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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान व उनकी ओलंपियन पत्नी बनीं एसपी, मोहाली के बेटे-बहू दोनों
Mon, 29 Jun 2020 01:32 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, मोहाली
अमर उजाला, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 29 Jun 2020 01:32 PM IST
सार
- 2012 बैच के पीपीएस डीएसपी गुरजोत सिंह कलेर भी एसपी पदोन्नत
- आईपीएस बनना था सपना, शौक ने अवनीत को पहुंआया ओलंपिक तक
- छठी में साइकिल पर छह किमी दूर जाकर हॉकी खेलते थे राजपाल सिंह
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राजपाल सिंह, अवनीत कौर
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
कोरोना के बीच वीआईपी सिटी के लिए एक अच्छी खबर आई है। मोहाली के बेटे-बहू को पंजाब सरकार ने प्रमोशन देते हुए डीएसपी से एसपी बना दिया है। दोनों पति-पत्नी भारतीय खेल जगत की शान हैं। इसके साथ ही मोहाली के ही 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी को भी प्रमोशन देकर एसपी बनाया गया है।
जानकारी के अनुसार, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान व अर्जुन अवार्डी राजपाल सिंह को पंजाब सरकार ने एसपी पदोन्नत किया है। उनकी पत्नी व ओलंपियन शूटर अवनीत कौर को भी पदोन्नति देकर एसपी बनाया गया है। वहीं, इसके अलावा 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी गुरजोत सिंह कलेर को एसपी पदोन्नत किया गया है।
राजपाल सिंह अभी मोहाली में ही डीएसपी टेक्निकल सपोर्ट एंड फारेंसिक हैं जबकि उनकी पत्नी ओलंपियन शूटर अवनीत कौर अभी शूटिंग कर रही हैं। डीएसपी इंटेलिजेंस के तौर पर मोहाली में ही अपनी सेवाएं दे रहे गुरजोत सिंह कलेर 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं। साहित्य में उनकी रुचि है। सामाजिक मुद्दों से लेकर किसानों आत्महत्या को अपनी किताबों, गीतों व कविताओं के जरिए उठाते रहे हैं।
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हाल ही में उन्होंने लंदन में साम्राज्यवाद के प्रतीकों को हटाने की मांग उठाई थी। कोरोना को लेकर भी उन्होंने अपने गीत के जरिए इस जंग में शामिल योद्धाओं की हौसलाअफजाई की थी।
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जानकारी के अनुसार, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान व अर्जुन अवार्डी राजपाल सिंह को पंजाब सरकार ने एसपी पदोन्नत किया है। उनकी पत्नी व ओलंपियन शूटर अवनीत कौर को भी पदोन्नति देकर एसपी बनाया गया है। वहीं, इसके अलावा 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी गुरजोत सिंह कलेर को एसपी पदोन्नत किया गया है।
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राजपाल सिंह अभी मोहाली में ही डीएसपी टेक्निकल सपोर्ट एंड फारेंसिक हैं जबकि उनकी पत्नी ओलंपियन शूटर अवनीत कौर अभी शूटिंग कर रही हैं। डीएसपी इंटेलिजेंस के तौर पर मोहाली में ही अपनी सेवाएं दे रहे गुरजोत सिंह कलेर 2012 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं। साहित्य में उनकी रुचि है। सामाजिक मुद्दों से लेकर किसानों आत्महत्या को अपनी किताबों, गीतों व कविताओं के जरिए उठाते रहे हैं।
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हाल ही में उन्होंने लंदन में साम्राज्यवाद के प्रतीकों को हटाने की मांग उठाई थी। कोरोना को लेकर भी उन्होंने अपने गीत के जरिए इस जंग में शामिल योद्धाओं की हौसलाअफजाई की थी।
आईपीएस बनना चाहती थी अवनीत, शौकिया शूटिंग ने ओलंपिक में पहुंचाया
इंडियन शूटिंग स्टार अवनीत कौर सिद्धू का सपना था कि वह आईएएस या आईपीएस बनकर देश की सेवा करें। अपने इस टारगेट के लिए उन्होंने 12वीं क्लास तक सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया और स्पोर्ट्स से दूर रहीं। इसके बाद शौकिया शूटिंग शुरू की तो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। इसके बाद पंजाब सरकार ने उन्हें डीएसपी बनाया और अब उन्हें पदोन्नत कर एसपी बना दिया है। अवनीत अभी भी अपनी प्रैक्टिस में व्यस्त हैं।
