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Chandigarh News: दुष्कर्म के आरोपियों की मेडिकल जांच को लेकर नहीं हो रहा निर्देशों का पालन, रिपोर्ट तलब

Thu, 30 May 2024 09:47 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 30 May 2024 09:47 PM IST
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Instructions regarding medical examination of rape accused are not being followed, report summoned
-हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी को हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने का जारी किया आदेश
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-मनोविकार से ग्रस्त नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने पाई थी जांच में खामी

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामलों में आरोपी की मेडिकल जांच को लेकर सीआरपीसी की धारा 53 ए के प्रावधानों का पालन न होने पर चिंता जताते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस प्रावधान के तहत आरोपी का मेडिकल करवाना अनिवार्य है। हाईकोर्ट के समक्ष पलवल का एक मामला पहुंचा था जिसमें मनोरोग से ग्रस्त एक नाबालिग से दुष्कर्म हुआ था। इस मामले में पीड़िता के बीमार होने पर नवंबर 2023 को उसे अस्पताल ले जाने पर उसके चार माह की गर्भवती होने का पता चला था। पीड़िता से जब इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति के बारे में पूछा गया था तो उसने अपने चचेरे भाई का नाम लिया था। इसके बाद आरोपी ने गवाह के रूप में लड़की की योग्यता स्थापित करने के लिए उसका मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष की बौद्धिक विकलांगता 90 प्रतिशत तक है और इस तरह, उसके बयान पर उचित पुष्टि के बिना भरोसा नहीं किया जा सकता है। निचली अदालत ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया था जिसके चलते आरोपी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता गर्भवती थी, आरोपी का इस अपराध से रिश्ता पता लगाने के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग और भी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाती है। विकलांग व्यक्तियों के लिए सामाजिक सहायता प्रणाली की कमी को देखते हुए, उनसे जुड़े मुकदमों में अधिक सक्रिय और सहानुभूतिपूर्ण भूमिका अनिवार्य हो जाती है। सीआरपीसी के प्रावधान व हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डीएनए नमूने एकत्र करने में जांच एजेंसियों के उदासीन रवैये के कारण अभियुक्त अनुचित लाभ मिल जाता है। राम सिंह मामले में हाईकोर्ट ने धारा 53-ए सीआरपीसी के प्रावधानों को अनिवार्य प्रकृति का घोषित किया था और पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों को मानदारी से अनुपालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने के निर्देश जारी किए थे।


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निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार केवल आरोपी तक सीमित नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार केवल आरोपी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित और समाज के लिए भी है। इन दिनों सारा ध्यान आरोपी पर दिया जाता है जबकि पीड़ित और समाज के प्रति बहुत कम चिंता दिखाई जाती है। जांच अधिकारी का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त को एक चिकित्सक के सामने पेश करे और उसके रक्त के नमूने के संग्रह के लिए एक लिखित आवेदन प्रस्तुत करे और उस उद्देश्य के लिए आवश्यक बल का प्रयोग करे। यदि आरोपित अपना रक्त नमूना देने से इनकार करता है, तो जांच अधिकारी संबंधित इलाक़ा मजिस्ट्रेट से संपर्क करे और डीएनए विश्लेषण के लिए आरोपी का रक्त नमूना एकत्र करने के लिए उद्देश्य से अदालत से निवेदन करें।
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