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दुल्हन की तरह सजीं और फिर त्याग दीं सब सांसारिक चीजें, 4 लड़कियां कुछ यूं बन गई साध्वी
Mon, 11 Feb 2019 03:58 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारनौंद (हिसार)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारनौंद (हिसार)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 11 Feb 2019 03:58 PM IST
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जैन साध्वी
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कई बार धन धान्य से संपन्न लोग भोग विलास और सभी सांसारिक चीजें छोड़कर साधु संत बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ किया इन चार लड़कियों ने, जो संन्यास दीक्षा लेकर साध्वी बन गईं।
ये हैं चारों लड़कियां
जैन साध्वी
हरियाणा में हिसार के नारनौंद के गांव माजरा के हाई स्कूल में जैन भागवती दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम धर्म मुनि जैन के सानिध्य में हुआ। शुरुआत में पूरे गांव में शोभा यात्रा निकाली गई। इसमें चार बेटियों ने अपने जीवन की आस्था जैन धर्म में जताते हुए दीक्षा ग्रहण की। इन चारों बेटियां में कोई पायलट तो कोई सीए तो कोई टीचर बनना चाहती थीं, लेकिन अब इन्होंने जैन धर्म की दीक्षा ले ली। चारों बेटियों ने वचन लिया कि वह जैन धर्म के नियमों का पालन करेंगी और कभी भी धर्म की मर्यादा को ठेस नहीं पहुंचाएंगी। दीक्षा लेने वाली युवतियों में तीन अकेले गांव खेड़ी जालब से हैं। खेड़ी जालब की सुनैना जैन, विदिता जैन व कुसुम जैन और दिल्ली के उत्तम नगर निवासी समता जैन ने दीक्षा ग्रहण की।
जैन धर्म चलता है पांच सिद्धांतों पर
जैन साध्वी
ये चारों बेटियां अपने परिवार के साथ प्रवचन सुनने जाती थीं और वहीं से इनका आध्यात्म की ओर हृदय परिवर्तन हुआ। दीक्षा ग्रहण करने से पहले उन्होंने जैन धर्म के नियम पढ़कर उनके पालन का वचन भी दिया। वहीं इससे पहले एक सप्ताह तक जिस प्रकार से एक लड़की की शादी के कार्यक्रम होते हैं, वैसे ही इन बेटियों के सारे ख्वाब पूरे किए जाते हैं। उन्हें हल्दी लगती है, फिर मेहंदी लगाई जाती है। मंडप सजता है। दीक्षा से पहले चारों बेटियों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। चारों दुल्हन की तरह सजे जोड़े में मंच पर दीक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचीं। इसके बाद परिवार के लोगों के साथ सभी बेटियों ने मंच पर आखिरी बार मिलन किया। फिर चारों बेटियों का मुंडन करवाया गया। मुंडन के साथ चारों बेटियों ने सफेद वस्त्र धारण कर साध्वियों के भेष में बाहर निकलीं और अपने गुरु धर्म मुनि जैन से जैन धर्म की दीक्षा ली।
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जैन साध्वी
19 वर्षीय कुसुम जैन : पिता किसान
खेड़ी जालब निवासी कुसुम जैन एक साधारण किसान राममेहर की बेटी हैं, जोकि गांव के ही सरकारी स्कूल से दसवीं पास की है। परिवार में दो भाई व एक बहन हैं। पढ़ाई पूरी कर वह एयरफोर्स में जाना चाहती थी, लेकिन गांव खेड़ी जालब में जैन धर्म का संस्थानक बना हुआ है, जहां पर कुसुम भी प्रवचन सुनने जाती थीं, जिससे वह प्रभावित हुईं।
खेड़ी जालब निवासी कुसुम जैन एक साधारण किसान राममेहर की बेटी हैं, जोकि गांव के ही सरकारी स्कूल से दसवीं पास की है। परिवार में दो भाई व एक बहन हैं। पढ़ाई पूरी कर वह एयरफोर्स में जाना चाहती थी, लेकिन गांव खेड़ी जालब में जैन धर्म का संस्थानक बना हुआ है, जहां पर कुसुम भी प्रवचन सुनने जाती थीं, जिससे वह प्रभावित हुईं।
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जैन साध्वी
20 वर्षीय समता जैन : पिता व्यापारी
दिल्ली के उत्तम नगर निवासी समता जैन के पिता व्यापारी हैं। दिल्ली में अपनी बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहती थीं। पिता अशोक जैन एक कन्फेक्शनरी व्यापारी हैं, जिन्होंने जैन धर्म को अपनाकर सब कुछ त्यागकर यह धर्म अपनाया है। वह अपने परिवार के लोगों के साथ जैन धर्म के प्रवचन सुनने जाती थीं, जिससे प्रभावित होकर यह धर्म अपनाया है।
दिल्ली के उत्तम नगर निवासी समता जैन के पिता व्यापारी हैं। दिल्ली में अपनी बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहती थीं। पिता अशोक जैन एक कन्फेक्शनरी व्यापारी हैं, जिन्होंने जैन धर्म को अपनाकर सब कुछ त्यागकर यह धर्म अपनाया है। वह अपने परिवार के लोगों के साथ जैन धर्म के प्रवचन सुनने जाती थीं, जिससे प्रभावित होकर यह धर्म अपनाया है।