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International Youth Day: 100% दिव्यांग...पर हिम्मत नहीं हारी, देश के लिए किए छह आविष्कार
Wed, 12 Aug 2020 10:34 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 12 Aug 2020 10:34 AM IST
सार
- सीएसआईआर चंडीगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं डॉ. मनोज पटेल
- सीमित संसाधनों में भी बुलंदी तक पहुंचे, बने युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत
- चुनौतियों में भी हार नहीं मानी, आविष्कारों के लिए मिले सात अवार्ड
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वैज्ञानिक मनोज पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सौ फीसदी दिव्यांग हैं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वैज्ञानिक बनकर नाम रोशन किया और छह आविष्कार करके देश को नई तकनीकें दीं। कहते हैं कोई भी सफलता आसानी से नहीं मिलती। उसके लिए कड़ी मेहनत, लगन व धैर्य के साथ आगे बढ़ना होता है। सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज पटेल को भी कई चुनौतियों से जूझना पड़ा, लेकिन वह कभी घबराए नहीं। अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुए और सफलता उनके कदम चूमती गई।
मात्र 33 साल की उम्र में उन्होंने न सिर्फ समाज बल्कि देश को कई ऐसी तकनीक दी हैं, जिसका फायदा आम आदमी और किसानों को मिल रहा है। डॉ. पटेल मूलरूप से यूपी के बांदा जिले के मियांबरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। गांव के सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने जमशेदपुर में एनआईटी से बीटेक की डिग्री हासिल की। उसके बाद सीएसआईआर के चंडीगढ़ सेंटर में उन्हें रिसर्च फेलोशिप करने का मौका मिला।
यहां पर भी उन्होंने बहुत ही बेहतरीन कार्य किए और साल 2012 में वैज्ञानिक के पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। तीन साल बाद वह सीनियर वैज्ञानिक के पद पर प्रमोट हो गए। हालांकि इतने कम समय में किसी की उन्नति संभव नहीं होती, लेकिन डॉ. पटेल को यह सौभाग्य सिर्फ मेहनत के बल पर मिला है। वह सौ फीसदी दिव्यांग हैं, लेकिन कभी भी वह इससे मायूस नहीं होते और न ही कभी इसे अपनी ढाल बनाया। साढ़े सात साल के सफर में वह अब तक देश को छह नई टेक्नोलॉजी दे चुके हैं। इसकी बदौलत कुछ स्टार्टअप खुले और रोजगार भी सृजित हुए।
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मात्र 33 साल की उम्र में उन्होंने न सिर्फ समाज बल्कि देश को कई ऐसी तकनीक दी हैं, जिसका फायदा आम आदमी और किसानों को मिल रहा है। डॉ. पटेल मूलरूप से यूपी के बांदा जिले के मियांबरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। गांव के सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने जमशेदपुर में एनआईटी से बीटेक की डिग्री हासिल की। उसके बाद सीएसआईआर के चंडीगढ़ सेंटर में उन्हें रिसर्च फेलोशिप करने का मौका मिला।
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यहां पर भी उन्होंने बहुत ही बेहतरीन कार्य किए और साल 2012 में वैज्ञानिक के पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। तीन साल बाद वह सीनियर वैज्ञानिक के पद पर प्रमोट हो गए। हालांकि इतने कम समय में किसी की उन्नति संभव नहीं होती, लेकिन डॉ. पटेल को यह सौभाग्य सिर्फ मेहनत के बल पर मिला है। वह सौ फीसदी दिव्यांग हैं, लेकिन कभी भी वह इससे मायूस नहीं होते और न ही कभी इसे अपनी ढाल बनाया। साढ़े सात साल के सफर में वह अब तक देश को छह नई टेक्नोलॉजी दे चुके हैं। इसकी बदौलत कुछ स्टार्टअप खुले और रोजगार भी सृजित हुए।
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इन तकनीक को दिया जन्म
- इलेक्ट्रोस्टेटिक कीटनाशक स्प्रेयर
- इलेक्ट्रोस्टेटिक स्मॉग कंट्रोल डिवाइस
- इलेक्ट्रोस्टेटिक कीटाणुनाशक व सैनिटाइजेशन मशीन
डॉ. मनोज पटेल को मिल चुके हैं यह अवार्ड
- साल 2020: सीएसआईआर यंग साइंटिस्ट अवार्ड
- साल 2020: सुशीला शर्मा न्यू आइडिया अवार्ड
- साल 2019: आईईआई यंग इंजीनियर्स अवार्ड
- साल 2018: एनआरडीसी नेशनल सोसाइटिल इनोवेशन अवार्ड
- साल 2017: सोशल इनोवेशन अवार्ड
- साल 2016: गांधियन यंग टेक्नोलाजिकल इनोवेशन अवार्ड
- साल 2015: स्कॉच स्मार्ट टेक्नोलाजी अवार्ड