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Lok Sabha Election: हरियाणा में प्रदेश पर बढ़ता जा रहा कर्ज भी एक मुद्दा, 3.17 लाख करोड़ पहुंच गया ऋण

Fri, 03 May 2024 08:44 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 03 May 2024 08:44 AM IST
सार

सरकार का दावा है कि प्रदेश ने तय लिमिट में ही कर्ज लिया, जबकि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा 4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज होने का दावा कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के नेता मनोहर लाल का कहना है कि पिछले साल के 2.84 लाख करोड़ के मुकाबले इस बार 3.17 लाख करोड़ रुपये कर्ज पहुंच गया है।

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Increasing debt of state in Haryana is also an election issue
मनोहर लाल और नायब सिंह सैनी - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा में चल रहे लोकसभा चुनावों में तमाम मुद्दों के साथ प्रदेश पर बढ़ता जा रहा कर्ज भी एक मुद्दा है। विधानसभा में पहले ही सरकार और विपक्ष इस मामले को लेकर आमने-सामने हो चुके हैं, जबकि अब कांग्रेस और इनेलो के नेता रैलियों और जनसभाओं में कर्ज को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं। 

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सरकार का दावा है कि प्रदेश ने तय लिमिट में ही कर्ज लिया, जबकि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा 4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज होने का दावा कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के नेता मनोहर लाल का कहना है कि पिछले साल के 2.84 लाख करोड़ के मुकाबले इस बार 3.17 लाख करोड़ रुपये कर्ज पहुंच गया है। 2014 में हरियाणा में भाजपा की सरकार आई तो प्रदेश पर 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। साढ़े नौ साल में यह कर्ज बढ़ते-बढ़ते साढ़े चार गुना बढ़ चुका है। इसी मुद्दे को भुनाने के लिए विपक्षी दल कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि हरियाणा को भाजपा ने कर्ज लेने में भी नंबर वन बना दिया है। इसके विपरित भाजपा के नेता प्रत्येक जिले में मेडिकल कालेज, सड़कें औैर हाईवे बनाने समेत विकास का गुणगान कर रहे हैं।

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वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बिमल अंजुम का कहना है कि कर्ज केवल मांगने से नहीं मिलता है, इसके लिए पहले से ही गाइडलाइन तय हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते ही ऋण मिलता है। हरियाणा की स्थिति वाकई गंभीर है कि कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रति व्यक्ति कर्ज का हिस्सा भी बढ़ रहा है। लेकिन जहां तक आंकड़ों और गाइडलाइन की बात है तो हरियाणा ने अभी तक कर्ज लेने की सीमा पार नहीं की है। कर्ज उतारने के लिए अतिरिक्त राजस्व बढ़ाने के लिए प्रयास करने होंगे। यही स्थिति रही तो लोन उतारने के लिए भी लोन लेना पड़ेगा।

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प्रदेश पर 44,51,368 रुपये का कर्ज 
आज प्रदेश पर कर्ज 4,51,368 करोड़ रुपये हो चुका है। इनमें आंतरिक कर्ज 3,17,982 करोड़ स्मॉल सेविंग 44000 करोड़, बोर्ड व कॉरपोरेशन 43,955 करोड़, बकाया बिजली बिल व सब्सिडी का 46,193 करोड़ का कर्ज भी शामिल है। प्रदेश पर जीएसडीपी का 41.2 प्रतिशत कर्जा हो गया है, जो कि 33 प्रतिशत की मानक सीमा से कहीं अधिक है। आंकड़ों को घुमा फिरा कर पेश करके सरकार गुमराह रही है। -भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नेता प्रतिपक्ष, हरियाणा।

विकास के पथ पर अग्रसर
प्रदेश पर 3.17 लाख करोड़ का कर्ज है और यह तय लिमिट में है। कर्ज लेने के लिए सीमाएं तय हैं। दूसरा, कर्ज भी सभी को नहीं मिलता, उसके लिए राज्य के संसाधन और वित्तीय स्थिति देखी जाती है। हमारा स्टेट ऑन टैक्स रेवेन्यू बढ़ा है, जो विकास को दर्शाता है। इससे जीएसडीपी भी बढ़ी है। हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है और लोगों के जीवन यापन में सुधार हुआ है। विपक्ष का काम आलोचना करना है, वे करें, लेकिन तथ्यों को तोड़मरोड़ के पेश ना करें। हरियाणा लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। -मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा

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