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Chandigarh News: जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर 25 मई को सुनवाई
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चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर यूटी चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया है। इसके बाद हवारा की ओर से पेश वकील ने प्रशासनिक जवाब पर विस्तृत प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए अल्प समय की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मई के लिए निर्धारित कर दी।
दायर याचिका में हवारा ने अदालत से चार सप्ताह की नियमित पैरोल देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि वह करीब 28 वर्ष 9 माह से अधिक समय से जेल में हैं और इतने लंबे कारावास के बाद मानवीय आधार पर राहत मिलनी चाहिए। हवारा ने अपनी याचिका में सबसे प्रमुख आधार अपनी 81 वर्षीय मां नरिंदर कौर की गंभीर बीमारी को बनाया है। अदालत को बताया गया है कि उसकी मां कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और कोमा जैसी स्थिति तक में पहुंच चुकी हैं। ऐसे में पुत्र होने के नाते उसका अपनी मां की सेवा करना नैतिक और पारिवारिक दायित्व है। याचिका में यह भी कहा गया है कि लंबे समय से जेल में रहने के कारण पारिवारिक रिश्ते प्रभावित हुए हैं, मानसिक तनाव बढ़ा है और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों की देखरेख भी संभव नहीं हो पा रही।याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह दलील भी रखी कि बेअंत सिंह हत्याकांड में अन्य सह-दोषी लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह और गुरमीत सिंह को वर्ष 2013 से नियमित रूप से पैरोल मिलती रही है। ऐसे में समानता के सांविधानिक सिद्धांत के तहत उनके मामले पर भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
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दायर याचिका में हवारा ने अदालत से चार सप्ताह की नियमित पैरोल देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि वह करीब 28 वर्ष 9 माह से अधिक समय से जेल में हैं और इतने लंबे कारावास के बाद मानवीय आधार पर राहत मिलनी चाहिए। हवारा ने अपनी याचिका में सबसे प्रमुख आधार अपनी 81 वर्षीय मां नरिंदर कौर की गंभीर बीमारी को बनाया है। अदालत को बताया गया है कि उसकी मां कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और कोमा जैसी स्थिति तक में पहुंच चुकी हैं। ऐसे में पुत्र होने के नाते उसका अपनी मां की सेवा करना नैतिक और पारिवारिक दायित्व है। याचिका में यह भी कहा गया है कि लंबे समय से जेल में रहने के कारण पारिवारिक रिश्ते प्रभावित हुए हैं, मानसिक तनाव बढ़ा है और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों की देखरेख भी संभव नहीं हो पा रही।याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह दलील भी रखी कि बेअंत सिंह हत्याकांड में अन्य सह-दोषी लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह और गुरमीत सिंह को वर्ष 2013 से नियमित रूप से पैरोल मिलती रही है। ऐसे में समानता के सांविधानिक सिद्धांत के तहत उनके मामले पर भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
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