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नई व्यवस्थाः सीएचबी में अब एक क्लिक पर दिखेगी आपकी फाइल, ऐसे उठाएं फायदा
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:55 PM IST
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) में अब इंटरनल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने जा रहा है। इस सिस्टम के लागू होने से आम लोगों को काफी फायदा होगा। बोर्ड में फाइलें लटकाने और गायब करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। बोर्ड में ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का काम पूरा होने वाला है। बोर्ड के मुताबिक दो हफ्ते में यह सिस्टम लागू कर दिया जाएगा।
सीएचबी में नया सिस्टम लागू होने के बाद बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेवारी तय हो जाएगी। अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकारियों के पास लंबे समय तक दर्जनों फाइलें लटकी रहती हैं। वह इन्हें आगे पास ही नहीं करते। जानकारी लेने पर कोई न कोई बहाना बनाकर आम लोगों को परेशान किया जाता है लेकिन नया सिस्टम लागू हो जाने के बाद ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा।
बोर्ड ने खुद का बनवाया सॉफ्टवेयर
इंटरनल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने लिए बोर्ड ने खुद ही अपना सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसका काम अब पूरा होने वाला है। इसमें बोर्ड के अंदर सभी विभागों का डाटा डाला जा रहा है। इससे सभी विभागों का रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा। अभी यह पता लगाने में काफी मशक्कत करने पड़ती है कि कौन सी फाइनल किस अधिकारी और विभाग के पास है। इससे काम में पारदर्शिता आने के साथ ही तेजी भी आएगी।
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ऐसे काम करता है ट्रैकिंग सिस्टम
जानकारी के मुताबिक डीसी ऑफिस सेक्टर-17 और चंडीगढ़ नगर निगम में ट्रैकिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत दोनों कार्यालयों की एक से दूसरी विंग में जाने वाली फाइल की एंट्री ऑनलाइन सिस्टम में की जाती है। कंप्यूटर से जनरेट होने वाले बारकोड को फाइल पर लगाया जाता है। इसके बाद जब फाइल संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के पास जाती है तो रिसीव करने वाला अधिकारी बारकोड को सिस्टम में दर्ज करता है। इससे ये पुष्टि हो जाती है कि फाइल संबंधित व्यक्ति के पास पहुंच चुकी है।
अब फाइल गायब करना नहीं होगा आसान
जानकारों का कहना है कि सीएचबी एक बड़ा बोर्ड ऑफिस है। यहां पर अक्सर फाइलें गायब होने की शिकायतें मिलती रहती हैं और मौजूदा सिस्टम में यह पता लगाने में काफी मुश्किल पेश आती है कि फाइल कहां से गायब हुई। इसका कारण यह है कि फाइल कहां तक पहुंची और कहां अटकी या गायब हुई, इसकी मॉनिटरिंग का कोई ठोस सिस्टम नहीं है। इंटरनल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने के बाद आसानी से पता लग जाएगा कि आवेदक की फाइल कहां तक पहुंची है और कहां अटक गई या गायब हो गई। नया सिस्टम जेडीए में फाइल गुम या गायब करने को बेहद मुश्किल बना देगा।
देर होने पर होगी कार्रवाई
कार्यालय में कौन सी फाइल कितने दिनों तक किस अधिकारी और विभाग के पास पड़ी रही है, इसका पूरा रिकॉर्ड इस नए सिस्टम में अपडेट होगा इसलिए अधिकारियों को जल्दी ही इन फाइलों को अप्रूव करना होगा। अगर किसी अधिकारी के पास अधिक देर तक कोई फाइल पेंडिंग रहती है तो बोर्ड द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सिटीजन चार्टर के तहत बोर्ड ने कार्रवाई भी तय कर रखी है। सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के चेयरमैन निर्मल दत्त ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है। इससे लोगों के काम ज्यादा देर तक नहीं लटकेंगे। हाउसिंग बोर्ड के शहर में 64 हजार के करीब मकान हैं इसलिए नए सिस्टम का सीधा फायदा इन सभी लोगों को ही पहुंचेगा।