2000 में पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने अपने गांव बादल में शूटिंग को प्रमोट करने के लिए दशमेश गर्ल्स कॉलेज में शूटिंग रेंज शुरू की थी। गन चलाने के शौक को पूरा करने के लिए अवनीत ने शूटिंग शुरू की। इसके कुछ महीनों बाद ही अच्छे रिजल्ट आने शुरू हुए। 2002 में पिता ने जर्मन मेड एयर राइफल गिफ्ट की थी। 6 महीने की प्रेक्टिस के बाद कॉलेज की तरफ से चंडीगढ़ में नॉर्थ जोन इंडिया शूटिंग चैंपियनशिप में टीम मेडल जीता।
अवनीत 2005 में एमए अंग्रेजी पंजाब यूनिवर्सिटी रिजनल कैंपस से पासआउट है। 2008 में उन्हें बीजिंग ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इसी साल उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया और उन्हें एयर इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया। 2011 में पंजाब पुलिस में डीएसपी का पद ज्वाइन किया। अवनीत अभी भी गांव बादल की शूटिंग रेंज में प्रेक्टिस करती हैं। 2013 में अवनीत कौर को महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के लिए 2008 बीजिंग ओलंपिक में भाग लिया।
2000 में पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने अपने गांव बादल में शूटिंग को प्रमोट करने के लिए दशमेश गर्ल्स कॉलेज में शूटिंग रेंज शुरू की थी। गन चलाने के शौक को पूरा करने के लिए अवनीत ने शूटिंग शुरू की। इसके कुछ महीनों बाद ही अच्छे रिजल्ट आने शुरू हुए। 2002 में पिता ने जर्मन मेड एयर राइफल गिफ्ट की थी। 6 महीने की प्रेक्टिस के बाद कॉलेज की तरफ से चंडीगढ़ में नॉर्थ जोन इंडिया शूटिंग चैंपियनशिप में टीम मेडल जीता।
अवनीत 2005 में एमए अंग्रेजी पंजाब यूनिवर्सिटी रिजनल कैंपस से पासआउट है। 2008 में उन्हें बीजिंग ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इसी साल उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया और उन्हें एयर इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया। 2011 में पंजाब पुलिस में डीएसपी का पद ज्वाइन किया। अवनीत अभी भी गांव बादल की शूटिंग रेंज में प्रेक्टिस करती हैं। 2013 में अवनीत कौर को महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के लिए 2008 बीजिंग ओलंपिक में भाग लिया।
6 किलोमीटर दूरी साइकिल पर जाकर हॉकी खेलते थे राजपाल
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान राजपाल सिंह मोहाली के सेक्टर-69 में परिवार के साथ रहते हैं। वह पंजाब पुलिस में सेवा दे रहे हैं। रविवार को पंजाब सरकार ने उनके प्रमोशन के आदेश जारी किए। उन्होंने 2005 से 2011 तक भारतीय हॉकी टीम के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले। पूर्व कप्तान संदीप सिंह की जगह 2009 से 2011 तक भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे। उन्होंने चंडीगढ़ में स्कूलिंग के दौरान ही 6वीं क्लास से हॉकी शुरू की। घर से 6 किलोमीटर दूर हॉकी ग्राउंड में साइकिल से रोजाना प्रैक्टिस करने जाते थे।
चंडीगढ़ पुलिस से सब-इंस्पेक्टर रिटायर्ड पिता हरपाल सिंह हॉकी लवर हैं। उन्होंने बड़े भाई गुरप्रीत सिंह को देखकर ही हॉकी खेलना शुरू किया। राजपाल बताते हैं कि बड़े भाई ने उन्हें हॉकी के लिए काफी मोटिवेट किया और कोच भी मुझे बड़े भाई की तरह खेलने के लिए बोलते थे। शुरुआती दौर में बड़े भाई रोल मॉडल थे लेकिन हॉकी खिलाड़ी बलजीत सिंह ढिल्लों से काफी कुछ सीखने को मिला। राजपाल सिंह 2002 में इंडियन ऑयल में ए-ग्रेड अफसर के तौर पर शामिल हुए। 2011 में उन्होंने पंजाब पुलिस में बतौर डीएसपी ज्वाइन किया। 2011 में ही केंद्र सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया।
