पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक का पहलू इंडियन एयरफोर्स की सर्वधर्म समभाव की भावना को भी दिखाता है। बालाकोट के ‘जाबा टॉप’ जहां इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जाना था, वहां इंटेलिजेंस ने आतंकियों के चार टारगेट लोकेट किए थे।
एयर स्ट्राइक: पहले से तय था मदरसे को छेड़ना नहीं, बाकी टारगेट छोड़ना नहीं
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एयर स्ट्राइक की प्लानिंग होने लगी। इसके लिए वायु सेना ने कुछ खास प्रशिक्षित और अनुभवी पॉयलटों का चयन किया। उनकी आधी रात को विशेष ट्रेनिंग शुरू करवाई गई। पॉयलटों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी कि उनकी इस ट्रेनिंग की वजह क्या है? फिर 26 फरवरी को उन पॉयलटों को सीमा पार बालाकोट केजॉबा टॉप में जाकर टारगेट नेस्तनाबूद करने को कहा गया।
एयर स्ट्राइक में विमानों की पहली टुकड़ी को अपने मिशन में अचानक खराब मौसम से जूझना पड़ा था। एकदम से गड़बड़ाए मौसम के कारण लड़ाकू विमानों की यह टुकड़ी वेपन खोले बगैर ही लौट आई थी। इसके बाद लड़ाकू विमानों के अन्य टुकड़ियों ने प्लानिंग के मुताबिक ऑपरेशन को बखूबी अंजाम दिया। ऑपरेशन में भारतीय विमानों द्वारा टारगेट किए गए तीन बम मिस भी हुए थे, जो कि वास्तविक टारगेट से करीब 150 मीटर, 185 मीटर व 200 मीटर दूरी पर गिर थे। अन्य विमान टारगेट को उड़ाने में पूरी तरह कामयाब रहे।
जमीन के साढ़े तीन मीटर नीचे तक की गई थी स्ट्राइक
एयरफोर्स को आशंका था कि कैंप में आतंकियों ने अपने बंकर आवास बनाए हो सकते हैं। इसलिए एयरफोर्स ने बम के ‘बंकर बस्टिंग वर्जन ऑफ स्पाइस 2000’ स्ट्राइक का इस्तेमाल किया था, जिसकी मार जमीन से करीब 3.5 मीटर भीतर तक थी। एयरफोर्स के पास इसके भी पुख्ता सुबूत हैं, कि आतंकी कैंप में इस स्पाइस 2000 की मार जमीन के नीचे तक खतरनाक ढंग सेहुई।