ट्रैकिंग सिस्टम के लिए बोर्ड ने खुद अपना सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसका काम लगभग पूरा हो चुका है। कौन सी फाइनल किस विभाग के अंदर पेंडिंग पड़ी है अब इसका पता तत्काल लग जाएगा।
- हरीश नायर, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, सीएचबी
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सीएचबी में नया सिस्टम लागू होने के बाद बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेवारी तय हो जाएगी। अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकारियों के पास लंबे समय तक दर्जनों फाइलें लटकी रहती हैं। वह इन्हें आगे पास ही नहीं करते। जानकारी लेने पर कोई न कोई बहाना बनाकर आम लोगों को परेशान किया जाता है लेकिन नया सिस्टम लागू हो जाने के बाद ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा।
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बोर्ड ने खुद का बनवाया सॉफ्टवेयर
इंटरनल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने लिए बोर्ड ने खुद ही अपना सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसका काम अब पूरा होने वाला है। इसमें बोर्ड के अंदर सभी विभागों का डाटा डाला जा रहा है। इससे सभी विभागों का रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा। अभी यह पता लगाने में काफी मशक्कत करने पड़ती है कि कौन सी फाइनल किस अधिकारी और विभाग के पास है। इससे काम में पारदर्शिता आने के साथ ही तेजी भी आएगी।
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ऐसे काम करता है ट्रैकिंग सिस्टम
जानकारी के मुताबिक डीसी ऑफिस सेक्टर-17 और चंडीगढ़ नगर निगम में ट्रैकिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत दोनों कार्यालयों की एक से दूसरी विंग में जाने वाली फाइल की एंट्री ऑनलाइन सिस्टम में की जाती है। कंप्यूटर से जनरेट होने वाले बारकोड को फाइल पर लगाया जाता है। इसके बाद जब फाइल संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के पास जाती है तो रिसीव करने वाला अधिकारी बारकोड को सिस्टम में दर्ज करता है। इससे ये पुष्टि हो जाती है कि फाइल संबंधित व्यक्ति के पास पहुंच चुकी है।
अब फाइल गायब करना नहीं होगा आसान
जानकारों का कहना है कि सीएचबी एक बड़ा बोर्ड ऑफिस है। यहां पर अक्सर फाइलें गायब होने की शिकायतें मिलती रहती हैं और मौजूदा सिस्टम में यह पता लगाने में काफी मुश्किल पेश आती है कि फाइल कहां से गायब हुई। इसका कारण यह है कि फाइल कहां तक पहुंची और कहां अटकी या गायब हुई, इसकी मॉनिटरिंग का कोई ठोस सिस्टम नहीं है। इंटरनल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने के बाद आसानी से पता लग जाएगा कि आवेदक की फाइल कहां तक पहुंची है और कहां अटक गई या गायब हो गई। नया सिस्टम जेडीए में फाइल गुम या गायब करने को बेहद मुश्किल बना देगा।
देर होने पर होगी कार्रवाई
कार्यालय में कौन सी फाइल कितने दिनों तक किस अधिकारी और विभाग के पास पड़ी रही है, इसका पूरा रिकॉर्ड इस नए सिस्टम में अपडेट होगा इसलिए अधिकारियों को जल्दी ही इन फाइलों को अप्रूव करना होगा। अगर किसी अधिकारी के पास अधिक देर तक कोई फाइल पेंडिंग रहती है तो बोर्ड द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सिटीजन चार्टर के तहत बोर्ड ने कार्रवाई भी तय कर रखी है। सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन के चेयरमैन निर्मल दत्त ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है। इससे लोगों के काम ज्यादा देर तक नहीं लटकेंगे। हाउसिंग बोर्ड के शहर में 64 हजार के करीब मकान हैं इसलिए नए सिस्टम का सीधा फायदा इन सभी लोगों को ही पहुंचेगा।
ट्रैकिंग सिस्टम के लिए बोर्ड ने खुद अपना सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसका काम लगभग पूरा हो चुका है। कौन सी फाइनल किस विभाग के अंदर पेंडिंग पड़ी है अब इसका पता तत्काल लग जाएगा।
- हरीश नायर, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, सीएचबी