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India-Pakistan: 75 साल बाद रावलपिंडी में पुश्तैनी घर और अपनी बचपन की गलियों में पहुंचीं भारत की 90 साल की रीना
Sun, 17 Jul 2022 01:52 PM IST
शाहरुख खान
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 17 Jul 2022 01:52 PM IST
सार
पुणे निवासी रीना वर्मा का जन्म रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। उनका घर देवी कालेज रोड पर था। वहीं के माडर्न स्कूल में शिक्षा हासिल की। उनके भाई और बहन भी उसी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।
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रीना वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुणे की 90 वर्षीय रीना वर्मा छिब्बर की अपनी गलियों में पहुंचने की मुराद 75 साल बाद आखिर पूरी हो ही गई। ज्वाइंट चेक पोस्ट अटारी से पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले इस बुजुर्ग महिला की आंखों में गजब की चमक थी। पाकिस्तान सरकार ने सद्भावना के चलते रीना वर्मा को पाकिस्तान का 3 माह का वीजा दिया है।
इस महिला ने पहले भी कई बार अपने बचपन की गलियों में जाने की इजाजत के लिए पाकिस्तान उच्चायोग से वीजा आवेदन किया था। लेकिन भारत-पाक के ठंडे रिस्तों के चलते पहले उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिल सकी।
पुणे निवासी बुजुर्ग रीना वर्मा ने बताया कि उनका जन्म रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। उनका घर देवी कालेज रोड पर था। वहीं के माडर्न स्कूल में शिक्षा हासिल की। उनके भाई और बहन भी उसी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान जाने से पहले बताया कि उनके पिता स्वतंत्र विचारों के थे और उनके घर उनके मुस्लिम दोस्तों का अकसर आना-जाना होता था।
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1947 में भारत-पाक के बंटवारे के बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब वह अपने तीन माह के पाकिस्तान प्रवास के दौरान अपनी बचपन की यादों को ताजा कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश होगी कि वह रावलपिंडी में अपने घर पहुंच कर अपनी बचपन की यादों को ताजा करते हुए अपने पुराने दोस्तों से मिलने का प्रयास करेंगी।
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इस महिला ने पहले भी कई बार अपने बचपन की गलियों में जाने की इजाजत के लिए पाकिस्तान उच्चायोग से वीजा आवेदन किया था। लेकिन भारत-पाक के ठंडे रिस्तों के चलते पहले उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिल सकी।
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पुणे निवासी बुजुर्ग रीना वर्मा ने बताया कि उनका जन्म रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। उनका घर देवी कालेज रोड पर था। वहीं के माडर्न स्कूल में शिक्षा हासिल की। उनके भाई और बहन भी उसी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान जाने से पहले बताया कि उनके पिता स्वतंत्र विचारों के थे और उनके घर उनके मुस्लिम दोस्तों का अकसर आना-जाना होता था।
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1947 में भारत-पाक के बंटवारे के बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब वह अपने तीन माह के पाकिस्तान प्रवास के दौरान अपनी बचपन की यादों को ताजा कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश होगी कि वह रावलपिंडी में अपने घर पहुंच कर अपनी बचपन की यादों को ताजा करते हुए अपने पुराने दोस्तों से मिलने का प्रयास करेंगी।
उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने 1965 में भी आवेदन किया, लेकिन तब दोनों देशों के बीच युद्ध के हालातों के चलते उन्हें वीजा नहीं मिल सका। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट अपलोड कर अपने पैतृक घर जाने की इच्छा जाहिर की थी। यह पोस्ट पाकिस्तानी नागरिक सज्जाद हैदर ने देखी और रीना से संपर्क साधा।
उनके कहने पर सज्जाद ने रावलपिंडी स्थित उनके आवास की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें भेजी। इसके बाद रीना का संपर्क पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी से हुआ, तो उनके प्रयासों से उन्हें पाकिस्तान जाने का मौका मिल पाया।
उनके कहने पर सज्जाद ने रावलपिंडी स्थित उनके आवास की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें भेजी। इसके बाद रीना का संपर्क पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी से हुआ, तो उनके प्रयासों से उन्हें पाकिस्तान जाने का मौका मिल पाया।