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सर्वेः भाजपा को हरियाणा में 50 सीटें

Thu, 11 Sep 2014 01:26 PM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Sep 2014 01:26 PM IST
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Internal Survey: BJP may win 50 Seats in Haryana Assembly Elections

हरियाणा की चुनावी जंग के लिए भाजपा का लक्ष्य भले ही मिशन 60 प्लस हो लेकिन पार्टी का आंतरिक सर्वे कह रहा है कि विधानसभा में संख्या बल का आंकड़ा अर्ध शतक के इर्दगिर्द सिमट सकता है।

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हरियाणा जनहित कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद एकला चल रही भाजपा अब भी अपने दम पर बहुमत मिल जाने की उम्मीद में चुनावी जंग में कूदी है। हालांकि हरियाणा को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक का आकलन आना अभी बाकी है।
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अमित शाह की पहल पर किया सर्वे
विधानसभा चुनाव को लेकर यह आंतरिक सर्वे भाजपा के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पहल पर किया गया है। इसमें किसी प्रोफेशनल सर्वे एजेंसी के बजाय पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं की मदद से किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार इस सर्वे में कहा गया है कि भाजपा को अपने दम पर लगभग 50 सीटें जीत सकती हैं। लोकसभा चुनाव में 10 में से सात सीटें जीतने वाली भाजपा को तब 53 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी।

भाजपा अध्यक्ष रहते हुए नितिन गडकरी भी इसी तरह के सर्वे कराते थे। यह सर्वे शुरुआती दौर का है और पार्टी इस तरह के और भी सर्वे कराएगी।

निजी चैनलों और एजेंसी ने किया था सर्वे

Internal Survey: BJP may win 50 Seats in Haryana Assembly Elections

खास बात यह है कि बीते दिनों एक निजी चैनल और एजेंसी ने जो सर्वे किया था, उसमें भाजपा-हजकां गठबंधन को 46 सीटें दी गई थीं। अब जबकि हजकां की भाजपा से दोस्ती टूट चुकी है, भाजपा अकेले दम ही इससे ज्यादा सीटें पाने का दावा कर रही है।

दरअसल, पार्टी को अब भी नरेंद्र मोदी लहर चलने की उम्मीद है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर कांड के बाद भाजपा को लोकसभा चुनाव की तरह हरियाणा में भी जाट समुदाय अपने साथ दिख रहा है। जबकि गैर जाट समुदायों को भाजपा पहले से अपने पाले में मानती रही है।

इनेलो का भी दावा: 50 से ज्यादा सीट जीतेंगे
भाजपा के इस सर्वे के विपरीत इनेलो का दावा है कि प्रदेश में इस बार उसी की सरकार बनेगी। पार्टी नेता राम सिंह बरार का कहना है कि 2009 के  लोकसभाचुनाव में जब इनेलो को एक भी सीट नहीं मिली थी, तब विधानसभा में उसे 31 सीटें मिली थीं।

जबकि इस बार 2014 के चुनाव में इनेला को दो सीटें मिली हैं। इनेलो को उम्मीद है कि  कांग्रेस के 10 साल के शासन के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी का लाभ उसे ही मिलेगा और उसे 50 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

अब दूसरी सूची पर सबकी नजर

Internal Survey: BJP may win 50 Seats in Haryana Assembly Elections

भाजपा की पहली सूची में टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कई नेताओं की निराशा हाथ लगी है, अब उनकी नजर दूसरी सूची पर टिकी है। दूसरी सूची जारी होने से पहले दूसरे दलों से आए जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है, उन्होंने दोबारा से पैरवी शुरू कर दी है।

अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने के लिए लंबी लिस्ट लिए घूम रहे दिग्गजों को भी टिकट वितरण में अधिक तरजीह नहीं दी गई। भाजपा खेमे में यह चर्चा आम है कि टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा की पूरी चली है। पार्टी ने दलबदलुओं पर भरोसा जताने के बजाए कॉडर को प्राथमिकता दी है।

दलबदलुओं में उन्हीं को टिकट दिया गया जहां पर भाजपा के पास मजबूत दावेदार नहीं थे। रिश्तेदारों को टिकट देने के आरोपों से पार्टी नहीं बच पाई हैं। प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा के समधी को टिकट देकर भाजपा को रिश्तेदारी का आरोप भी झेलना पड़ेगा। शर्मा के समधी को टिकट मिलने के बाद अभी भी कई नेता अपने पारिवारिक सदस्यों के लिए दांव लगा रहे हैं।

दिग्गजों ने की थी पसंदीदा नेताओं की ‌सिफारिश

Internal Survey: BJP may win 50 Seats in Haryana Assembly Elections

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश के सांसदों के अलावा वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने पसंद के उम्मीदवारों के नाम पैनल में डलवाए था। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह जहां अपनी बेटी आरती राव को टिकट दिलाना चाहते थे, वहीं महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर अपने भाई के लिए प्रयासरत थे।

इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सांसद राजकुमार सैनी, रतनलाल कटारिया, ओमप्रकाश धनखड़ सहित कई नेताओं ने भी अपने करीबियों की सूची भेजकर इनका नाम उम्मीदवारों के पैनल में डलवाया था।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि राज्य इकाई से प्राप्त उम्मीदवारों का पैनल मिलने के बाद शाह ने आंतरिक सर्वे के आधार पर तैयार की गई उम्मीदवारों की सूची के आधार पर नई सूची तैयार की थी।

सीईसी की बैठक में इसी नई सूची पर विचार विमर्श हुआ। चूंकि हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए चौधरी बीरेंद्र सिंह खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, इसलिए उनके स्थान पर उनकी पत्नी को टिकट दिया गया।

न सलाह ली, न सुझाव माना शाह ने

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हरियाणा में उम्मीदवारों के चयन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किसी के सलाह और सुझावों को कोई तरजीह नहीं दी। शाह के इस रुख के कारण प्रदेश के सांसद और बड़े नेता न तो अपने रिश्तेदारों को टिकट से उपकृत कर पाए और न ही अपने करीबियों को टिकट का तोहफा दे पाए।

दरअसल केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले ही शाह ने प्रदेश में कराए गए तीन आंतरिक सर्वे के जरिए तैयार उम्मीदवारों के पैनल का प्रदेश इकाई द्वारा तैयार पैनल से मिलान कर नई सूची तैयार की थी। इस पर उन्होंने हरियाणा का प्रभार संभाल चुके पीएम नरेंद्र मोदी के साथ भी बैठक से पहले ही चर्चा कर ली थी।

पार्टी अध्यक्ष अन्य चुनावी राज्यों में उम्मीदवारों के चयन के मामले में भी हरियाणा का ही फार्मूला अपनाएंगे। इन राज्यों में भी शाह ने उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी के स्तर पर होने वाली कसरत के इतर आंतरिक सर्वे कराकर उम्मीदवारों का पैनल पहले ही तैयार कर लिया है।

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