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Chandigarh News: गलती औरों की, हमारी दिवाली हो गई काली

Tue, 14 Nov 2023 02:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Nov 2023 02:25 AM IST
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It was the fault of others, our Diwali became black
चंडीगढ़। दिवाली की रात हर तरफ खुशी का माहौल था। कोई घर के बाहर खड़ा रोशनीभरा नजारा देख रहा था तो कोई परिजनों के साथ छत पर दीये जला रहा था। इस बीच दूर से आई बम की चिंगारी ने खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। रोशनी का त्योहार अंधेरे में बदल गया। पटाखों की चिंगारी ने किसी के बच्चे की आंख को लहूलुहान कर दिया तो कोई खुद चोटिल हो गया। पटाखों से आंख चोटिल होने पर पीजीआई में भर्ती घायलों और उनके परिजनों ने आपबीती सुनाई और लोगों से पटाखे न फोड़ने की अपील की। इनसेट-
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हमारा कोई कसूर नहीं.. बच्चे की आंख हो गई लहूलुहान
मेरा सात साल का बेटा बासु घर के बाहर खड़ा था। अचानक एक जोर का धमाका हुआ और फिर उसके रोने की आवाज सुनाई दी। हम दौड़कर उसके पास भागे तो देखा उसके आंख से खून बह रहा था। उसकी दाई आंख बाहर निकल आई थी। हम उसे लेकर पीजीआई पहुंचे। यहां रात में उसकी सर्जरी हुई। मेरे बच्चे ने एक भी पटाखा नहीं फोड़ा इसके बावजूद हमें ये दिन देखना पड़ा। मैंने अपने बच्चे को एक भी पटाखा खरीदकर नहीं दिया, लेकिन दूसरों की करनी का खामियाजा हमारे बच्चे को भुगतना पड़ा है।
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-सिकंदर, सेक्टर 38वेस्ट

पटाखा से मासूम बेटी की आंख पर आई चोट, सर्जरी हुई
मेरी पांच साल की बेटी आकांक्षा हम सभी के साथ छत पर थी। हम दिवाली की सजावट देख रहे थे। दूर से एक पटाखा आकांक्षा के ठीक पास गिरा और फट गया। उस पटाखे से कुछ छिटककर मेरी बेटी की आंख में चला गया। उसके बाद उसकी आंखों से खून निकलने लगा। हम उसे लेकर तत्काल पंचकूला सेक्टर- 6 के सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां से डॉक्टरों ने पीजीआई रेफर कर दिया। यहां उसकी सर्जरी की गई है। हम तो पटाखों से डरते हैं, इसलिए दिवाली की रात घर से बाहर नहीं निकले। छत पर थे। लेकिन दूसरे की पटाखेबाजी हमारे लिए घातक हो गई।
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-लालजी, मौलीजागरां
दूसरों की लापरवाही से आंख गंवाने की नौबत आई

मैं बैंक में ड्यूटी करता हूं। दिवाली की रात घर के बाहर खड़ा था। कुछ बच्चे बोतल में बम फंसाकर जला रहे थे। बम फटा तो शीशा टूटकर छिटकने के बाद मेरी आंख में आ गया। नुकीली चीज आंख में जाते ही खून बहने लगा। भयंकर दर्द होने लगा। मेरे परिजन तत्काल मुझे लेकर पीजीआई आए। यहां मेरी सर्जरी हुई है। सच कह रहा हूं मैं और मेरे परिवार में कोई भी पटाखा नहीं फोड़ता। क्योंकि हम जानते हैं कि इससे दुर्घटना हो सकती है। लेकिन दूसरों की लापरवाही के कारण आज मेरी आंख गंवाने की नौबत आ गई है।

कमल, सेक्टर-17 पंचकूला, इंदिरा कॉलोनी
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