करतारपुर कॉरिडोरः भारत ने पाकिस्तान को भेजा समझौते का मसौदा, फीस की शर्त हटाने को कहा
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करतारपुर कॉरिडोर के संबंध में भारत सरकार ने समझौते का एक मसौदा पाकिस्तान सरकार को भेजा है। करतारपुर कॉरिडोर के संचालन को लेकर भेजे गए इस समझौते में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले यात्रियों से 20 अमरीकी डॉलर यानि 1400 रुपये प्रति यात्री फीस की शर्त को रद्द करने का उल्लेख किया है।
साथ ही करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते पाकिस्तान जाने वाले यात्रियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक प्रोटोकाल अधिकारी को साथ जाने के भारतीय प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने का अनुरोध किया है। भारत ने इस मसौदे में गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के नजदीक एक भारतीय काउंसिलर स्थापित करने की मांग भी की है। इस मसौदे में दोनों देशों के बीच हुई तीन बैठकों में बनी सहमति के मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।
याद रहे कि भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच अटारी सड़क सीमा पर स्थित बीएसएफ मुख्यालय में हुई तीसरी बैठक में भारत सरकार ने पाकिस्तान के सामने इन तीनों मुद्दों को रखा था। बैठक की अगुवाई कर रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल ने भारत द्वारा उठाए गए इन तीनों मुद्दों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था।
एक महीना बीत जाने के बावजूद इन मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चौथी बैठक का आयोजन नहीं हो सका है। करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में 47 दिन का समय ही शेष रह गया है, इसलिए भारत ने पाकिस्तान सरकार को एक मसौदा भेजा है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान सरकार भारत द्वारा भेजे गए इस मसौदे पर जल्दी ही जवाब भेज देगी।
तीर्थ यात्रियों से 20 डॉलर की मांग पर अपना जवाब देने के लिए पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी जल्दी ही अधिकारियों की एक बैठक लेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 9 नवंबर को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे। पाकिस्तान भारतीय सीमा से गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब तक कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है, जबकि डेरा बाबा नानक से सीमा तक दूसरे हिस्से का निर्माण भारत द्वारा किया जा रहा है।
भारत इंटरनेशनल बॉर्डर पर एक पुल का निर्माण कर रहा है और उसने पाकिस्तान से अपनी तरफ से इसी तरह का एक पुल बनाने की मांग की है। तीसरी बैठक में भारत सरकार ने दस हजार तीर्थयात्रियों को विशेष ऐतिहासिक दिवसों और गुरु पर्वों पर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। पाकिस्तान ने इस अनुरोध पर बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला देते हुए अपनी आपत्ति जताई थी।