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स्वतंत्रता दिवस: आजादी के 75 साल, खिलाड़ियों ने छू लिया आसमान

Sun, 15 Aug 2021 11:56 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 15 Aug 2021 11:56 AM IST
सार

आजादी के 75 सालों में देश ने खेलों में काफी उतार-चढ़ाव देखे। सभी परिस्थितियों का सामना हमारे खिलाड़ियों ने किया। इन सबके बावजदू देश-दुनिया में अपना दमखम दिखा रहे हैं।   

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Indian players made progress in sports in 75 years of independence
काश्वी गौतम, महिला क्रिकेटर। - फोटो : फाइल

विस्तार

आजादी के 75 वर्षों में खेलों में हमने काफी प्रगति की है। खिलाड़ियों ने आसमां छू लिया है। कुछ खेलों में अभी शिखर छूना बाकी है। बड़ी बात यह है कि खेलों के प्रति लोगों की सोच में अंतर आया है और वे लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। इन वर्षों में खेलों में कई उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं। सभी परिस्थितियों का सामना करते हुए खिलाड़ियों ने विदेशी मैदानों पर भी झंडे गाड़े हैं।     

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हॉकी में आया बड़ा बदलाव... अब एस्ट्रोटर्फ पर खेली जाती है
आजादी के 75 वर्षों में भारतीय खेलों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। खेलों की तकनीक, नियम, संघीय ढांचा में भी काफी बदलाव देखने को मिला है। इस बदलाव को अब भारतीय खिलाड़ियों ने भी अपना लिया है। पहले हॉकी मैदान पर खेली जाती थी, अब एस्ट्रोटर्फ पर खेली जा रही है। ऐसे में भारतीय खेलों का स्तर भी ऊपर उठा है। ओलंपिक के साथ एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप में भारत के खिलाड़ी विदेशी खिलाड़ियों को हारने का जज्बा लेकर मैदान पर उतरते हैं और उन्हें हराते हैं। गुरचरण सिंह,तैराकी के वरिष्ठ कोच
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गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ रहे हैं खिलाड़ी
आजादी के बाद से अब तक भारत को खेलों में जिस स्तर पर पहुंचना चाहिए था, अभी तक वहां पहुंचना बाकी है लेकिन खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है। संपूर्ण शिखर तक पहुंचने के लिए भारत के खिलाड़ी लगातार मेहनत कर रहे हैं। ओलंपिक में भारतीय पुरुष और महिला खिलाड़ियों ने लगातार मेहनत कर बेहतर प्रदर्शन किया। लड़कों की टीम ने पदक जीत लिया लेकिन लड़कियों की टीम पदक से एक कदम चूक गई। इसी चूक से खिलाड़ी सीखकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। - नरेंद्र सिंह सोढ़ी, पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कोच
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खिलाड़ियों में बड़ी प्रतियोगिता में पदक बटोरने की लालसा जगी
आजादी के बाद भारत में कुछ खेलों को ही खेला जाता था लेकिन धीरे-धीरे कई नए खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने हिस्सा लेना शुरू किया। देश और विदेश में भारत के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल जीतना शुरू कर चुके हैं। खिलाड़ियों में बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीतने की लालसा पैदा हुई है। देशवासी भी उन्हें देख काफी गदगद हैं। लोगों में खेलों के प्रति जोश आना जरूरी है जो अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। खिलाड़ियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। - छवि, अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी खिलाड़ी


खेलों को लेकर अभिभावकों की सोच में आया बदलाव
खेलों को लेकर देश के अभिभावकों की सोच में काफी बदलाव आया है। पहले खेलों में पुरुष ही अपनी पहचान बनाते थे। महिलाओं को केवल घर की देखरेख और बच्चों की देखभाल करने वाला ही समझा जाता था लेकिन धीरे-धीरे विचारधारा में बदलाव आया है और भारत में महिलाओं ने खेलों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। आज के समय में भारत में ऐसा कोई ही खेल बचा होगा, जिसमें महिलाओं ने हिस्सा न लिया हो। महिलाएं अब बढ़-चढ़ कर पुरुष खिलाड़ियों की तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल बटोर रही हैं।  - काश्वी गौतम, महिला क्रिकेटर

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