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20 साल पहले बनकर आई थी विदेशी दुल्हन, 'बेगानी' क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:59 AM IST
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ईरानी महिला की भारतीय नागरिकता को लेकर विवाद
20 साल पहले एक विदेशी महिला दुल्हन बनकर भारत आई थी, लेकिन उसे आज तक बेगाने होने का दंश झेलना पड़ रहा है। शादी करके भारत आए 20 साल हो गए हैं, लेकिन उसे अभी तक भारत की नागरिकता नहीं मिली है।
ईरानी महिला सहर गाराचुरलू ने ईरान सरकार को अपनी ईरान की नागरिकता छोड़ने के लिए तीन वर्ष पहले अर्जी भी दी थी, लेकिन ईरान सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है। नतीजतन, उसे भारत की नागरिकता भी नहीं मिल पा रही।
इस मामले में अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि वह जानकारी दे कि ईरान की नागरिकता छोड़ने की क्या औपचारिकताएं हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।
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ईरानी महिला सहर गाराचुरलू ने ईरान सरकार को अपनी ईरान की नागरिकता छोड़ने के लिए तीन वर्ष पहले अर्जी भी दी थी, लेकिन ईरान सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है। नतीजतन, उसे भारत की नागरिकता भी नहीं मिल पा रही।
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इस मामले में अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि वह जानकारी दे कि ईरान की नागरिकता छोड़ने की क्या औपचारिकताएं हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।
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हाईकोर्ट ने कहा था कि ईरानी नागरिकता छोड़नी जरूरी
कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट की एकल बेंच ने बीते जून माह में इस मामले पर अपने फैसले में सहर से कहा था कि जब तक ईरान सरकार उसे ईरान की नागरिकता छोड़ने की इजाजत नहीं दे देती, तब तक उसे भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती।
एकल बेंच के इस फैसले के खिलाफ अब सहर ने डबल बेंच में अपील की है, जिसमें सहर ने कहा है कि उसने ईरान दूतावास में वर्ष 2013 में ही ईरान की नागरिकता छोड़े जाने की अर्जी दे दी थी।
साथ ही भारत के गृह मंत्रालय को अर्जी देकर भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन अब तक ईरान सरकार ने उसकी अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं की है। सहर ने डबल बेंच के समक्ष दाखिल अपील में उसे भारत की नागरिकता दिए जाने की मांग की है।
एकल बेंच के इस फैसले के खिलाफ अब सहर ने डबल बेंच में अपील की है, जिसमें सहर ने कहा है कि उसने ईरान दूतावास में वर्ष 2013 में ही ईरान की नागरिकता छोड़े जाने की अर्जी दे दी थी।
साथ ही भारत के गृह मंत्रालय को अर्जी देकर भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन अब तक ईरान सरकार ने उसकी अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं की है। सहर ने डबल बेंच के समक्ष दाखिल अपील में उसे भारत की नागरिकता दिए जाने की मांग की है।
यह है मामला
रोती हुई लड़की
ईरान की सहर गाराचुरलू वर्ष 1996 में पढ़ने के लिए भारत आई थी। वर्ष 2004 में चंडीगढ़ के विक्रम बैंस नामक युवक से उसने सेक्टर-46 के गुरूद्वारे में सिख रीति रिवाज के अनुसार विवाह कर लिया और बाद में वर्ष 2005 में उसने मुस्लिम कानून के तहत भी विक्रम बैंस से निकाह कर लिया। इस विवाह के आधार पर भारत सरकार ने उसे वर्ष 2006 में 15 वर्ष की अवधि का पीआईओ (पर्सन आफ इंडियन आरिजिन) कार्ड जारी कर दिया।
यह कार्ड जारी होने के बाद सहर के वीजा को नियमित तौर एक्सटेंशन मिलती रही, लेकिन सहर की परेशानी तब शुरू हुई, जब उसके पति ने उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसी दबाव में सहर से उसके पति ने एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा लिए, जिसके बारे में बाद में सामने आया कि वह तलाकनामा था। इसके खिलाफ सहर ने चंडीगढ़ की जिला अदालत में याचिका दायर की, जोकि जिला अदालत में विचाराधीन है।
इसके बाद सहर ने वर्ष 2010 में भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन किया। तीन वर्षों बाद उसे बताया गया कि उसकी भारत की नागरिकता हासिल करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन यह शर्त भी लगा दी गई है कि पहले उसे ईरान की नागरिकता छोड़नी होगी। इसके बाद सहर ने वर्ष 2013 में ईरान के दूतावास में ईरान की नागरिकता छोड़ने की अर्जी दी, जिस पर अब तक ईरान सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।
यह कार्ड जारी होने के बाद सहर के वीजा को नियमित तौर एक्सटेंशन मिलती रही, लेकिन सहर की परेशानी तब शुरू हुई, जब उसके पति ने उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसी दबाव में सहर से उसके पति ने एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा लिए, जिसके बारे में बाद में सामने आया कि वह तलाकनामा था। इसके खिलाफ सहर ने चंडीगढ़ की जिला अदालत में याचिका दायर की, जोकि जिला अदालत में विचाराधीन है।
इसके बाद सहर ने वर्ष 2010 में भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन किया। तीन वर्षों बाद उसे बताया गया कि उसकी भारत की नागरिकता हासिल करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन यह शर्त भी लगा दी गई है कि पहले उसे ईरान की नागरिकता छोड़नी होगी। इसके बाद सहर ने वर्ष 2013 में ईरान के दूतावास में ईरान की नागरिकता छोड़ने की अर्जी दी, जिस पर अब तक ईरान सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।