देश में ट्रैक्टर बनाने वाली पहली स्वदेशी फैक्टरी HMT बंद होगी!
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भारी उद्योग एवं उद्यम मंत्रालय ने एचएमची फैक्टरी पिंजौर को बंद करने का प्रस्ताव प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भेजा है। यह जानकारी सोमवार को शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने दी।
उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को बताया कि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के मंत्री आनंद गीते ने हरियाणा सरकार को एचएमटी फैक्टरी बंद करने का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में मंत्री ने कहा है कि देश के बदलते हुए आर्थिक और बाजार परिदृश्य को देखते हुए कंपनी का कार्य निष्पादन अच्छा नहीं है।
कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही है। इस कारण अब एचएमटी फैक्टरी चलने की स्थिति में नहीं है। कंपनी को बंद करके कर्मचारियों को वीआरएस पैकेज उपलब्ध करवाया जाए।
बंसल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, बीरेंदर सिंह, सुषमा स्वराज, राव इंद्रजीत, कृष्णपाल गुर्जर को ज्ञापन भेज एचएमटी फैक्टरी के जीर्णोद्धार की मांग की थी। एचएमटी पिंजौर यूनिट में अब भी विश्व इंडस्ट्रियल व तकनीकी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने की क्षमता है, क्योंकि एचएमटी फैक्टरी की 850 एकड़ भूमि की कीमत करीब 15 हजार करोड़ और मशीनरी व अन्य 5000 करोड़ है।
देश में ट्रैक्टर निर्माण की एकमात्र सरकारी उपक्रम है। यदि एचएमटी फैक्टरी से ट्रैक्टर निर्माण बंद हो जाएगा तो ट्रैक्टर की कीमत दोगुनी हो जाएगी। इससे किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।
फैक्टरी पर लाखों लोगों का रोजगार निर्भर है। फैक्टरी के पास 446 एकड़ जमीन खाली है। इस पर बड़ा उद्योग लग सकता है। फैक्ट्री के कारण ही हरियाणा तकनीकी में विश्व नक्शे पर आया था। कांग्रेस सरकार ने 1083 करोड़ आर्थिक पैकेज एचएमटी को दिया था। इसकी वह केंद्र सरकार से जांच की मांग करेंगे।
वर्किंग कैपिटल के लिए केवल 93 करोड़ मिले थे, जबकि 200 करोड़ आधुनिकीकरण के लिया दिया था। जिसका आज के समय में कोई उपयोग नहीं है। क्योंकि अब एचएमटी को कर्मचारियों के बकाया वेतन व अन्य कर्जे के लिए 150 करोड़ की आवश्यकता है। आर्थिक पैकेज में से 200 करोड़ रुपये बकाया। यदि वे कैपिटल व अन्य जरूरी खर्च के लिए दे दिया जाए तो फैक्टरी सुचारु रूप चल सकती है।
मेक इन इंडिया अभियान के तहत जोड़ने की मांग
842 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी
एचएमटी फैक्टरी के लिए 842 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन फैक्टरी की दोनों यूनिट एवं कालोनी व अन्य इमारतों का 396 एकड़ में ही निर्माण हुआ।
बाकी 446 एकड़ पिछले 52 वर्षों से खाली पड़ी है। इस जमीन पर उद्योग लगाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा गया था। 1997 में एसीसी फैक्टरी ने सीमेंट के काम में विश्व में नाम कमाया। उसे भी हरियाणा विकास पार्टी व भाजपा सरकार ने बंद कर दिया था।
एचएमटी फैक्ट्री को मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत किसी अन्य उद्योग से जोड़ा जा सकता है। जैसे हरियाणा में प्रस्तावित रेलवे उद्योग लगाया जा सकता है, क्योंकि एचएमटी रेलवे लाइन के किनारे है। शिवालिक क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति हिमाचल व उत्तराखंड के भांति है। क्षेत्र को औद्योगिक पैकेज दिया जाए।
एचएमटी फैक्टरी के कर्मचारियों को पिछले 18 माह से वेतन नहीं मिला है। इस कारण एचएमटी फैक्टरी की आर्थिक दशा खराब है। बंसल ने कहा कि शिवालिक विकास मंच 2004 से फैक्टरी के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहा है। देश के विकास के लिए मेक इन इंडिया में स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा दिया जाए।
पंडित नेहरू ने किया था उद्घाटन
एचएमटी फैक्टरी पिंजौर का उद्घाटन 23 अक्टूबर 1963 को तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने किया था। मशीन टूल्ज 1963 में शुरू हुआ। ट्रैक्टर प्लांट 1975 में लगा था। 1992 तक एचएमटी में 8000 कर्मचारी कार्यरत थे। 1990 में एचएमटी मैनेजमेंट के गलत नीतियों व भ्रष्टाचार के कारण एचएमटी इस कगार पर पहुंचा है।
एचएमटी पिंजौर में करीब 2000 कर्मचारी कार्यरत हैं। शिवालिक क्षेत्र से 10 विधायक भाजपा से हैं। लोकसभा सदस्य भी भाजपा से हैं। एचएमटी फैक्टरी नेशनल अप्रेंटिसशिप एक्ट के अंतर्गत इस क्षेत्र के 300 युवाओं को प्रतिवर्ष तकनीकी प्रशिक्षण दे रही है।