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Hindi News ›   Chandigarh ›   In case of skull fracture, it will be easier to implant with 3D technology.

Chandigarh: खोपड़ी की हड्डी टूटने पर 3डी तकनीक से इंप्लांट होगा आसान, पीयू के विद्यार्थी बना रहे सॉफ्टवेयर

Tue, 28 Nov 2023 02:19 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 28 Nov 2023 02:19 AM IST
सार

आमतौर पर खोपड़ी के इंप्लांट के लिए बोन सीमेंट और मेटल का प्रयोग किया जाता है। विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट में पीक (पॉलीएथर ईथर कीटोन) प्लास्टिक मटीरियल का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें हड्डी के कई गुण हैं। बोन सीमेंट इंप्लांट की अपेक्षा में पीक मटीरियल अधिक हल्का है।

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In case of skull fracture, it will be easier to implant with 3D technology.
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

खोपड़ी की हड्डी टूटने पर अब 3डी तकनीक से आसानी से इलाज किया जा सकेगा। पंजाब विश्वविद्यालय के यूआईईटी के विद्यार्थी मैक्जिलोफेशियल बोन रीकंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। यह सिर के इंप्लांट की प्रक्रिया को बेहतर और आसान बनाएगा।

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खोपड़ी की हड्डी टूट जाने या उसका कोई हिस्सा सर्जरी के कारण काटे जाने पर उसमें बोन सीमेंट या टाइटेनियम मेटल भरा जाता है। घाव के अनुसार सीमेंट को स्ट्रक्चर नहीं किया जाता बल्कि प्लस्तर की तरह लगा दिया जाता है। पीयू के इंजीनियरिंग के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर रहे हैं, जो घाव की आकृति के अनुसार 3डी मॉडल तैयार करेगा। सॉफ्टवेयर की बनाई 3डी तस्वीर के अनुसार पीक मटीरियल का असल मॉडल बनाया जाएगा। इससे खोपड़ी की हड्डी के इंप्लांट की प्रक्रिया बेहतर और आसान होगी।
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मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत जिंदल और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ममता जुनेजा के नेतृत्व में तीन टीमों में विभाजित बीटेक और एमटेक के विद्यार्थी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। रिषभ, ध्रुव और ईरा की टीम एआई सॉफ्टवेयर बनाने पर काम कर रही है। एआई सॉफ्टवेयर बनाने के लिए टीम एक स्टार्टअप की मदद ले रही है। दूसरी टीम मैनुअल मॉडल बनाने पर काम कर रही है, जिसमें अनिरुद्ध, अपर्णा और प्रशांत शामिल हैं। वहीं, तीसरी टीम अंतिम मॉडल तैयार होने पर उसे जांचने के लिए मशीन बनाने पर काम कर रही है। 

प्रोजेक्ट में पीक मटीरियल का कर रहे इस्तेमाल
आमतौर पर खोपड़ी के इंप्लांट के लिए बोन सीमेंट और मेटल का प्रयोग किया जाता है। विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट में पीक (पॉलीएथर ईथर कीटोन) प्लास्टिक मटीरियल का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें हड्डी के कई गुण हैं। बोन सीमेंट इंप्लांट की अपेक्षा में पीक मटीरियल अधिक हल्का है। वहीं, मेटल इंप्लांट करने पर मरीज एमआरआई टेस्ट नहीं करवा सकता, शरीर में मेटल होने से सिक्योरिटी स्क्रीनिंग में मशीन बीप करती है, जिसके चलते उन्हें अपना सर्टिफिकेट साथ लेकर चलना होता है। पीक मटीरियल इंप्लांट से मरीज को इन समस्याओं का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

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