आरक्षण मुद्दाः मोदी की मुश्किलें बढ़ाने को तैयार जाट
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हरियाणा के जाटों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें बढ़ाने की तैयारी कर ली है। आंदोलन का ऐलान भी कर दिया गया है। जाट केंद्रीय सेवाओं में जाट आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले के खिलाफ हैं। इस मामले को लेकर वे कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस मसले पर जींद में महापंचायत भी की गई। इस महापंचायत में एक तरफ जहां इस मामले को फुल बेंच में ले जाने की चर्चा हुई, वहीं केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का भी निर्णय लिया गया। ऐसे में जाट नेताओं की ओर से शुरू किए जा रहे आरक्षण बचाओ आंदोलन से मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
ऐसे घिरेगी मोदी सरकार
पहले से ही यमुना बचाओ आंदोलन और भूमि अधिग्रहण बिल पर किरकिरी झेल रही मोदी सरकार को अब जाट आंदोलन से निपटने की भी तैयारी करनी होगी। भूमि अधिग्रहण बिल पर चारों तरफ से घिरती जा रही सरकार को बचाने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामने आना पड़ा।
एक तरफ उन्होंने जहां संसद में अपना पक्ष रखा वहीं रविवार को रेडियो पर ‘मन की बात’ के माध्यम से किसानों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। इसी तरह यमुना बचाओ आंदोलन पर भी सरकार को नरम होना पड़ा और आंदोलनकारियों की शर्तें स्वीकार करनी पड़ीं। केंद्र ने यमुना बचाओ आंदोलनकारियों से दो माह का समय मांगा है।
यानी मई में फिर यह आंदोलन जोर पकड़ सकता है। जींद की महापंचायत में पहुंचे जाट नेता भी कुछ इसी तरह केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं कि सरकार खुद व खुद जाट आरक्षण पर कानून बनाने को विवश हो जाए। इसके लिए वह पूरी रणनीति से आंदोलन करने की बात कह रहे हैं।
इसका मतलब मई माह में एक तरफ जहां यमुना बचाओ आंदोलन उठेगा वहीं जाट आरक्षण आंदोलन से भी मोदी सरकार की नींद उड़ेगी। पंचायत में खाप प्रतिनिधि सूबे सिंह समैण ने कहा कि भूमि अधिग्रहण पर मचे बवाल को शांत करने के लिए ही जाटों के आरक्षण को खत्म करवाया गया है।
सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सही तरीके से पैरवी नहीं की गई। अब हम केंद्र सरकार पर सही पैरवी का दबाव बनाएंगे। यदि फिर भी बात नहीं बनी तो केंद्र पर कानून बनाने का दबाव बनाया जाएगा।
तीन स्तर पर लड़ी जाएगी लड़ाई
उत्तर प्रदेश के जाट नेता एसपी परिहार ने साफ किया कि आरक्षण बचाने के लिए तीन स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। इसमें पहली लड़ाई कानूनी है। अभी डबल बेंच का फैसला आया है और इसे फुल बैंच के समक्ष रखा जा सकता है।
इसके लिए अच्छे वकीलों को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाए। ऐसे में आरक्षण बचने की शत प्रतिशत संभावना है। वहीं दूसरी लड़ाई संसद में लड़ी जानी है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहे तो दोबारा से नोटिफिकेशन कर जाट आरक्षण को बहाल कर सकती है, इसके लिए सांसदों पर दबाव बनाने की जरूरत है।
यदि संसद जाट आरक्षण पर मोहर लगाती है तो, कोई भी आरक्षण नहीं छीन सकता। तीसरी लड़ाई सड़क पर लड़ी जानी है, जिसमें जन आंदोलन शामिल है।