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बंकर की जिंदगी बयां की: राजपुरा की जसप्रीत बोलीं- कई दिन खाना नहीं मिला, सात दिन गंदा पानी पीकर गुजारा किया

Sun, 06 Mar 2022 09:34 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, राजपुरा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, राजपुरा (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 06 Mar 2022 09:34 PM IST
सार

जसप्रीत कौर ने बताया कि नवंबर 2021 में यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में मेडिकल की पढ़ाई करने गई थीं। केवल तीन महीने बाद ही रूस-यूक्रेन सेना के बीच युद्ध छिड़ गया।

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Jaspreet of Rajpura shares her experience about Ukraine war
यूक्रेन से घर पहुंचीं जसप्रीत का स्वागत करते अभिभावक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

घर वापसी की खुशी गांव उलाणा की जसप्रीत कौर के चेहरे पर तो जरूर है लेकिन खारकीव के बंकर में गंदा पानी पीकर गुजारे सात दिन याद कर वह सिहर उठती हैं। शनिवार देर रात घर पहुंचीं जसप्रीत ने बताया कि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होते ही 24 फरवरी को उन्हें यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में भेज दिया गया था। वहां उनके साथ करीब 500 और विद्यार्थी थे। दो-तीन दिन तक खाने को कुछ नहीं मिला। इसी बीच हमारे साथ रहने वाले कर्नाटक के नवीन खाना लेने बाहर गया तो पता चला कि गोलीबारी में उसकी मौत हो गई है। 

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छत पर बने वॉशरूम तक जाने में भी खतरा बना था। हम सब लोग गंदा पानी पीकर जिंदा रहने की कोशिश करते रहे। गुरुवार को अपनों से हजारों मील दूर युद्ध के बीच फंसे हम सबने जब यूक्रेन छोड़कर पोलैंड की सरजमीं पर कदम रखा तो कुछ राहत महसूस हुई। जसप्रीत कौर ने बताया कि नवंबर 2021 में यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में मेडिकल की पढ़ाई करने गई थीं। केवल तीन महीने बाद ही रूस-यूक्रेन सेना के बीच युद्ध छिड़ गया। सबसे ज्यादा प्रभावित राजधानी कीव व खारकीव हैं।
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20 किमी पैदल चलकर पहुंचे बुक्साल
जसप्रीत ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे अपने पांच दोस्तों के साथ खारकीव के बंकर से निकलकर 20 किमी पैदल चलकर बुक्साल के रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। ट्रेन में सारी रात सफर कर गुरुवार शाम चार बजे यूक्रेन के अंतिम शहर लवीव में आए और वहां से टैक्सी में भारतीय झंडा लगाकर रात 8.30 बजे पोलैंड पहुंचे। वहां शेल्टर में भारतीय लोगों ने जबरदस्त स्वागत किया। 
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‘लोन लेकर बेटी को भेजा था यूक्रेन’ 
बिंदरपाल सिंह ने बताया कि वह चंडीगढ़ में होमगार्ड के पद पर तैनात हैं। उन्होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में 14 लाख रुपये लोन लेकर जमा करवाए थे। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा लेने वाले सभी विद्यार्थियों को कम दाम पर या अनुदान देकर उनकी पढ़ाई पूरी करवाई जाए। 

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