नेत्र-5 ड्रोन: सेना को मिली 'तीसरी आंख', बैटरी बैकअप भी जबरदस्त...बॉर्डर पर दुश्मन इस 'नजर' से बच नहीं पांएंगे
देश की सीमाओं पर दुश्मनों पर नजर रखने के लिए विशेष तौर पर भारतीय सेना ने नेत्र-5 ड्रोन तैयार किया है। नेत्र-5 ड्रोन का लगातार बिना रुके कई घंटे तक आसमान में उड़ने का बैटरी बैकअप है। वहीं, बॉर्डर पर जवानों के अलावा अब सेना ने एंटी ड्रोन गन, नई तकनीक वाले ड्रोन को भी सुरक्षा में तैनात किया है।
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चीन और पाकिस्तान के साथ लगती भारत देश के हजारों किलोमीटर सीमाओं पर सुरक्षा का जिम्मा अब जवानों के बजाय नई तकनीक वाले ड्रोन के कंधों पर भी आ गया है। भारतीय सेना ने हाल ही में चेन्नई की एक कंपनी के साथ नेत्र-5 ड्रोन की खरीद को लेकर करार भी किया है।
नेत्र-5 ड्रोन का लगातार बिना रुके कई घंटे तक आसमान में उड़ने का बैटरी बैकअप है। वहीं, बॉर्डर पर जवानों के अलावा अब सेना ने एंटी ड्रोन गन, नई तकनीक वाले ड्रोन को भी सुरक्षा में तैनात किया है। नेत्र-5 ड्रोन को चेन्नई की एक कंपनी ने तैयार किया है और स्विच वी-2 मानवरहित ड्रोन आकार में कॉम्पैक्ट मिनी प्लेन भी इसी कंपनी ने सेना को दिया है।
पंचकूला चंडीमंदिर कमांड में आयोजित सेमिनार मैक-टेक 2025 में नेत्र-5 ड्रोन को भी प्रदर्शित किया गया है। एक सेना अधिकारी ने खास बातचीत के दौरान बताया किया नेत्र ड्रोन-5 को जल्द ही भारतीय सेना के साथ जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए हाई लेवल पर कंपनी के साथ करार भी किया जा चुका है।
चीन और पाकिस्तान के साथ दो लंबी सीमाएं हैं, जहां खुफिया जानकारी जुटाने और निगरानी की आवश्यकता होती है। ड्रोन के अलावा यूएवी और आरपीए सिस्टम सैनिकों की जान के जोखिम को कम करते हैं। इनके जरिये सीमा पार से घुसपैठ और आतंकवादी ठिकानों पर नजर रखी जा सकती है।
एयरफोर्स और नेवी कर रही यूएवी का इस्तेमाल
अधिकारी ने बताया कि सेना ने आईएसआर (खुफिया, निगरानी) के साथ-साथ सटीक-हमला मिशन इत्यादि के लिए काफी संख्या में ड्रोन्स को अपने बेड़े में शामिल करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके साथ ही सेना मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और दूर से संचालित विमान (आरपीए) भी लेकर आने की तैयार कर चुकी है। हालांकि एयरफोर्स और नेवी में यूएवी का प्रयोग पिछले करीब डेढ़ साल से किया जा रहा है।
तपस की क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास
सेना के अधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में थल, वायु और नौसेना के लिए कम से कम 150 नए मेल ड्रोन की आवश्यकता है। इसके लिए डीआरडीओ के साथ-साथ निजी कंपनियों द्वारा मेक-इन-इंडिया मेल ड्रोन को तैयार करने पर काफी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके साथ ही डीआरडीओ ने तपस-बीएस-201 ड्रोन सहित यूएवी की नई रुस्तम श्रृंखला भी तैयार की है और अब तपस की क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
डीआरडीओ ने तैयार किया हथियारबंद ड्रोन आर्चर एनजी
इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियारबंद मेल ड्रोन आर्चर-एनजी भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी जल्द ही पहली उड़ान होने की तैयारियां भी चल रही है। आर्चर-एनजी को आईएसआर मिशन, लक्ष्य प्राप्ति और सटीक हमलों के लिए करीब एक हजार किलोमीटर की रेंज के साथ डिजाइन किया गया है।
वहीं, सेना को अक्टूबर-2024 में अमेरिका के साथ किए गए अनुबंध के तहत एमक्यू-9बी प्रिडेटर ड्रोन भी मिलेंगे। इसके साथ ही भारत को वर्ष 2029 में हेलफायर मिसाइलों के अलावा जीबीयू-39बी ग्लाइड बम और अन्य हथियारों से लैस ड्रोन भी मिलेंगे।