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सावधानः हरियाणा में लोगों को उनका खुद का दिल दे रहा दगा, दो साल के आंकड़े चौंका देंगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Sep 2018 09:45 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा के लोगों को भी अब दिल दगा देने लगा है। प्रदेश में दिल के दौरा पड़ने से मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दिल का मामला खराब होने से बीते दो साल में 1447 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2016 में 694 और 2017 में 753 लोगों की जान गई। दो साल में इतने लोगों की हार्ट अटैक से मौत होने पर सरकार भी हरकत में है। विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक जगबीर सिंह मलिक के सवाल पर सरकार की ओर से यह जानकारी सदन पटल पर रखी गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अध्ययनों के अनुसार हरियाणा के लोगों को मजबूत दिल का माना जाता है, लेकिन 1990 के बाद दिल के मरीज बढ़े हैं। हरियाणा में 1990 में दिल की बीमारियों के कारण कुल मौतों में से 4.6 प्रतिशत जानें दिन की बीमारियों के कारण हो रही थीं, जबकि 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते बरसों में दिल की बीमारी से मौतों का आंकड़ा 7.1 फीसदी बढ़ा है।
जगबीर मलिक ने सरकार से पूछा था कि क्या यह सही है, प्रदेश में दिल के दौरों के कारण मृत्यु के मामले बढ़ गए हैं। बीते तीन सालों में हुई मौतों का जिला अनुसार ब्योरा दिया जाए। लोगों को दिल के दौरे से बचाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विधानसभा और मलिक को जानकारी दी है कि मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ के आंकड़ों के अनुसार ह्दयाघात से मौत की संख्या वार्षिक आधार पर संकलित की जाती है। दो सालों में 1447 लोगों की जान गई है। 2018 के आंकड़े 2019 में उपलब्ध होंगे। बता दें कि सरकार ने जिलावार मौतों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है।
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आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्क्रीनिंग में जुटी : विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि विभाग कोर्डियोवेस्कुलर रोगों सहित गैर संचारी बीमारियों के लिए विभिन्न अभियान चला रहा है। अंबाला, गुरुग्राम, पंचकूला, सिरसा व यमुनानगर जिलों में तीस साल और उससे अधिक आयु की जनसंख्या पर आधारित स्क्रीनिंग शुरू की गई है। आशा वर्कर्स व स्वास्थ्य कार्यकर्ता आम जनता को मधुमेह, उच्च रक्तचाप के अलावा हार्ट अटैक के अन्य कारण पता लगाने के लिए जनता के बीच जा रही हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अध्ययनों के अनुसार हरियाणा के लोगों को मजबूत दिल का माना जाता है, लेकिन 1990 के बाद दिल के मरीज बढ़े हैं। हरियाणा में 1990 में दिल की बीमारियों के कारण कुल मौतों में से 4.6 प्रतिशत जानें दिन की बीमारियों के कारण हो रही थीं, जबकि 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते बरसों में दिल की बीमारी से मौतों का आंकड़ा 7.1 फीसदी बढ़ा है।
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जगबीर मलिक ने सरकार से पूछा था कि क्या यह सही है, प्रदेश में दिल के दौरों के कारण मृत्यु के मामले बढ़ गए हैं। बीते तीन सालों में हुई मौतों का जिला अनुसार ब्योरा दिया जाए। लोगों को दिल के दौरे से बचाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विधानसभा और मलिक को जानकारी दी है कि मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ के आंकड़ों के अनुसार ह्दयाघात से मौत की संख्या वार्षिक आधार पर संकलित की जाती है। दो सालों में 1447 लोगों की जान गई है। 2018 के आंकड़े 2019 में उपलब्ध होंगे। बता दें कि सरकार ने जिलावार मौतों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया है।
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आशा व स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्क्रीनिंग में जुटी : विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि विभाग कोर्डियोवेस्कुलर रोगों सहित गैर संचारी बीमारियों के लिए विभिन्न अभियान चला रहा है। अंबाला, गुरुग्राम, पंचकूला, सिरसा व यमुनानगर जिलों में तीस साल और उससे अधिक आयु की जनसंख्या पर आधारित स्क्रीनिंग शुरू की गई है। आशा वर्कर्स व स्वास्थ्य कार्यकर्ता आम जनता को मधुमेह, उच्च रक्तचाप के अलावा हार्ट अटैक के अन्य कारण पता लगाने के लिए जनता के बीच जा रही हैं।