{"_id":"5bc6f265bdec226975788513","slug":"instrument-landing-system-on-international-airport-chandigarh-for-landing-and-take-off-of-fogg","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब घने कोहरे में भी लैंड कर सकेंगे विमान, भर सकेंगे उड़ान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब घने कोहरे में भी लैंड कर सकेंगे विमान, भर सकेंगे उड़ान
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 17 Oct 2018 01:57 PM IST
विज्ञापन
एयरपोर्ट पर घना कोहरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ में इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब घने कोहरे और खराब मौसम के चलते विमानों की उड़ान प्रभावित नहीं होगी। टेक ऑफ भी आसानी से हो सकेगा। इसके लिए यहां अत्याधुनिक कैट थ्री-बी तकनीक के साथ इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) का उपयोग शुरू होने जा रहा है। इस सिस्टम के जरिए खराब मौसम में भी एयरफोर्स और यात्री विमानों की सफल लैंडिंग कराई जा सकेगी। साथ ही घने कोहरे में 50 मीटर की विजिबिलिटी में भी विमानों की लैंडिंग आसानी से हो जाएगी। एयरफोर्स के निकट आईएलएस सिस्टम लगवाने का काम तेजी से चल रहा है। इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
कोहरे के शुरुआत होते ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों को संचालन प्रभावित हो जाता है। कभी-कभी तो कोहरा नहीं छटने ओर मौसम खराब होने से कई उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं। इसके अलावा कई विमानों के रूट को डायवर्ट भी करना पड़ता है। इसके चलते यात्रियों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। यात्रियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने कैट थ्री-बी तकनीक और रन-वे विजिबिलिटी रेंज (आरवीआर) के साथ ही आईएलएस लगवाने का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। प्रशासन जल्द से जल्द इस काम को पूरा करना चाहता है ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
ऐसे होगी विमानों की लैंडिंग
एयरपोर्ट पर अब 50 मीटर की विजिबिलिटी तक में उड़ानों का निर्बाध आवागमन हो सकेगा। हालांकि कैट थ्री बी के लिए तकनीकी तौर पर ट्रेंड पायलट ही 50 मीटर की विजिबिलिटी में लैंड व टेक ऑफ कर सकेंगे। जानकारों की मानें तो वर्तमान समय में जो भी पायलट एवं को-पॉयलट विमानों में कार्यरत हैं। उनमें से ज्यादातर इस तकनीक से युक्त हवाई अड्डों पर विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग की ट्रेनिंग ले चुके हैं।
विज्ञापन
ऐसे काम करेगा आईएलएस
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) भूमि पर स्थापित इलेक्ट्रानिक प्लेट संपर्क प्रणाली होती है, जो विमान को उड़ान पट्टी पर पहुंचते हुए और लैंडिंग के समय सटीक मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है। इसमें रेडियो संकेतों के संयोजन एवं कई स्थानों पर उच्च-तीव्रता के प्रकाश किरणों का प्रयोग किया जाता है ताकि निम्न दृश्यता, खराब मौसम, हिमपात, उड़ान प्रतिबंधों आदि के रहते हुए भी विमान का सुरक्षित लैंडिंग कर सके।
इंटरनेशनल उड़ानों में लैंडिंग की सुविधा
आईएलएस के चालू हो जाने से दिल्ली व मुंबई की उड़ानों को जरूरत पड़ने पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर इंटरनेशनल उड़ानों की भी चंडीगढ़ में लैंडिंग कराई जा सकेगी।
एयरफोर्स के निकट जमीन हुई एक्वायर
इस संदर्भ में लैंड एक्वायर अधिकारी आईएएस अर्जुन शर्मा ने बताया कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के लिए प्रशासन ने एयरफोर्स स्टेशन के निकट ही .66 एकड़ जमीन एक्वायर कर ली है। जिस पर आईएलएस का काम तेजी से चल रहा है। अतिशीघ्र इसे पूरा कराए जाने पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन
कोहरे के शुरुआत होते ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों को संचालन प्रभावित हो जाता है। कभी-कभी तो कोहरा नहीं छटने ओर मौसम खराब होने से कई उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं। इसके अलावा कई विमानों के रूट को डायवर्ट भी करना पड़ता है। इसके चलते यात्रियों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। यात्रियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने कैट थ्री-बी तकनीक और रन-वे विजिबिलिटी रेंज (आरवीआर) के साथ ही आईएलएस लगवाने का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। प्रशासन जल्द से जल्द इस काम को पूरा करना चाहता है ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
विज्ञापन
ऐसे होगी विमानों की लैंडिंग
एयरपोर्ट पर अब 50 मीटर की विजिबिलिटी तक में उड़ानों का निर्बाध आवागमन हो सकेगा। हालांकि कैट थ्री बी के लिए तकनीकी तौर पर ट्रेंड पायलट ही 50 मीटर की विजिबिलिटी में लैंड व टेक ऑफ कर सकेंगे। जानकारों की मानें तो वर्तमान समय में जो भी पायलट एवं को-पॉयलट विमानों में कार्यरत हैं। उनमें से ज्यादातर इस तकनीक से युक्त हवाई अड्डों पर विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग की ट्रेनिंग ले चुके हैं।
विज्ञापन
ऐसे काम करेगा आईएलएस
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) भूमि पर स्थापित इलेक्ट्रानिक प्लेट संपर्क प्रणाली होती है, जो विमान को उड़ान पट्टी पर पहुंचते हुए और लैंडिंग के समय सटीक मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है। इसमें रेडियो संकेतों के संयोजन एवं कई स्थानों पर उच्च-तीव्रता के प्रकाश किरणों का प्रयोग किया जाता है ताकि निम्न दृश्यता, खराब मौसम, हिमपात, उड़ान प्रतिबंधों आदि के रहते हुए भी विमान का सुरक्षित लैंडिंग कर सके।
इंटरनेशनल उड़ानों में लैंडिंग की सुविधा
आईएलएस के चालू हो जाने से दिल्ली व मुंबई की उड़ानों को जरूरत पड़ने पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर इंटरनेशनल उड़ानों की भी चंडीगढ़ में लैंडिंग कराई जा सकेगी।
एयरफोर्स के निकट जमीन हुई एक्वायर
इस संदर्भ में लैंड एक्वायर अधिकारी आईएएस अर्जुन शर्मा ने बताया कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के लिए प्रशासन ने एयरफोर्स स्टेशन के निकट ही .66 एकड़ जमीन एक्वायर कर ली है। जिस पर आईएलएस का काम तेजी से चल रहा है। अतिशीघ्र इसे पूरा कराए जाने पर जोर दिया जा रहा है।