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ब्लैक मनी पर लगाम लगाने को आयकर विभाग का सख्त कदम

Sun, 17 Jan 2016 03:41 PM IST
मोनिल शर्मा/अमर उजाला, रोहतक
मोनिल शर्मा/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 17 Jan 2016 03:41 PM IST
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income tax department big scheme to stop black money

काले धन पर लगाम लगाने के लिए आयकर विभाग ने एक और कड़ा कदम उठाया है। अब सर्कल रेट से कम पर प्रापर्टी की रजिस्ट्री कराने वालों पर विभाग की पैनी नजर रहेगी। अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी सर्कल रेट से कम मूल्य पर बेचता है तो खरीदार और विक्रेता दोनों को टैक्स देना होगा।

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इसके लिए प्रदेश सरकार ने सेक्शन-56 की उपधारा दो के अंतर्गत खंड-7 में संशोधन किया है। चूंकि, अभी तक प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने के मामले में सर्कल रेट को लेकर गड़बड़ियां होती आईं थीं, इसलिए विभाग ने कड़ा कदम उठाने का फैसले लिया है।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार हर साल प्रॉपर्टी का एक सर्कल रेट निर्धारण करती है। इस सर्कल रेट पर प्रॉपर्टी को खरीदते समय सरकार को स्टांप शुल्क देना होता है। यह सर्कल रेट ही सरकार की ओर से निर्धारित किया गया स्टांप शुल्क होता है। यह शुल्क हर साल इलाके के विकास पर अलग-अलग निर्धारित होता है।
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इसे ऐसे समझे

अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी 40 लाख रुपये में बेचता है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित सर्कल रेट के अनुसार उसका मूल्य 50 लाख रुपये बनता है। ऐसी स्थिति में पूंजी लाभ कर का मूल्यांकन 50 लाख रुपये पर किया जाएगा, न कि 40 लाख रुपये पर। सेक्शन-56 की उपधारा दो के अंतर्गत खंड-7 के अंतर्गत अगर कोई खरीदार किसी प्रापर्टी को सर्कल रेट से कम मूल्य में खरीदता है। यानी, 40 लाख रुपये में खरीदता है और उसका सर्कल रेट 50 लाख रुपये बनता है तो खरीदार को अपनी आय 10 लाख रुपये दिखानी होगी। इसी फर्क को खरीददार आयकर के अन्य सोर्स में दिखाएगा। इस पर उसे टैक्स देना होगा।

विभाग ने प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने के मामले में सर्कल रेट को लेकर हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए ही यह कदम उठाया है। इससे काले धन की कमाई पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।

- सीमा धनखड़, डिप्टी कमिश्नर, सर्कल कार्यालय, आयकर विभाग रोहतक
 
प्रदेश सरकार हर साल प्रॉपर्टी का सर्कल रेट निर्धारित करती है। अगर खरीदार और विक्रेता सर्कल रेट से कम प्रॉपर्टी का मोल भाव करते हैं, तो दोनों को ही आयकर विभाग को टैक्स देना होगा।
- संजय थरेजा, सीए

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