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रेलवे कर्मचारियों को कैट ने दिया बड़ा झटका, याचिका खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Mar 2016 09:13 AM IST
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सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ब्यूरो
- फोटो : फाइल फोटो
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भारतीय रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (रेल कोच कपूरथला) के ग्रुप सी कर्मियों की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में दायर प्रमोशन अपील को खारिज कर दिया गया है। याचिका में रेलवे कर्मियों ने ग्रुप बी (गजटेड अफसर) में प्रमोट करने की अपील की थी। ट्रिब्यूनल ने आदेश में कहा है कि रेलवे के ग्रुप सी कर्मियों की यह मांग कानूनी तौर पर सही नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।
बता दें कि देशभर की ट्रिब्यूनल में इस संबंध में रेलवे कर्मियों की ओर से याचिका दायर की हुई है। उन पर कई जगह याचिका पर सुनवाई चल रही है। ट्रिब्यूनल ने इस आदेश को देशभर की बैंच में चल रहे केस के लिए जारी करने को कहा है। रेलवे के ग्रुप सी के टेक्निकल कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) के तहत उनका ग्रेड पे 1 जनवरी 2006 से 4200 से 4600 रुपये है। लिहाजा वह प्रमोट होकर ग्रुप बी में गजटेड अफसर बनने के हकदार हैं।
रेलवे बोर्ड की ओर से ट्रिब्यूनल में दी गई दलील में कहा गया था कि ‘रूल ऑफ बिजनेस’ के तहत डीओपीटी का वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन) उन पर लागू नहीं होता। रेलवे का बजट भी अलग से बनता है। अगर कर्मचारियों की इस मांग को माना जाए तो सभी कर्मचारी मैनेजर पोस्ट पर काबिज हो जाएंगे और रेलवे को इन्हें स्टेनोग्राफर आदि पोस्ट देनी होंगी। इससे रेलवे पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ेगा।
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इसके साथ ही ग्रुप सी के कर्मियों के मैनेजर बनने पर इन्हें डीए और अन्य भत्ते भी इस ग्रेड के मुताबिक देने होंगे। अगर इन कर्मचारियों को यह ग्रेड दे दिया जाता है तो देशभर में करीब दो लाख से अधिक कर्मचारी इसके ग्रेड के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। रेलवे की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि पहले वेतन आयोग से लेकर छठवें वेतन आयोग तक यह सभी कर्मचारी ग्रुप सी ग्रेड में रहे हैं।
इससे पहले भी इसी एसोसिएशन ने प्रिंसिपल बैंच दिल्ली में याचिका दायर की थी। दिल्ली बैंच ने रेलवे बोर्ड को इन कर्मचारियों की मांग पर विचार करने को कहा था। रेलवे ने विचार के बाद इनकी मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे के आदेश को सही मानते हुए रेलवे कर्मचारियों की मांग को खारिज कर दिया था।
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बता दें कि देशभर की ट्रिब्यूनल में इस संबंध में रेलवे कर्मियों की ओर से याचिका दायर की हुई है। उन पर कई जगह याचिका पर सुनवाई चल रही है। ट्रिब्यूनल ने इस आदेश को देशभर की बैंच में चल रहे केस के लिए जारी करने को कहा है। रेलवे के ग्रुप सी के टेक्निकल कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) के तहत उनका ग्रेड पे 1 जनवरी 2006 से 4200 से 4600 रुपये है। लिहाजा वह प्रमोट होकर ग्रुप बी में गजटेड अफसर बनने के हकदार हैं।
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रेलवे बोर्ड की ओर से ट्रिब्यूनल में दी गई दलील में कहा गया था कि ‘रूल ऑफ बिजनेस’ के तहत डीओपीटी का वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन) उन पर लागू नहीं होता। रेलवे का बजट भी अलग से बनता है। अगर कर्मचारियों की इस मांग को माना जाए तो सभी कर्मचारी मैनेजर पोस्ट पर काबिज हो जाएंगे और रेलवे को इन्हें स्टेनोग्राफर आदि पोस्ट देनी होंगी। इससे रेलवे पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ेगा।
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इसके साथ ही ग्रुप सी के कर्मियों के मैनेजर बनने पर इन्हें डीए और अन्य भत्ते भी इस ग्रेड के मुताबिक देने होंगे। अगर इन कर्मचारियों को यह ग्रेड दे दिया जाता है तो देशभर में करीब दो लाख से अधिक कर्मचारी इसके ग्रेड के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। रेलवे की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि पहले वेतन आयोग से लेकर छठवें वेतन आयोग तक यह सभी कर्मचारी ग्रुप सी ग्रेड में रहे हैं।
इससे पहले भी इसी एसोसिएशन ने प्रिंसिपल बैंच दिल्ली में याचिका दायर की थी। दिल्ली बैंच ने रेलवे बोर्ड को इन कर्मचारियों की मांग पर विचार करने को कहा था। रेलवे ने विचार के बाद इनकी मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे के आदेश को सही मानते हुए रेलवे कर्मचारियों की मांग को खारिज कर दिया था।