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जम्मू-कश्मीर सेक्स स्कैंडल: BSF के तत्कालीन डीआईजी बरी, हाईकोर्ट ने कहा- CBI दोष साबित नहीं कर पाई

Sat, 22 Aug 2020 01:32 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 22 Aug 2020 01:32 AM IST
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Jammu and Kashmir Sex Scandal case, Punjab and Haryana high court News in Hindi
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर सेक्स स्कैंडल में दोषी घोषित बीएसएफ के तत्कालीन डीआईजी केसी पाधी को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। इसके अलावा अन्य दोषियों जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीएसपी समेत अन्य पुलिस अफसरों की सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी। 

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उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ जिला अदालत के 2018 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें बीएसएफ के तत्कालीन डीआईजी केसी पाधी को दोषी ठहराया गया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद डीआईजी को दोषमुक्त कर दिया है। अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि सीबीआई डीआईजी के खिलाफ दोष साबित करने में नाकाम रही है। उन्हें फंसाया गया था। इसके साथ ही न्यायालय ने अन्य दोषियों जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर, शब्बीर अहमद लवाय उर्फ शब्बीर काला, शब्बीर अहमद लोन और मसूद अहमद की सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी।
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सीबीआई की दलील खारिज
उच्च न्यायालय ने कहा कि जो तथ्य और बयान कोर्ट में पेश किए गए हैं उनसे साफ है कि पाधी को फंसाया गया है। आरोप के अनुसार श्रीनगर के बीएसएफ कैंप में उनके घर पहले सुरक्षा अधिकारी से बात करने के बाद लड़की पहुंची जो इस बेहद सुरक्षित एरिया में संभव नहीं है। जब केवल उनकी पत्नी उनके साथ रहती थी और उनके कुक का यह कहना है कि कोई लड़की नहीं आई थी तो आरोप साबित करना बेहद मुश्किल है। केसी पाधी के डीआईजी के कार्यकाल के दौरान दर्जनों आतंकी मारे गए थे। जिसके बारे में विशेष सूचना मीडिया को देते थे। ऐसे में यह उनके खिलाफ एजेंडा हो सकता है।

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यह था मामला

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को एक नाबालिग लड़की का एमएमएस मिला था। इसके बाद की गई जांच में पता चला कि सबीना नामक महिला अपने घर में देह व्यापार का अड्डा चलाती है। पुलिस ने उस घर में छापा मारकर एक दर्जन लड़कियां बरामद की थीं। इनमें से एक लड़की नाबालिग थी। उस लड़की ने खुलासा किया कि घर की मालकिन शबीना युवतियों को मंत्री और पुलिस अफसरों के पास भेजती थी।

सीबीआई ने चार सितंबर 2006 को एक दर्जन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मामले में कुल नौ चार्जशीट दायर की गई थीं, जिनमें पुलिस ने दर्जन भर से अधिक आरोपी बनाए थे। इन सभी की सुनवाई चल रही है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376, आईटी एक्ट की धारा 67 और इम्मोरल ट्रैफिकिंग की धारा 3, 4, 5 व आईपीसी की धारा 120-बी के तहत केस दर्ज किया था। 

सितंबर-2006 में मामले को चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर दिया गया था। चंडीगढ़ की सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में केसी पाधी, जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर सहित शब्बीर अहमद लवाय उर्फ शब्बीर काला, शब्बीर अहमद लोन और मसूद अहमद को दोषी घोषित कर सभी को दस-दस वर्ष की सजा सुनाई थी।

फैसले को इन सभी ने न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने सिर्फ केसी पाधी की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले में दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है, जबकि अन्य की अपीलें खारिज करते हुए उन सभी की सजा बरकरार रखी है।

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