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UNO के सदस्य देशों ने योग दिवस मनाने का लिया संकल्प
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Jun 2016 09:58 AM IST
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इंटरनेशनल योग डे पर चंडीगढ़ में मोदी की क्लास
- फोटो : फाइल फोटो
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संयुक्त राष्ट्र महासंघ के 69वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व समुदाय से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का आह्वान किया था। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्यों ने 177 सह समर्थक देशों के साथ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का संकल्प सर्वसम्मति से लिया। 21 जून 2015 को नई दिल्ली राजपथ पर पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें रिकॉर्ड 35 हजार 985 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 84 देशों के नागरिक भी इस सत्र के प्रतिभागी बने। यह दोनों चीजें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
आज का आसन त्रिकोणासन
त्रिकोणासन शब्द का अर्थ त्रि अर्थात तीन कोणों वाला आसन है। चूंकि आसन के अभ्यास के समय शरीर एवं पैरों से बनीं आकृति तीन भुजाओं के सदृश्य दिखाई देती है, इसलिए इस अभ्यास को त्रिकोणासन कहते हैं।
अभ्यास विधि
- त्रिकोणासन के अभ्यास के समय दोनों पैरों को फैलाकर आराम से खड़ा होना चाहिए।
- दोनों हाथों को आकाश के समानांतर होने तक धीरे-धीरे उठाना चाहिए।
- श्वास को शरीर से बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे दाईं तरफ झुकना चाहिए। झुकने के बाद दायां हाथ दाएं पैर के पास जमीन पर रखना चाहिए।
- बाएं हाथ को सीधे ऊपर की ओर रखते हुए दाएं हाथ की सीध में लाना चाहिए।
- उसके बाद बाईं हथेली को आगे की ओर लाना चाहिए।
- सिर को घुमाते हुए बाएं हाथ की बीच वाली उंगली को देखना चाहिए।
- सामान्य श्वास लेते हुए इस आसन में 10-30 सेकेंड तक रुकना चाहिए।
- श्वास को शरीर के अंदर लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएं।
- इस आसन को दूसरी ओर से भी करना चाहिए।
लाभ
- पैर के तलवों से संबंधित विसंगतियों से बचता है।
- पिंडिका जांघों और कटि भाग की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- मेरुदंड को लचीला बनाता है और फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ता है।
सावधानियां
- स्लिप्ड डिस्क, साइटिका एवं उदर में किसी प्रकार की सर्जरी होने के बाद इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
- शरीर की कार्य क्षमता और सीमा से परे जाकर न करें तथा शरीर को सीमा से अधिक न खींचें।
- अभ्यास करते समय अगर आप जमीन को न छू सकें तो घुटनों को छूने का प्रयास करें।
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आज का आसन त्रिकोणासन
त्रिकोणासन शब्द का अर्थ त्रि अर्थात तीन कोणों वाला आसन है। चूंकि आसन के अभ्यास के समय शरीर एवं पैरों से बनीं आकृति तीन भुजाओं के सदृश्य दिखाई देती है, इसलिए इस अभ्यास को त्रिकोणासन कहते हैं।
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अभ्यास विधि
- त्रिकोणासन के अभ्यास के समय दोनों पैरों को फैलाकर आराम से खड़ा होना चाहिए।
- दोनों हाथों को आकाश के समानांतर होने तक धीरे-धीरे उठाना चाहिए।
- श्वास को शरीर से बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे दाईं तरफ झुकना चाहिए। झुकने के बाद दायां हाथ दाएं पैर के पास जमीन पर रखना चाहिए।
- बाएं हाथ को सीधे ऊपर की ओर रखते हुए दाएं हाथ की सीध में लाना चाहिए।
- उसके बाद बाईं हथेली को आगे की ओर लाना चाहिए।
- सिर को घुमाते हुए बाएं हाथ की बीच वाली उंगली को देखना चाहिए।
- सामान्य श्वास लेते हुए इस आसन में 10-30 सेकेंड तक रुकना चाहिए।
- श्वास को शरीर के अंदर लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएं।
- इस आसन को दूसरी ओर से भी करना चाहिए।
लाभ
- पैर के तलवों से संबंधित विसंगतियों से बचता है।
- पिंडिका जांघों और कटि भाग की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- मेरुदंड को लचीला बनाता है और फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ता है।
सावधानियां
- स्लिप्ड डिस्क, साइटिका एवं उदर में किसी प्रकार की सर्जरी होने के बाद इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
- शरीर की कार्य क्षमता और सीमा से परे जाकर न करें तथा शरीर को सीमा से अधिक न खींचें।
- अभ्यास करते समय अगर आप जमीन को न छू सकें तो घुटनों को छूने का प्रयास करें।