{"_id":"571b5c474f1c1b56428b4752","slug":"jat-researvation-jat-protest-haryana-voilence-bhupinder-singh-hooda-haryana-govt-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा नहीं चाहती, हिंसा की निष्पक्ष तरीके से जांच हो: हुड्डा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा नहीं चाहती, हिंसा की निष्पक्ष तरीके से जांच हो: हुड्डा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 24 Apr 2016 07:43 PM IST
विज्ञापन
सदन से अनुपस्थित रहे कांग्रेस विधायक दल
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव की जांच को लेकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार उपद्रव की निष्पक्ष जांच नहीं कराना चाहती। वह जांच से भाग रही है। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। वे शुक्रवार को गांव बोहर में डा. सुरेश नांदल के पिता ओंकार सिंह नांदल के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे।
उनके साथ राज्य सभा सांसद शादीलाल बतरा, बेरी के विधायक डा. रघुबीर सिंह कादियान, कलानौर से विधायक शकुंतला खटक, उमराव सिंह, कैप्टन चतर सिंह, सोनू बुधवार व अन्य कांग्रेसी नेता थे। हुड्डा ने कहा कि सरकार मे बैठे लोग कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं कि आंदोलन में उनका हाथ था। बार बार ऐसा कहने से या ऊंची आवाज में बोलने से कोई झूठ सच में नहीं बदल जाता। सच्चाई तो सच्चाई ही रहेगी।
और सच यह है कि भाजपा के नेताओं ने ही आंदोलन की पटकथा लिखी थी जिसमें वे खुद उलझकर रह गए। उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार व केंद्र सरकार से कई बार मांग कर चुके हैं कि आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी पदेन जज से कराई जाए। मगर किसी के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। भाजपा सरकार के लोग आरोप प्रत्यारोप करके इस जांच को खुर्द बुर्द करना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उनके साथ राज्य सभा सांसद शादीलाल बतरा, बेरी के विधायक डा. रघुबीर सिंह कादियान, कलानौर से विधायक शकुंतला खटक, उमराव सिंह, कैप्टन चतर सिंह, सोनू बुधवार व अन्य कांग्रेसी नेता थे। हुड्डा ने कहा कि सरकार मे बैठे लोग कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं कि आंदोलन में उनका हाथ था। बार बार ऐसा कहने से या ऊंची आवाज में बोलने से कोई झूठ सच में नहीं बदल जाता। सच्चाई तो सच्चाई ही रहेगी।
विज्ञापन
और सच यह है कि भाजपा के नेताओं ने ही आंदोलन की पटकथा लिखी थी जिसमें वे खुद उलझकर रह गए। उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार व केंद्र सरकार से कई बार मांग कर चुके हैं कि आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी पदेन जज से कराई जाए। मगर किसी के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। भाजपा सरकार के लोग आरोप प्रत्यारोप करके इस जांच को खुर्द बुर्द करना चाहते हैं।
विज्ञापन