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अब बांझपन और दुर्घटनावश गर्भपात का क्लेम भी देंगी इंश्योरेंस कंपनियां
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Sep 2017 09:09 AM IST
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- फोटो : File Photo
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विदेशों की तर्ज पर अब भारत में भी बांझपन और हादसे में हुए गर्भपात के लिए बीमा कंपनियां मुआवजा देंगी। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए) ने बताया कि कुछ कंपनियों ने हाईकोर्ट की पहल के बाद ऐसी पॉलिसी आरंभ की हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में ताजा स्टेटस रिपोर्ट हलफनामा देकर दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
मामले में जनहित याचिका दाखिल करते हुए मोनिका डी. मेहताब ने कहा था कि अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों में बांझपन या हादसे से हुआ गर्भपात बीमा कवर में आता है। बांझपन की स्थिति में यह क्लेम अच्छे से अच्छा इलाज करवाने के लिए मुहैया करवाया जाता है। देश में अभी तक इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में चार सरकारी बीमा कंपनियों, केंद्र सरकार और आईआरडीए को पार्टी बनाया था।
वीरवार को इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से कहा गया कि आईआरडीए ही इंश्योरेंस की रेगुलेटरी अथॉरिटी है और ऐसे में उन्हें ऐसे रेगुलेशन बनाने के निर्देश दिए जाएं जिससे बांझपन और गर्भपात को बीमा कवर क्षेत्र में शामिल किया जाए। रेगुलेशन बनने के बाद ही सरकारी और प्राइवेट बीमा कंपनियां इस कवर का लाभ दे पाएंगी।
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हीं केंद्र सरकार ने कहा था कि यदि आईआरडीए ऐसा रेगुलेशन तैयार करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इसके लिए कोर्ट में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। हाईकोर्ट ने इस पर आईआरडीए से जवाब मांगा था। आईआरडीए के वकील मानव बजाज द्वारा सोमवार को दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस केस की काफी देर बाद सुनवाई हुई है। ऐसे में इससे जुड़ी ताजा रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
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मामले में जनहित याचिका दाखिल करते हुए मोनिका डी. मेहताब ने कहा था कि अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य देशों में बांझपन या हादसे से हुआ गर्भपात बीमा कवर में आता है। बांझपन की स्थिति में यह क्लेम अच्छे से अच्छा इलाज करवाने के लिए मुहैया करवाया जाता है। देश में अभी तक इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में चार सरकारी बीमा कंपनियों, केंद्र सरकार और आईआरडीए को पार्टी बनाया था।
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वीरवार को इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से कहा गया कि आईआरडीए ही इंश्योरेंस की रेगुलेटरी अथॉरिटी है और ऐसे में उन्हें ऐसे रेगुलेशन बनाने के निर्देश दिए जाएं जिससे बांझपन और गर्भपात को बीमा कवर क्षेत्र में शामिल किया जाए। रेगुलेशन बनने के बाद ही सरकारी और प्राइवेट बीमा कंपनियां इस कवर का लाभ दे पाएंगी।
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हीं केंद्र सरकार ने कहा था कि यदि आईआरडीए ऐसा रेगुलेशन तैयार करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इसके लिए कोर्ट में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। हाईकोर्ट ने इस पर आईआरडीए से जवाब मांगा था। आईआरडीए के वकील मानव बजाज द्वारा सोमवार को दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस केस की काफी देर बाद सुनवाई हुई है। ऐसे में इससे जुड़ी ताजा रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।