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सरहद की सुरक्षा ही नहीं सेना करती है ऐसा भी काम, ‘बेरुखी’ से लड़ना सिखाएगी सेना

Thu, 18 May 2017 09:22 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 18 May 2017 09:22 AM IST
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 Indian army stand with special disabled children
chandimandir - फोटो : अमर उजाला
दुश्मन से देश की सरहदों को महफूज रखने वाली सेना अपने एक और सामाजिक दायित्व को भी बखूबी निभा रही है। ये दायित्व है समाज के उन विशेष बच्चों के प्रति जो स्पेशल केयर के अभाव में न केवल दुत्कार दिए जाते हैं, बल्कि हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं।
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सेना इन बच्चों को अब सामाजिक मोर्चे पर लड़ना सिखाएगी, ताकि समाज में इन बच्चों की अब अनदेखी न हो सके। इसके लिए वेस्टर्न कमांड के अधीनस्थ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और जम्मू कश्मीर में आठ आशा स्कूल सेंटर भी चल रहे हैं। इनमें चंडीमंदिर, अमृतसर, जालंधर, पठानकोट, जम्मू, अंबाला कैंट, फिरोजपुर व एक अन्य शामिल है।
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तीन सौ बच्चाें को ट्रेंड कर रही वेस्टर्न कमांड
इसका संचालन सेना के आला अफसरों की पत्नियों का संगठन ‘आर्मी वाइफ्स वेलफेयर एसोसिएशन’ की ओर से किया जा रहा है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत सेना इन आठों केंद्रों में करीबन तीन सौ से अधिक विशेषज्ञ बच्चों को ट्रेंड कर रही है। इनमें 80 फीसदी बच्चे तो सेना जवानों व अफसरों के दाखिल किए जाते हैं और बीस फीसदी सिविलयन लिए जाते हैं। विशेष बच्चों को यहां 18 साल की उम्र तक रखा जाता है और इस दौरान उसे विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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विशेषज्ञ निखारेंगे विशेष बच्चों की स्किल्स
विशेषज्ञ व प्रिंसिपल ममता रानी ने बताया कि इन बच्चों को एक खास मिशन के तहत इस कदर ट्रेंड किया जा रहा है ताकि ये बच्चे समाज में नार्मल बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। उन्होंने बताया कि इसके लिए कई तरह के चरण निर्धारित किए गए हैं, जिसके तहत प्री-प्राइमरी सेक्शन से लेकर विभिन्न स्किल्स में बच्चों को ट्रेंड किया जाएगा।

स्पेशल बच्चों के लिए सेना की एक नई पहल

 Indian army stand with special disabled children
चंडीमंदिर वेस्टर्न कमांड
नार्मल व्यवहार के लिए थैरेपी की मदद भी
वेस्टर्न कमांड के एक आला अफसर ने बताया कि इन केंद्रों में इन विशेष बच्चों को डेली लिविंग एक्टिविटी, उनकी विजुअल स्कैनिंग, अकादमी और रीडिंग क्षमता पर विशेष फोकस रहेगा। धीरे-धीरे उन्हे कंप्यूटर एजुकेशन की ओर भी ले जाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इन बच्चों को ऑक्यूपेशनल थैरेपी, स्पिच थैरेपी, हाइड्रो थैरेपी, पेट थैरेपी, प्ले स्टेशन इत्यादि के जरिए भी नार्मल व्यवहार में लाने का प्रयास किया जाएगा। इसी थैरेपी का हिस्सा हार्स राइडिंग रहेगी।

दसवीं कक्षा भी करवाएगी सेना
सैन्य अफसर ने बताया कि संबंधित बच्चों को नार्मल व्यवहार में लाने केसाथ-साथ इन बच्चों को नेशनल ओपन बोर्ड के माध्यम से तीन कक्षाओं 5वीं, 8वीं व 10वीं की परीक्षाएं भी दिलवाई जाएंगी। इसके सिलेबस  होम साइंस, ड्राइंग, कंप्यूटर, हिंदी, अंग्रेजी व गणित व प्रैक्टिकल विषय शामिल है। इस दौरान इन बच्चों का मूल्यांकन कर पहले ये देखा जाएगा कि कौन बच्चा किस कक्षा की परीक्षा के लायक है।
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