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डेपुटेशन पर आने वाले 5 नए डीएसपी की नियुक्ति पर अंतरिम रोक

Sat, 21 May 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 21 May 2016 01:46 AM IST
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interim stay on appointment of 5 new DSP On deputation at chandigarh
CAT - फोटो : demo pics

 वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे यूटी के इंस्पेक्टरों को नजरअंदाज करते हुए हरियाणा से 5 डीएसपी का पैनल मंगाने की तैयारी कर रहे प्रशासन की फिलहाल यह मंशा पूरी नहीं होगी। यूटी के 4 सीनियर इंस्पेक्टरों की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में डीएसपी पद पर अपनी योग्यता को आधार बनाते हुए प्रमोट करने के लिए याचिका दायर की गई है।

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याचिका में उन्होंने संबंधित पद के लिए हरियाणा से मंगाए गए 5 अधिकारियों के पैनल की कार्रवाई को तानाशाह और गैरकानूनी बताया है। इस पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने भारत सरकार, यूटी प्रशासन, गृह सचिव और आईजी को नोटिस जारी कर 2 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही यूटी में बाहर से डेपुटेशन पर आने वाले डीएसपी की नियुक्ति पर जवाब दाखिल करने तक रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
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वहीं चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश हुए एडवोकेट अरविंद मोदगिल ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने डेपुटेशन की ज्वाइनिंग पर स्टे लगाया है, जबकि पैनल की प्रक्रिया की तैयारी पर कोई रोक नहीं लगी है। याचिका यूटी पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर जसविंदर सिंह, उदय पाल रावत, अमराव सिंह और दिलशेर सिंह की ओर से दायर की गई है। इसमें अपील की गई है कि प्रतिवादी पक्ष को आदेश दिए जाएं कि, वरिष्ठता के अनुसार यूटी पुलिस के योग्य इंस्पेक्टरों को डिप्टी सुपरिंटिेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के खाली पड़े पदों पर पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स के तहत तैनाती देने पर विचार किया जाए।
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यह रूल वर्ष 2010 में संशोधित हुआ था। उनका कहना है कि भर्ती नियमों का उल्लंघन कर प्रतिनियुक्ति के जरिए डीएसपी का पद न भरा जाए। चारों इंस्पेक्टरों की ओर से कहा गया है कि चंडीगढ़ में डीएसपी के 23 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 22 एग्जीक्यूटिव कैडर के हैं। इनमें दो पोस्ट एक्स-कैडर की भी हैं। 

यूटी ने कोई रिक्रूटमेंट रूल्स नहीं बनाया 

interim stay on appointment of 5 new DSP On deputation at chandigarh
कोर्ट - फोटो : file photo

याचिका में इंस्पेक्टरों का कहना है कि डीएसपी पद के लिए यूटी ने कोई रिक्रूटमेंट रूल्स नहीं बनाए हैं। सर्विस रूल्स का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डीएसपी पद के लिए 80 प्रतिशत प्रमोशन ओर 20 प्रतिशत सीधी नियुक्ति के जरिए होना चाहिए। इसमें 18 अगस्त 2010 को हुए संशोधित नियमों का भी हवाला दिया गया है।

डीएसपी पद पर प्रमोशन के लिए न्यूनतम योग्यता 6 साल तक इंस्पेक्टर पद पर रहना है। चारों इंस्पेक्टरों को इस पद पर 6 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। याचिकाकर्ताओं ने विभाग की ओर से 2013 में जारी सीनियोरिटी लिस्ट की जानकारी देते हुए डीएसपी पद के लिए खुद की दावेदारी पेश की है। साथ ही कहा है कि रिक्रूटमेंट रूल्स में कहीं भी डेपुटेशन से डीएसपी का पद भरने का प्रावधान नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला याचिका में चारों इंस्पेक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल के फैसलोें का भी हवाला दिया है। साथ ही कहा है कि वर्तमान में 5 चंडीगढ़ पुलिस काडर के अफसर (1 एक्सटेंशन पर) इन पदों पर काबिज हैं, जबकि बाकी 13 पद पंजाब, हरियाणा, दानिपस व आईपीएस के जरिए भरे गए हैं। इसके अलावा 4 पद खाली हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने खुद निर्देश दिए हुए है कि अपने कर्मियों को उच्च पदों के लिए प्रमोशन में प्राथमिकता देगा, अगर वह योग्य हैं। 20 अगस्त, 1987 को यह निर्देश जारी हुए थे।  

हर साल डीपीसी बैठाने के हैं आदेश याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग के निर्देशों का पालन करता है। इसमें विभिन्न विभागों को खाली पदों को भरने के लिए समय पर डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) बैठाने को कहा गया है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष अप्रैल या मई में यह होनी चाहिए। इसके तहत प्रतिवादी पक्ष को डेपुटेशन पर बाहर से डीएसपी बुलाने के बजाए समय पर डीपीसी बैठानी चाहिए थी। 

हरियाणा से अफसर बुलाने का पता चलने पर ली कैट की शरण अप्रैल 2016 में चंडीगढ़ प्रशासन को पुलिसकर्मियों के काम और आचरण की रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें 10 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद के लिए उन पर विचार करने को कहा गया था। इनमें ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करने वाले चारों इंस्पेक्टरों के नाम भी शामिल थे। इसी बीच इन्हें पता चला कि हरियाणा से 5 अधिकारियों का डीएसपी के लिए पैनल बुलाया गया है। इसे लेकर 17 मई को उन्होंने विभाग में रिप्रेजेंटेशन दी थी। अपनी प्रमोशन पर विचार न होने का अंदेशा होने पर उन्होंने कैट की शरण ली। 

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