेगा।
बचपन में पिता जी यहीं लाते थे गोल्फ सिखाने
जीव मिल्खा ने बताया कि चंडीगढ़ गोल्फ क्लब पिता के लिए दूसरेे घर की तरह था। जब मैं 8 वर्ष का था तो मेरे पिताजी इसी क्लब में मुझे गोल्फ सिखाने लाते थे। आज मैं जिस स्तर पर पहुंचा हूं, उन्हीं की बदौलत हूं। पिता हमेशा सेहत को सबसे पहले रखते थे। कहते थे-तंदुरुस्ती ही जीवन की असली पूंजी है।
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माता पिता की यादों के साथ अब आगे बढ़ना है
जीव ने बताया कि अब वह अगले साल विदेशों में होने वाले टूर्नामेंट की तैयारियों में जुटना चाहते हैं। हालांकि यह बेहद मुश्किल भरा होगा। तीन महीने से मैंने गोल्फ स्टिक को छुआ तक नहीं है। लेकिन अब अपने माता पिता की यादों के साथ ही हमें आगे बढ़ना है। जिंदगी में अपनी जिम्मेदारियाें को पूरा करना है।
ओलंपिक में अदिति अशोक ने प्रभावित किया
जीव मिल्खा सिंह ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक में लोग कभी सोच नहीं सकते थे भारतीय गोल्फर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं। अदिति अशोक के प्रदर्शन ने मेरे सहित सभी को अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया। वह चौथे स्थान पर रही। इस प्रदर्शन से गोल्फ खिलाड़ियों को इतना प्रोत्साहन मिला है अगले ओलंपिक में भारत कोई गोल्फर मेडल जीतकर जरूर लाएगा। जीव ने कहा गोल्फ का खेल कम प्रकाशित होता है, लेकिन ओलंपिक में अदिति अशोक के बाद देश में गोल्फ अधिक प्रकाशित होने लगा हैं।
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उड़नसिख मिल्खा सिंह के निधन के बाद पहली बार उनके नाम पर मेमोरियल गोल्फ टूर्नामेंट 28 अगस्त को चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में खेला जाएगा। इसमें क्लब के गोल्फर्स और सदस्य हिस्सा लेंगे। एक दिवसीय इस टूर्नामेंट के विजेता शाम को घोषित कर दिए जाएंगे। विजेता को मिल्खा सिंह ट्रॉफी दी जाएगी। इससे पहले क्लब में जब स्लाइड के माध्यम से मिल्खा सिंह की जीवन यात्रा दिखाई गई तो बेटे जीव मिल्खा बिलख पड़े। उनके गले से शब्द नहीं निकल सके। आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला। बाद में उन्होंने कहा कि माता पिता को खोने का दर्द पूरे परिवार को सता रहा है। उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। यह टूर्नामेंट मिल्खा सिंह को फैंस के दिलों में हमेशा जिंदा रखेगा।
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बचपन में पिता जी यहीं लाते थे गोल्फ सिखाने
जीव मिल्खा ने बताया कि चंडीगढ़ गोल्फ क्लब पिता के लिए दूसरेे घर की तरह था। जब मैं 8 वर्ष का था तो मेरे पिताजी इसी क्लब में मुझे गोल्फ सिखाने लाते थे। आज मैं जिस स्तर पर पहुंचा हूं, उन्हीं की बदौलत हूं। पिता हमेशा सेहत को सबसे पहले रखते थे। कहते थे-तंदुरुस्ती ही जीवन की असली पूंजी है।
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माता पिता की यादों के साथ अब आगे बढ़ना है
जीव ने बताया कि अब वह अगले साल विदेशों में होने वाले टूर्नामेंट की तैयारियों में जुटना चाहते हैं। हालांकि यह बेहद मुश्किल भरा होगा। तीन महीने से मैंने गोल्फ स्टिक को छुआ तक नहीं है। लेकिन अब अपने माता पिता की यादों के साथ ही हमें आगे बढ़ना है। जिंदगी में अपनी जिम्मेदारियाें को पूरा करना है।
ओलंपिक में अदिति अशोक ने प्रभावित किया
जीव मिल्खा सिंह ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक में लोग कभी सोच नहीं सकते थे भारतीय गोल्फर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं। अदिति अशोक के प्रदर्शन ने मेरे सहित सभी को अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया। वह चौथे स्थान पर रही। इस प्रदर्शन से गोल्फ खिलाड़ियों को इतना प्रोत्साहन मिला है अगले ओलंपिक में भारत कोई गोल्फर मेडल जीतकर जरूर लाएगा। जीव ने कहा गोल्फ का खेल कम प्रकाशित होता है, लेकिन ओलंपिक में अदिति अशोक के बाद देश में गोल्फ अधिक प्रकाशित होने लगा हैं।