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जाट आरक्षण आंदोलन: जांच कमेटी 17 तक सौंपेगी रिपोर्ट
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:25 PM IST
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उप्रदव और हिंसा के बीच अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही तथा चूक की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी 17 अप्रैल तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। अब तक जांच कमेटी के चेयरमैन रिटायर्ड डीजीपी सूबे के आठ जिलों का दौरा कर चुके हैं।
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उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि रोजाना करीब 250 लोगों से बातचीत में मिली जानकारी के आधार पर दोषी अधिकारियों की सूची भी रिपोर्ट में शामिल की जाएगी। कमेटी उन अधिकारियों और कर्मियों को भी पुरस्कृत करने के लिए सरकार से सिफारिश करेगी, जिन्होंने जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
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उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में माना कि जांच के दौरान जातीय भेदभाव का वीभत्स रूप सामने आया। जांच में कई कर्मियों और अधिकारियों की लापरवाही और पक्षपात जैसी गलतियां भी सामने आई हैं। सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपने के बाद हो सकता है कि उन पर गाज गिरे। हालांकि पहले से ही सरकार विभागीय अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई कर रही है। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ अधिकारियों और कर्मियों ने कई ऐसे ज्वलंत उदाहरण पेश किए, जिनकी जितनी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने कहा कि वे ऐसे अधिकारियों और कर्मियों को पुरस्कृत करने की भी सरकार से सिफारिश करेंगे, ताकि भविष्य में भी वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा सके।
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उन्होंने यह भी माना कि जिस मॉडल की पुलिस होनी चाहिए, वैसी नहीं है। पूर्व डीजीपी ने बताया कि अब तक जींद, भिवानी, झज्जर, सोनीपत, रोहतक, हिसार, कैथल सहित आठ जिलों का दौरा कर चुके हैं। प्रत्येक शहर में रोजाना 250 से अधिक लोगों से जांच के सिलसिले में मुलाकात कर, आंदोलन के दौरान अधिकारियों और कर्मियों के बर्ताव को लेकर जानकारियां हासिल की गईं।
एक सवाल के जवाब में पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने माना कि रोहतक में हिंसा और निजी नुकसान का वीभत्स चेहरा सामने आया। पहले भी कई बड़े मामलों की जांच से जुड़े रहे डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान शायद पहली बार ऐसा हुआ जब लोगों ने सरकारी संपत्ति के साथ-साथ आम लोगों को भी निशाना बनाया। इस दौरान हुई लूटपाट ने प्रदेश की स्थिति को और भी बदहाल किया।
मुरथल कांड पर नहीं की टिप्पणी : जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रकाश सिंह ने मुरथल कांड के मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जिम्मेदारी उन्हें नहीं सौंपी गई है। इसलिए वे इस मामले में कुछ कहना मुनासिब नहीं समझते।