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जाट आरक्षण आंदोलन में हिंसा की जांच करेगा न्यायिक आयोग

Tue, 22 Mar 2016 08:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़ Updated Tue, 22 Mar 2016 08:09 PM IST
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Jat reservation judicial commission to investigate violence in the movement
सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बीते फरवरी महीने में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदेश में हुई आगजनी व हिंसक घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण व दुखद बताते हुए इसकी जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवाने की घोषणा की।
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उन्होंने कहा कि जल्द ही इसके लिए आयोग का गठन कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा हरियाणा विधानसभा में जारी बजट सत्र के दौरान मंगलवार को विपक्ष के नेता अभय चौटाला व निर्दलीय विधायक जयप्रकाश द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव परलगभग तीन घंटे चली चर्चा के बाद अपने उत्तर में की।
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मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्ति के संदर्भ में अधिनियम में संशोधन करने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले मंत्री नजमा हेपतुल्ला को लिखा है, क्योंकि कई सदस्यों ने वक्फ बोर्ड के नियमों में संशोधन करने की मांग की है।
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मुख्यमंत्री ने सदन में पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने कई बैठकें बुलाकर जाट व खाप प्रतिनिधियों को आंदोलन नहीं करने के लिए मना लिया है, लेकिन पूर्व सीएम हुड्डा के क्षेत्र सांपला किलोई में आंदोलन शुरू होने के पीछे राजनीतिक दलों का हाथ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व लोकदल के कुछ सदस्य हिंसा भंडकाने के सूत्रधार थे।

ऐसे हिंसक हुआ आंदोलन
मुख्यमंत्री ने बताया कि आंदोलन की आड़ में जिन अपराधियों ने वारदात कीं, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। 17 मार्च तक इस संबंध में 2084 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और 432 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आएं हैं, जिससे पता लगता है कि इस उपद्रव के सूत्रधारों में कुछ राजनीतिक लोग भी हैं। इसके बारे में और अधिक सुबूत जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आएंगे तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

अफसरों की जांच, पीड़ितों को मुआवजा
22 फरवरी शाम चार बजे मंत्रिमंडल की बैठक में आंदोलन के दौरान क्षतिग्रस्त सभी संपत्तियों, चाहे आवासीय या वाणिज्यिक के नुकसान के लिए पूरा मुआवजा देने और किसी भी प्रकार की हुई चूक के लिए नागरिक व पुलिस प्रशासन की भूमिका का तुरंत मूल्यांकन करने के निर्णय लिए।

आंदोलन में मारे गए निर्दोष व्यक्तियों के आश्रितों को दस-दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का निर्णय भी उसी दिन लिया गया। सरकार ने प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत अपने स्व-आंकलित नुकसान के 25 प्रतिशत तक की अंतरिम सहायता देने का भी निर्णय लिया। विभाग को 19 मार्च तक कुल 2198 दावे प्राप्त हुए हैं। इनमें से 1997 दावों, जिनमें 1799 शहरी व 198 ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, को अंतरिम व अंतिम प्रतिपूर्ति के रूप में 28.17 करोड़ रुपये की राशि दे दी गई।

बहुत जल्द आंदोलन पर काबू पाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की तत्परता से जितनी जल्दी इस आंदोलन पर काबू पाया गया है। आज तक किसी भी आंदोलन पर इतना जल्दी काबू नहीं पाया गया, चाहे वह 1990 का मंडल आयोग हो, 1984 के दिल्ली के सिख दंगे हों, 2010 का मंडयाली या कादमा कांड हो या उसके बाद का कंडेला कांड।


उन्होंने बताया कि रेलवे सहित इस आंदोलन के दौरान 800 से 850 करोड़ रुपये की सरकारी व निजी वाणिज्यिक संपत्ति का नुकसान होने का अनुमान है। मारे गए 30 व्यक्तियों में रोहतक में 5, सोनीपत में 8, झज्जर में 13, कैथल व हिसार में एक-एक और जींद में दो व्यक्तियों की मारे जाने की सूचना है।
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