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Chandigarh News: जालंधर उप चुनाव ने भाजपा और शिअद को एक बार फिर आत्मचिंतन के लिए किया मजबूर
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दोनों दलों का चुनाव में रहा निराशजनक प्रदर्शन, भाजपा उम्मीदवार की जमानत तक हुई जब्त
माहिरों के अनुसार 2024 की जंग जीतने के लिए दोनों को फिर से विचार करना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जालंधर लोकसभा उप चुनाव के नतीजे ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा को एक बार फिर आत्म चिंतन करने पर मजबूर कर दिया। जिस तरह दोनों ने अलग होकर चुनाव लड़ा और दोनों दलों का निराशा जनक प्रदर्शन रहा है, इससे एक बात तो साफ है कि उन्हें 2024 की जंग के लिए फिर से एक साथ मंच पर आना होगा या फिर से अपने सहयोगियों पर विचार करना होगा। भाजपा के दिग्गज नेता पार्टी हाईकमान को बता चुके हैं कि पंजाब फतेह के लिए अकाली दल और भाजपा को मिलकर लड़ना होगा। जबकि भाजपा प्रधान अश्वनी शर्मा साफ कर चुके हैं कि 2024 की जंग अकेले लडे़ंगे। हालांकि राजनीति में कुछ भी संभव है।
कृषि कानूनों को लेकर साल 2021 में हुए किसान संघर्ष के बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल 25 साल के गठबंधन के बाद अलग हो गए थे। पहले दोनों ने मोहाली समेत कुछ नगर निगमों व नगर काउंसिलों का चुनाव अलग होकर लड़ा, लेकिन दोनों दलों काे हार का मुंह देखना पड़ा। कई जगह तो दोनों पार्टियां खाता तक नहीं खोल पाई। उस समय भाजपा पर कृषि कानून और अकाली दल पर बेअदबी प्रकरण भारी पड़ा था। फिर दोनों ने 2022 विधानसभा चुनाव अलग होकर लड़ा। लेकिन दोनों दलों को हार का मुंह का देखना पड़ा। आप ने 92 विधायकों के साथ पंजाब में पहली बार सरकार बनाई। इसके बाद संगरूर लोकसभा चुनाव में भाजपा, अकाली के साथ ही सत्ताधारी आप को भी हार का मुंह देखना पड़ा। वहां से सिमरनजीत सिंह मान विजयी रहे। अब जालंधर लोकसभा उप चुनाव में भाजपा और अकाली दल दोनों दलों खूब मेहनत की। भाजपा ने अपने कई दिग्गज केंद्रीय मंत्री जालंधर की गलियाें में घुमा दिए तो अकाली दल ने भी खूब मशक्कत की। सुखबीर ने खुद जालंधर में मोर्चा संभाला। साथ ही बिक्रम सिंह मजीठिया भी सक्रिय रहे। लोग भी उनकी सभाओं में जुटे। लेकिन फिर यह चीज वोटों में नहीं बदली। हालात यह रहे कि भाजपा उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई। उन्हें 134706 वोट मिले, जबकि अकाली दल को 158354 वोट मिले। पंजाब की राजनीति को समझने वाले जगदीप सिंह के अनुसार पंजाब में भाजपा और अकाली दल एक दूसरे की जरूरत है। यह चीज दोनों पार्टियों के सीनियर नेताओं को भी पता है, लेकिन इन चुनावों से उन्हें जमीनी हकीकत का पता चल गया है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के देहांत के बाद जैसे श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे। उससे यह कयास लगने शुरू हो गए थे कि दोनों दल एक मंच पर आ सकते हैं।
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माहिरों के अनुसार 2024 की जंग जीतने के लिए दोनों को फिर से विचार करना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जालंधर लोकसभा उप चुनाव के नतीजे ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा को एक बार फिर आत्म चिंतन करने पर मजबूर कर दिया। जिस तरह दोनों ने अलग होकर चुनाव लड़ा और दोनों दलों का निराशा जनक प्रदर्शन रहा है, इससे एक बात तो साफ है कि उन्हें 2024 की जंग के लिए फिर से एक साथ मंच पर आना होगा या फिर से अपने सहयोगियों पर विचार करना होगा। भाजपा के दिग्गज नेता पार्टी हाईकमान को बता चुके हैं कि पंजाब फतेह के लिए अकाली दल और भाजपा को मिलकर लड़ना होगा। जबकि भाजपा प्रधान अश्वनी शर्मा साफ कर चुके हैं कि 2024 की जंग अकेले लडे़ंगे। हालांकि राजनीति में कुछ भी संभव है।
कृषि कानूनों को लेकर साल 2021 में हुए किसान संघर्ष के बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल 25 साल के गठबंधन के बाद अलग हो गए थे। पहले दोनों ने मोहाली समेत कुछ नगर निगमों व नगर काउंसिलों का चुनाव अलग होकर लड़ा, लेकिन दोनों दलों काे हार का मुंह देखना पड़ा। कई जगह तो दोनों पार्टियां खाता तक नहीं खोल पाई। उस समय भाजपा पर कृषि कानून और अकाली दल पर बेअदबी प्रकरण भारी पड़ा था। फिर दोनों ने 2022 विधानसभा चुनाव अलग होकर लड़ा। लेकिन दोनों दलों को हार का मुंह का देखना पड़ा। आप ने 92 विधायकों के साथ पंजाब में पहली बार सरकार बनाई। इसके बाद संगरूर लोकसभा चुनाव में भाजपा, अकाली के साथ ही सत्ताधारी आप को भी हार का मुंह देखना पड़ा। वहां से सिमरनजीत सिंह मान विजयी रहे। अब जालंधर लोकसभा उप चुनाव में भाजपा और अकाली दल दोनों दलों खूब मेहनत की। भाजपा ने अपने कई दिग्गज केंद्रीय मंत्री जालंधर की गलियाें में घुमा दिए तो अकाली दल ने भी खूब मशक्कत की। सुखबीर ने खुद जालंधर में मोर्चा संभाला। साथ ही बिक्रम सिंह मजीठिया भी सक्रिय रहे। लोग भी उनकी सभाओं में जुटे। लेकिन फिर यह चीज वोटों में नहीं बदली। हालात यह रहे कि भाजपा उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई। उन्हें 134706 वोट मिले, जबकि अकाली दल को 158354 वोट मिले। पंजाब की राजनीति को समझने वाले जगदीप सिंह के अनुसार पंजाब में भाजपा और अकाली दल एक दूसरे की जरूरत है। यह चीज दोनों पार्टियों के सीनियर नेताओं को भी पता है, लेकिन इन चुनावों से उन्हें जमीनी हकीकत का पता चल गया है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के देहांत के बाद जैसे श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे। उससे यह कयास लगने शुरू हो गए थे कि दोनों दल एक मंच पर आ सकते हैं।
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