{"_id":"5afd262f4f1c1be0408b5f55","slug":"jammu-sex-scandal-case-verdiction-in-punjab-haryana-highcourt","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू सेक्स स्कैंडल में फैसले का रास्ता साफ हुआ, कई रसूखदार बनाए गए हैं आरोपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू सेक्स स्कैंडल में फैसले का रास्ता साफ हुआ, कई रसूखदार बनाए गए हैं आरोपी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 May 2018 12:21 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारह साल पुराने बहुचर्चित जम्मू सेक्स स्कैंडल मामले में फैसले का रास्ता साफ हो गया है। मामले में कई रसूखदारों को आरोपी बनाया गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पीड़िता को री-एग्जामिन संबंधी अपील लंबित होने के चलते ट्रायल कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब अपील खारिज होने से ट्रायल कोर्ट के फैसला सुनाने पर लगी रोक भी हट गई है। मामला अप्रैल 2006 में जम्मू एवं कश्मीर में एक पोर्न एमएमएस फैलने से चर्चा में आया था। सबीना नामक महिला पर आरोप लगा था कि वह हाई प्रोफाइल लोगों को लड़कियां सप्लाई करती है।
इस काम में उसके पति पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच 2006 में सीबीआई को सौंप दी गई । मामले में जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मंत्री गुलाम अहमद हसन मीर, निर्दलीय विधायक रहे रमन मट्टू, बीएसएफ डीआईजी केसी पांधी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, इकबाल खांडे, होटल मालिक रियाज अहमद कावा, हिलाल अहमद शाह, अबसर अहमद दर व एजाज अहमद भट्ट समेत सबीना और उसका पति अब्दुल हामिद आरोपी बनाए गए थे।
सैक्स स्कैंडल में हाई प्रोफाइल लोगों का नाम होने के चलते मामले को ट्रायल के लिए चंडीगढ़ भेजा गया था। लंबे समय तक ट्रायल चला और जब फैसले का समय आया तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी गई और पीड़िता को री-एग्जामिन करने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने इस अर्जी पर प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगा दी थी। अब जस्टिस एजी मसीह ने इस पीड़िता के रिएग्जामिनेशन से इनकार करते हुए दाखिल की गई तीनों अपील खारिज कर दी हैं। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा फैसले पर लगाई गई रोक भी हट गई है। ऐसे में अब जल्द ही इस मामले में फैसला आ सकता है।
विज्ञापन
यह है मामला
मुख्य केस 2006 में दर्ज किया गया था। इसमें कई हाईप्रोफाइल लोगों के नाम सामने आए। जांच के काफी बाद डीएसपी मीर का नाम सामने आया। इस पर उसके खिलाफ जुलाई 2006 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई को मई में केस की जांच सौंपी गई थी। जांच पड़ताल में सामने आया कि डीएसपी मीर भी 1995 में सबीना के उन ग्राहकों में से एक था जो श्रीनगर स्थित उसके घर जहां वह वेश्यालय चलाती थी वहां आता था। मीर उस वक्त श्रीगनर के डीएसपी थे।
सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सबीना के ठिकाने में रेड की गई तो वह कहीं और शिफ्ट हो चुके थे। मीर उसके नए ठिकाने में आया था। उस समय उसने सबीना को 7 हजार रुपये दिए थे और एक नाबालिग को अपने साथ बेमिना स्थित पुलिस कॉलोनी के सरकारी आवास में ले गया था। चार्जशीट के अनुसार, स्कैंडल का खुलासा होने के बावजूद मीर ने नाबालिग को अपने पास रखा हुआ था और यौन शोषण कर रहा था। मीर ने उसे खुद को बचाने के लिए भी इस्तेमाल भी किया था।
विज्ञापन
इस काम में उसके पति पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच 2006 में सीबीआई को सौंप दी गई । मामले में जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मंत्री गुलाम अहमद हसन मीर, निर्दलीय विधायक रहे रमन मट्टू, बीएसएफ डीआईजी केसी पांधी, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल सेठी, डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, इकबाल खांडे, होटल मालिक रियाज अहमद कावा, हिलाल अहमद शाह, अबसर अहमद दर व एजाज अहमद भट्ट समेत सबीना और उसका पति अब्दुल हामिद आरोपी बनाए गए थे।
विज्ञापन
सैक्स स्कैंडल में हाई प्रोफाइल लोगों का नाम होने के चलते मामले को ट्रायल के लिए चंडीगढ़ भेजा गया था। लंबे समय तक ट्रायल चला और जब फैसले का समय आया तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी गई और पीड़िता को री-एग्जामिन करने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने इस अर्जी पर प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगा दी थी। अब जस्टिस एजी मसीह ने इस पीड़िता के रिएग्जामिनेशन से इनकार करते हुए दाखिल की गई तीनों अपील खारिज कर दी हैं। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा फैसले पर लगाई गई रोक भी हट गई है। ऐसे में अब जल्द ही इस मामले में फैसला आ सकता है।
विज्ञापन
यह है मामला
मुख्य केस 2006 में दर्ज किया गया था। इसमें कई हाईप्रोफाइल लोगों के नाम सामने आए। जांच के काफी बाद डीएसपी मीर का नाम सामने आया। इस पर उसके खिलाफ जुलाई 2006 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई को मई में केस की जांच सौंपी गई थी। जांच पड़ताल में सामने आया कि डीएसपी मीर भी 1995 में सबीना के उन ग्राहकों में से एक था जो श्रीनगर स्थित उसके घर जहां वह वेश्यालय चलाती थी वहां आता था। मीर उस वक्त श्रीगनर के डीएसपी थे।
सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सबीना के ठिकाने में रेड की गई तो वह कहीं और शिफ्ट हो चुके थे। मीर उसके नए ठिकाने में आया था। उस समय उसने सबीना को 7 हजार रुपये दिए थे और एक नाबालिग को अपने साथ बेमिना स्थित पुलिस कॉलोनी के सरकारी आवास में ले गया था। चार्जशीट के अनुसार, स्कैंडल का खुलासा होने के बावजूद मीर ने नाबालिग को अपने पास रखा हुआ था और यौन शोषण कर रहा था। मीर ने उसे खुद को बचाने के लिए भी इस्तेमाल भी किया था।