राजपाल सिंह ने जूनियर से सीनियर हॉकी टीम में एंट्री की थी। वह 6 महीने भारतीय जूनियर हॉकी टीम में रहे। 2001 में चंडीगढ़ की तरफ से चेन्नई में जूनियर नेशनल में गोल्ड हासिल किया। इसके बाद मलयेशिया यूथ एशिया कप में गोल्ड और 9 गोल के साथ प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने। 2001 जूनियर वर्ल्ड कप में गोल्ड हासिल किया। 2004 में पहली बार राजपाल की भारत कैंप में सिलेक्शन हुई। 2007 चेन्नई एशिया कप में गोल्ड हासिल किया, 2010 मलयेशिया सुल्तान अजलन शाह हॉकी कप में गोल्ड, 2007-2009 चैंपियंस ट्राफी में ब्रांज और 2010 एशियन गेम्स में ब्रांज जीता। 2010 दिल्ली कॉम्नवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल व चाइना एशियन गेम्स में ब्रांज जीता।
कॉम्नवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया मैच उनका यादगार मैच रहा, क्योंकि इससे पहले 1982 में पाकिस्तान ने भारत को 7-4 से हराया था। इसके बाद 2010 में दिल्ली नेशनल स्टेडियम में भारत ने पाकिस्तान को सेम स्कोर पर हराकर जीत हासिल की थी। राजपाल सिंह ने चंडीगढ़ सेक्टर-35 में श्री गुरु गोबिंद सिंह स्कूल में 6वीं क्लास से हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। दो साल तक सेक्टर-41 के शिवालिक पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के साथ हॉकी में फारवर्ड की भूमिका में स्कूल की तरफ से डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और स्कूल नेशनल में भाग लिया। 2000-01 चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की और चंडीगढ़ में इंटर-कॉलेज चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
चंडीगढ़ पुलिस से सब-इंस्पेक्टर रिटायर्ड पिता हरपाल सिंह हॉकी लवर हैं। उन्होंने बड़े भाई गुरप्रीत सिंह को देखकर ही हॉकी खेलना शुरू किया। राजपाल बताते हैं कि बड़े भाई ने उन्हें हॉकी के लिए काफी मोटिवेट किया और कोच भी मुझे बड़े भाई की तरह खेलने के लिए बोलते थे। शुरुआती दौर में बड़े भाई रोल मॉडल थे लेकिन हॉकी खिलाड़ी बलजीत सिंह ढिल्लों से काफी कुछ सीखने को मिला। राजपाल सिंह 2002 में इंडियन ऑयल में ए-ग्रेड अफसर के तौर पर शामिल हुए। 2011 में उन्होंने पंजाब पुलिस में बतौर डीएसपी ज्वाइन किया। 2011 में ही केंद्र सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया।
राजपाल सिंह ने जूनियर से सीनियर हॉकी टीम में एंट्री की थी। वह 6 महीने भारतीय जूनियर हॉकी टीम में रहे। 2001 में चंडीगढ़ की तरफ से चेन्नई में जूनियर नेशनल में गोल्ड हासिल किया। इसके बाद मलयेशिया यूथ एशिया कप में गोल्ड और 9 गोल के साथ प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने। 2001 जूनियर वर्ल्ड कप में गोल्ड हासिल किया। 2004 में पहली बार राजपाल की भारत कैंप में सिलेक्शन हुई। 2007 चेन्नई एशिया कप में गोल्ड हासिल किया, 2010 मलयेशिया सुल्तान अजलन शाह हॉकी कप में गोल्ड, 2007-2009 चैंपियंस ट्राफी में ब्रांज और 2010 एशियन गेम्स में ब्रांज जीता। 2010 दिल्ली कॉम्नवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल व चाइना एशियन गेम्स में ब्रांज जीता।
कॉम्नवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया मैच उनका यादगार मैच रहा, क्योंकि इससे पहले 1982 में पाकिस्तान ने भारत को 7-4 से हराया था। इसके बाद 2010 में दिल्ली नेशनल स्टेडियम में भारत ने पाकिस्तान को सेम स्कोर पर हराकर जीत हासिल की थी। राजपाल सिंह ने चंडीगढ़ सेक्टर-35 में श्री गुरु गोबिंद सिंह स्कूल में 6वीं क्लास से हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। दो साल तक सेक्टर-41 के शिवालिक पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के साथ हॉकी में फारवर्ड की भूमिका में स्कूल की तरफ से डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और स्कूल नेशनल में भाग लिया। 2000-01 चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की और चंडीगढ़ में इंटर-कॉलेज चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।