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इनसाइड स्टोरी: आलाकमान पर दबाव डालने का सिद्धू का अंतिम पैंतरा, कैप्टन के इस्तीफे तक थी 'गुरु' की अहमियत
Wed, 29 Sep 2021 02:52 AM IST
निवेदिता वर्मा
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 29 Sep 2021 02:52 AM IST
सार
वैसे नवजोत सिद्धू की ताकत का पूरा इस्तेमाल करने में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सफल रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब में एक ही आदमी किनारे लगा सकता था और वह था नवजोत सिंह सिद्धू।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब में चल रही सियासी उठापटक के बीच आलाकमान पर दबाव डालने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का यह आखिरी पैंतरा है। पार्टी प्रधान पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू के पास दबाव बनाने का और कोई पैंतरा नहीं बचेगा। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक कैप्टन अमरिंदर सिंह को किनारे करने में सिद्धू का जितना उपयोग किया जा सकता था, वह हो चुका है।
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कैप्टन के हटने के तुरंत बाद ही आलाकमान ने सिद्धू की अनदेखी शुरू कर दी थी। शुरुआती दौर में सिद्धू को सिर माथे पर लेकर चल रहा कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अचानक ही सिद्धू से मुखर हो गया और चन्नी कैबिनेट में सिद्धू के फैसलों को दरकिनार कर दिया गया। आलाकमान का संदेश स्पष्ट है कि पंजाब में चन्नी की नुमाइंदगी में ही यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।
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दबाव की रणनीति काम नहीं आएगी। सिद्धू के तेवर केंद्रीय नेतृत्व को कैप्टन की मुखालफत तक तो अच्छे लगे लेकिन जब यही तेवर सिद्धू आलाकमान को दिखाने लगे तो उन्हें झटका दिया गया। सिद्धू की चढ़ीं हुईं त्योरियां आलाकमान को रास नहीं आई, क्योंकि ताजा-ताजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की आंखें दिखाने की आदत से कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का पीछा छूटा है।
आलाकमान नहीं चाहता कि पंजाब में कोई और कैप्टन अमरिंदर की तरह आंखें दिखाए। दरअसल, पंजाब में आलाकमान को हां में हां मिलाने वाला चेहरा चाहिए जो कि चन्नी के तौर पर मिल चुका है। नवजोत सिंह सिद्धू की ताकत का पूरा इस्तेमाल करने में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सफल रहा है।
सिर्फ एक ही आदमी कर सकता था कैप्टन को किनारे
कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब में एक ही आदमी किनारे लगा सकता था वह था नवजोत सिंह सिद्धू। इससे पहले आलाकमान ने सुनील जाखड़ को ताकत दी लेकिन जाखड़ भी कैप्टन के हाथों में खेलकर रह गए। प्रताप सिंह बाजवा को भी आलाकमान ने मौका दिया लेकिन उनका साथ कांग्रेस विधायकों ने नहीं दिया। कैप्टन को किनारे लगाने के बाद सिद्धू ने दिल्ली के चक्कर तो कई लगाए लेकिन उनकी पूरी तरह से नहीं चली।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के सीएम पद से इस्तीफे के बाद जब सीएम बनाने की बात चली तो सिद्धू के मन में भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा थी लेकिन कांग्रेस कल्चर में एकदम से मुख्यमंत्री पद पर काबिज होना आसान नहीं है। अधिकतर विधायक यहां जाखड़ के साथ खड़े नजर आए। मात्र 12 विधायक ही सिद्धू के साथ खड़े दिखे।
शहरी स्थानीय निकाय भी नहीं दिलवा सके सिद्धू
परगट सिंह को गृह विभाग नहीं दिया गया तो सिद्धू ने अपना पुराना महकमा परगट को दिलवाने की कोशिश की लेकिन कोशिश यहां भी नहीं सिरे चढ़ी। यह महकमा भी कैप्टन के करीबी ब्रह्म मोहिंद्रा के पास ही रहा। मालूम हो कि कैप्टन सरकार में सिद्धू शहरी स्थानीय निकाय मंत्री थे लेकिन बाद में अनबन के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया।