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खुलासाः रिटायर्ड कर्नल बोले- पंजाब में देशभर से तीन गुना ज्यादा ड्रग्स इस्तेमाल होती है
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:45 AM IST
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पंजाब में पूरे देशभर से तीन से चार गुना अधिक ड्रग्स का इस्तेमाल हो रहा है। यह खुलासा सेना से रिटायर्ड कर्नल राजिंदर सिंह ने किया। उनका कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान से पंजाब के बार्डर एरिया के जरिए देशभर में ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। पहले यहां से जो ड्रग्स आती थी वह दिल्ली, मुंबई समेत देश के अन्य बड़े शहरों में सप्लाई होती थी लेकिन अब इसका इस्तेमाल पंजाब में काफी बहुत बढ़ गया है। नशे की जद में सबसे अधिक 18 से 27 साल के युवाओं के अलावा डॉक्टर, फार्मासिस्ट, पुलिसकर्मी, सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान तक हैं।
सेना में मनोचिकित्सा में बतौर वरिष्ठ सलाहकार सेवाएं दे चुके और 62 साल से मनोचिकित्सक रोगियों का इलाज कर रहे 85 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल राजिंदर सिंह ने ‘इंटरनेशनल डे अगेंस्ट ड्रग्स’ के मौके पर यह बातें सेक्टर-10 में पत्रकारों से वार्ता में साझा कीं। उन्होंने बताया कि पंजाब में ड्रग्स का सबसे अहम कारण यहां शराब का बढ़ता प्रचलन है। युवा नशे की शुरुआत शराब और धूम्रपान से ही करते हैं। इसके बाद वह ड्रग्स की लत में फंस जाते हैं। राजिंदर वर्तमान में पत्नी के साथ मिलकर दो एनजीओ को सेवाएं दे रहे हैं।
यह संस्थाएं लोगों को नशा छुड़ाने में मदद करती हैं। राजिंदर सिंह अब तक हजारों ऐसे युवाओं का इलाज कर चुके हैं, जो नशे के आदि थे। उनका मानना है कि पंजाब में कोई भी पारिवारिक या अन्य तरह का कार्यक्रम हों, उनमें शराब के खुले प्रचलन के कारण नशाखोरी बढ़ रही है। रिटा. कर्नल ने माना कि नशे की लत अब सेना व अन्य पैरामिलिट्री के अलावा पुलिस जवानों को भी गिरफ्त में ले चुकी है। उनके पास दर्जनों ऐसे केस आते हैं। हालांकि सेना व पैरामिलिट्री के जवानों में शराब के अत्यधिक सेवन के मामले होते हैं।
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पंजाब में हावी हो रहा नारकोटिक्स आतंकवाद
राजिंदर सिंह का कहना है कि इस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा अफीम का अवैध कारोबार पंजाब में हो रहा है। इसकी यहां खपत भी बहुत ज्यादा है। वर्ल्ड की 85 फीसदी अफीम अफगानिस्तान में पैदा होती है। इसके बाद यह भारत में पंजाब बार्डर के जरिए लाई जाती है और फिर यहां से देशभर में सप्लाई होती है। उनका मानना है कि अगर हम कहें कि, पंजाब में नारकोटिक्स आतंकवाद का दौर चल रहा है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
शिक्षा, स्पोर्ट्स और परिवार का वातावरण खत्म कर सकता है नशाखोरी
रिटायर कर्नल राजिंदर का कहना है कि लगातार बढ़ती नशाखोरी को समाप्त करना है तो शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। साथ ही परिवार का माहौल अच्छा हो तो कोई भी नशे की का आदि नहीं बनता। खासकर युवा वर्ग इसकी गिरफ्त में जल्दी आता है इसलिए लोगों को अपने बच्चों को इससे दूर रखने के लिए उन्हें शिक्षा और स्पोर्ट्स में रुचि पैदा करवानी चाहिए ताकि वह इससे दूर रह सकें।
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सेना में मनोचिकित्सा में बतौर वरिष्ठ सलाहकार सेवाएं दे चुके और 62 साल से मनोचिकित्सक रोगियों का इलाज कर रहे 85 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल राजिंदर सिंह ने ‘इंटरनेशनल डे अगेंस्ट ड्रग्स’ के मौके पर यह बातें सेक्टर-10 में पत्रकारों से वार्ता में साझा कीं। उन्होंने बताया कि पंजाब में ड्रग्स का सबसे अहम कारण यहां शराब का बढ़ता प्रचलन है। युवा नशे की शुरुआत शराब और धूम्रपान से ही करते हैं। इसके बाद वह ड्रग्स की लत में फंस जाते हैं। राजिंदर वर्तमान में पत्नी के साथ मिलकर दो एनजीओ को सेवाएं दे रहे हैं।
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यह संस्थाएं लोगों को नशा छुड़ाने में मदद करती हैं। राजिंदर सिंह अब तक हजारों ऐसे युवाओं का इलाज कर चुके हैं, जो नशे के आदि थे। उनका मानना है कि पंजाब में कोई भी पारिवारिक या अन्य तरह का कार्यक्रम हों, उनमें शराब के खुले प्रचलन के कारण नशाखोरी बढ़ रही है। रिटा. कर्नल ने माना कि नशे की लत अब सेना व अन्य पैरामिलिट्री के अलावा पुलिस जवानों को भी गिरफ्त में ले चुकी है। उनके पास दर्जनों ऐसे केस आते हैं। हालांकि सेना व पैरामिलिट्री के जवानों में शराब के अत्यधिक सेवन के मामले होते हैं।
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पंजाब में हावी हो रहा नारकोटिक्स आतंकवाद
राजिंदर सिंह का कहना है कि इस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा अफीम का अवैध कारोबार पंजाब में हो रहा है। इसकी यहां खपत भी बहुत ज्यादा है। वर्ल्ड की 85 फीसदी अफीम अफगानिस्तान में पैदा होती है। इसके बाद यह भारत में पंजाब बार्डर के जरिए लाई जाती है और फिर यहां से देशभर में सप्लाई होती है। उनका मानना है कि अगर हम कहें कि, पंजाब में नारकोटिक्स आतंकवाद का दौर चल रहा है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
शिक्षा, स्पोर्ट्स और परिवार का वातावरण खत्म कर सकता है नशाखोरी
रिटायर कर्नल राजिंदर का कहना है कि लगातार बढ़ती नशाखोरी को समाप्त करना है तो शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। साथ ही परिवार का माहौल अच्छा हो तो कोई भी नशे की का आदि नहीं बनता। खासकर युवा वर्ग इसकी गिरफ्त में जल्दी आता है इसलिए लोगों को अपने बच्चों को इससे दूर रखने के लिए उन्हें शिक्षा और स्पोर्ट्स में रुचि पैदा करवानी चाहिए ताकि वह इससे दूर रह सकें।