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Hindi News ›   Chandigarh ›   Industries will be able to run in NCR for eight hours a day and five days a week

एनसीआर में प्रदूषण की मार: दिन में आठ घंटे और सप्ताह में पांच दिन ही चला सकेंगे उद्योग, विरोध में राइस मिलर्स

Sun, 05 Dec 2021 01:50 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 05 Dec 2021 01:50 AM IST
सार

प्रदूषण रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने उद्योगों पर सख्ती की है। लेकिन मिलर्स का कहना है कि मिल को चलाना करीब 20 घंटे की प्रक्रिया, इससे चावल निर्यात प्रभावित होगा।

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Industries will be able to run in NCR for eight hours a day and five days a week
दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण - फोटो : ANI

विस्तार

बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर क्षेत्र में उद्योगों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसका राइस मिलर्स विरोध कर रहे हैं। नए निर्देशों के अनुसार, एनसीआर इलाके में पीएनजी वाले उद्योगों को छोड़कर शेष उद्योग (ऑपरेशन एंड प्रोसेस) एक दिन में 8 घंटे और सप्ताह में केवल पांच दिन सोमवार से शुक्रवार को ही चलाए जा सकेंगे। शनिवार और रविवार को उद्योग बंद रखने होंगे। राइस मिलर्स का तर्क है कि मिल चलाने की पूरी प्रक्रिया लंबी होती होती है। इसलिए यह संभव नहीं है। 

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आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनसीआर जिलों के सभी डीसी, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, बिजली, उद्योग, पीडब्ल्यूडी विभाग समेत 11 विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेज कर निर्देशों का पालन कराने को कहा है। पत्र मिलने के बाद हरियाणा के राइस मिलर्स ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
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हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं और इस क्षेत्र में करीब 400 राइस मिल हैं। इनमें लाखों टन धान पड़ा है, जिससे चावल तैयार किया जाना है।

मिल चलाने की प्रक्रिया 20 घंटे की
राइस मिलर्स विनोद गोयल का कहना है कि मिल में सबसे पहले धान को पानी में भिगोया जाता है। इसमें करीब दस घंटे लगते हैं। इसके बाद उस पर स्टीम देनी होती है और बाद में करीब 10 घंटे में ही इसे सुखाया जाता है। क्योंकि एक बार बायलर के गर्म होने के बाद उसे तुरंत बंद नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा किया गया तो चावल खराब होने की आशंका अधिक रहेगी, दूसरा इसमें लागत अधिक लगेगी।   

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टूटेंगे विदेशी करार, चावल डिलीवरी में भी परेशानी
नए फैसले से राइस मिलर के सामने समय पर चावल की डिलीवरी देना चुनौती बन गया है। विदेशों में चावल एक्सपोर्ट करने वालों के करार टूटने की आशंका बढ़ने लगी है। क्योंकि उन्होंने अपने मिल की क्षमता के अनुसार ऑर्डर ले रखे हैं। इसी प्रकार, जो मिल सीएमआर (कस्टम राइस मिलिंग) काम करते हैं, उनको सरकार को दिसंबर माह के अंतिम तक 25 प्रतिशत चावल वापस देना है। जो ऐसा नहीं कर पाएगा उस मिल को ब्लैक लिस्टेड करने का प्रावधान है। रोजाना 8 घंटे के हिसाब से मिल चलाने पर चावल डिलीवरी देना संभव नहीं है।

यह फैसला लेने से पहले किसी तकनीकी सलाहकार की मदद लेनी चाहिए थी, क्योंकि वास्तविक तौर पर यह संभव नहीं है। मिल को चालू करना और बंद करना एक पूरी प्रक्रिया है, इसमें 8 नहीं 20 घंटे लगते हैं। इसको लेकर मिलर्स में जबरदस्त रोष है। इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और नए सिरे से गाइडलाइन जारी की जाएं। - विजय सेतिया, पूर्व अध्यक्ष, आल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन।

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