हरियाणा में बदल गई कांग्रेस की भाषा, विधानसभा चुनाव 2019 से पहले नए समीकरणों की सुगबुगाहट
लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में कांग्रेस की भाषा शैली बदल गई है और अब विधानसभा चुनाव से पहले नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट है। दरअसल, इनेलो के धुर विरोधी रहे हुड्डा और चौटाला एक दूसरे की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। सूबे की राजनीति में हर समय कांग्रेस की खिलाफत करने वाले ओम प्रकाश चौटाला ने जहां दीपेंद्र की हार पर खेद जताया है, वहीं उनकी बात पर दो कदम आगे बढ़ते हुए पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ओम प्रकाश चौटाला के बच्चों को अपने बच्चों जैसा बताया है।
हुड्डा ने यहां कहा है कि दोनों परिवारों में राजनीतिक मतभेद भले ही हों, लेकिन मनभेद नहीं है। मेरे बच्चे चौटाला साहब के बच्चों जैसे हैं और उनके बच्चे मेरे बच्चों जैसे हैं। हुड्डा ने यह बयान उस बयान के बाद दिया जब चंद रोज पहले ओम प्रकाश चौटाला ने रोहतक में बयान दिया कि दीपेंद्र अच्छा लड़का था, उसका हारना गलत हो गया। उसके बाद पूर्व सीएम हुड्डा का भी इस बावत बयान आ चुका है कि इनेलो का विघटन शोभा नहीं देता है। जो हुआ वह अच्छा नहीं हुआ।
हुड्डा ने हरियाणा में बातचीत के दौरान महागठबंधन की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सारी संभावनाएं होती हैं। विधानसभा चुनाव तक अभी बहुत समय बाकी पड़ा है। ऐसे में तेल देखो और तेल की धार देखो।
क्या है रणनीति
हरियाणा में पिछले कई दिनों से चौटाला परिवार और हुड्डा परिवार एक दूसरे की तारीफ करते नहीं थम रहा है। जबकि क्षेत्रीय दल होने के नाते इनेलो की यह विचारधारा है कि कांग्रेस का विरोध ही इनेलो का आधार है। ऐसे में कांग्रेसी परिवारों की तारीफ के पुल बांधने के पीछे की क्या रणनीति है। विधानसभा से पहले इसका भी खुलासा हो जाएगा।
संगठन की कमी को हार का कारण नहीं मानता
हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में संगठन की कमी को वे हार का कारण नहीं मानते हैं। हालांकि संगठन के न होने का थोड़ा बहुत असर अवश्य पड़ा है। उन्होंने भाजपा के पन्ना सम्मेलन को भी बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं बताया। साथ ही यह दावा किया कि विधानसभा तक अपना दम दिखा देंगे।
बादल परिवार से नजदीकी
इनेलो की बादल परिवार से नजदीकी का सवाल पूछने पर हुड्डा कहते हैं कि बादल परिवार से उनकी भी नजदीकी है, लेकिन अकाली दल पंजाब में भाजपा के साथ है, इस बात का जवाब किसी केपास नहीं है।
यूपी में गुल नहीं खिला सका गठबंधन
उत्तर प्रदेश में बुआ और बबुआ की भाजपा को हराने की कवायद सिरे नहीं चढ़ सकी। मायावती और अखिलेश का गठबंधन भी चुनाव पूरा होते ही अलग हो गया। ऐसे में हरियाणा में यदि महागठबंधन की बात चलती है तो किस आधार पर यह बातचीत आगे बढ़ेगी, यह देखना रोचक होगा, क्योंकि सभी दल इस समय एक दूसरे के धुर विरोधी हैं।