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Haryana: गबन की जांच के घेरे में 1490 पूर्व सरपंच, विकास एवं पंचायत विभाग की विजिलेंस विंग ने तेज की जांच
Sat, 04 Mar 2023 09:23 AM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 04 Mar 2023 09:23 AM IST
सार
विकास एवं पंचायत विभाग की विजिलेंस विंग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक गड़बड़ी के मामले नूंह जिले में 164 और करनाल जिले की 94 पूर्व ग्राम पंचायतें शामिल हैं। वहीं, सबसे कम गड़बड़ी की शिकायतें गुरुग्राम में 27 और पंचकूला में 14 मामले हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा की ग्राम पंचायत संस्थाओं में पिछले 5 से 7 साल खूब गड़बड़ी चली है। प्रदेश के 1490 पूर्व संरपचों के खिलाफ विकास एवं पंचायत विभाग में गबन और गड़बड़ी की जांच चल रही है। करोड़ों रुपये के गबन मामले की जांच विभाग की विजिलेंस विंग कर रही है। आरोप है कि इन गबन के मामलों में पंचायती राज संस्थाओं के निचले स्तर से लेकर अन्य अधिकारी भी संलिप्त हैं। अब विजिलेंस विंग ने अपनी जांच तेज कर ही है और पूर्व सरपंचों के पसीने छूटने लगे हैं।
विकास एवं पंचायत विभाग की विजिलेंस विंग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक गड़बड़ी के मामले नूंह जिले में 164 और करनाल जिले की 94 पूर्व ग्राम पंचायतें शामिल हैं। वहीं, सबसे कम गड़बड़ी की शिकायतें गुरुग्राम में 27 और पंचकूला में 14 मामले हैं। शिकायतों की समीक्षा में पाया गया है कि पूर्व सरपंचों पर वित्तीय शक्तियों के गलत प्रयोग करने के आरोप हैं। इन गड़बड़ियों में ग्राम सचिव, जेई, एसडीओ से लेकर अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के भी आरोप हैं।
पूर्व सरपंचों पर ये हैं आरोप
पूर्व ग्राम पंचायतों पर आरोप हैं कि उन्होंने निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किया और राशि का गबन किया। इसके अलावा, चेहतों को ग्राम पंचायतों की जमीनों पर कब्जे कराने, बिना काम किए ही राशि का गबन करने समेत अन्य आरोप हैं। कई शिकायतों में अधिकारियों के नामों की भी जिक्र है क्योंकि अकेले सरपंच या पंचायत गबन नहीं कर सकती। निमार्ण कार्यों की गुणवत्ता समेत अन्य कार्यों को जांचने की जिम्मेदारी जेई और पंचायती राज अधिकारियों की है। इसलिए ये अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं।
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ई टेंडरिंग को लेकर चल रहा है विरोध
पिछली पंचायतों में सरपंचों के पास वित्तीय शक्तियां थी, लेकिन इस बार सरकार ने 2 लाख रुपये से अधिक राशि के कार्यों का ई टेंडरिंग कराने का फैसला लिया है। सरपंच इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे लागू करना चाहती है। सरकार का तर्क है कि पहले मेनुअली कार्यों में गड़बड़ी अधिक होती थी।
जिला शिकायतें
नूंह 162
करनाल 94
हिसार 84
झज्जर 80
जींद 84
रेवाड़ी 83
पलवल 82
पानीपत 82
कैथल 71
कुरुक्षेत्र 61
महेंद्रगढ़ 54
चरखीदादरी 76
यमुनानगर 71
अंबाला 64
फरीदाबाद 56
सिरसा 58
सोनीपत 52
फतेहाबाद 49
भिवानी 46
रोहतक 40
गुरुग्राम 27
पंचकूला 14
कुल 1490
हरियाणा सरकार पंचायतों में पारदर्शिता लाने और विकास कार्यों में गुणवत्ता लाने के लिए ई-टेंडरिंग पॉलिसी लेकर आई है। इससे सरपंच विकास कार्यों की निगरानी कर सकेंगे और हर कार्य के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। सरपंचों को ई टेंडरिंग को अपनाना चाहिए। जहां तक पुरानी जांचों की बात हैं, इनकी जांच कराए जा रही है, इसमें जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। -देवेंद्र बबली, विकास एवं पंचायत मंत्री।
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विकास एवं पंचायत विभाग की विजिलेंस विंग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक गड़बड़ी के मामले नूंह जिले में 164 और करनाल जिले की 94 पूर्व ग्राम पंचायतें शामिल हैं। वहीं, सबसे कम गड़बड़ी की शिकायतें गुरुग्राम में 27 और पंचकूला में 14 मामले हैं। शिकायतों की समीक्षा में पाया गया है कि पूर्व सरपंचों पर वित्तीय शक्तियों के गलत प्रयोग करने के आरोप हैं। इन गड़बड़ियों में ग्राम सचिव, जेई, एसडीओ से लेकर अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के भी आरोप हैं।
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पूर्व सरपंचों पर ये हैं आरोप
पूर्व ग्राम पंचायतों पर आरोप हैं कि उन्होंने निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किया और राशि का गबन किया। इसके अलावा, चेहतों को ग्राम पंचायतों की जमीनों पर कब्जे कराने, बिना काम किए ही राशि का गबन करने समेत अन्य आरोप हैं। कई शिकायतों में अधिकारियों के नामों की भी जिक्र है क्योंकि अकेले सरपंच या पंचायत गबन नहीं कर सकती। निमार्ण कार्यों की गुणवत्ता समेत अन्य कार्यों को जांचने की जिम्मेदारी जेई और पंचायती राज अधिकारियों की है। इसलिए ये अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं।
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ई टेंडरिंग को लेकर चल रहा है विरोध
पिछली पंचायतों में सरपंचों के पास वित्तीय शक्तियां थी, लेकिन इस बार सरकार ने 2 लाख रुपये से अधिक राशि के कार्यों का ई टेंडरिंग कराने का फैसला लिया है। सरपंच इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे लागू करना चाहती है। सरकार का तर्क है कि पहले मेनुअली कार्यों में गड़बड़ी अधिक होती थी।
जिला शिकायतें
नूंह 162
करनाल 94
हिसार 84
झज्जर 80
जींद 84
रेवाड़ी 83
पलवल 82
पानीपत 82
कैथल 71
कुरुक्षेत्र 61
महेंद्रगढ़ 54
चरखीदादरी 76
यमुनानगर 71
अंबाला 64
फरीदाबाद 56
सिरसा 58
सोनीपत 52
फतेहाबाद 49
भिवानी 46
रोहतक 40
गुरुग्राम 27
पंचकूला 14
कुल 1490
हरियाणा सरकार पंचायतों में पारदर्शिता लाने और विकास कार्यों में गुणवत्ता लाने के लिए ई-टेंडरिंग पॉलिसी लेकर आई है। इससे सरपंच विकास कार्यों की निगरानी कर सकेंगे और हर कार्य के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। सरपंचों को ई टेंडरिंग को अपनाना चाहिए। जहां तक पुरानी जांचों की बात हैं, इनकी जांच कराए जा रही है, इसमें जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। -देवेंद्र बबली, विकास एवं पंचायत मंत्री।