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Chandigarh News: कनाडा में -23 डिग्री में पंजाब मूल के टैक्सी ड्राइवर की सूझबूझ से बची जच्चा-बच्चा की जान
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ओंटारियो (एजेंसी)।
कनाडा में -23 डिग्री सेल्सियस की बर्फीली रात में पंजाब मूल के टैक्सी ड्राइवर हरदीप सिंह तूर ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचा कर जच्चा-बच्चा की जान बा ली। हरदीप ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन हरदीप की सतर्कता जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित रखा।
बीते शनिवार की देर रात हरदीप को इमरजेंसी कॉल मिली। महिला दर्द से कराह रही थी और उसका साथी उसे संभालने की कोशिश कर रहा था। हरदीप ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फैसला किया कि एंबुलेंस का इंतजार जानलेवा हो सकता है। शून्य से 23 डिग्री नीचे का तापमान, फिसलन भरी सड़कें और तेज़ हवाओं के बावजूद हरदीप ने टैक्सी को अस्पताल की ओर दौड़ा दिया।
मैंने दो लोगों को बैठाया था, जब दरवाजा खुला तो तीन बाहर निकले
रास्ते में महिला की पीड़ा और चीखने की आवाज हरदीप के लिए चुनौती बन गईं। हर रेड लाइट और फिसलन वाले मोड़ पर उन्होंने धैर्य बनाए रखा। उनका पूरा ध्यान सुरक्षित ड्राइविंग और महिला-बच्चे की सुरक्षा पर था। पिछली सीट पर ही बच्चे का जन्म हुआ और हरदीप ने गर्व से कहा मैंने दो लोगों को बैठाया था, लेकिन जब दरवाजा खुला तो तीन लोग बाहर निकले।
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दुनिया कर रही तारीफ
हरदीप की बहादुरी और सूझबूझ की खबर कनाडा और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी वायरल हो गई है। ग्लोबल न्यूज और अन्य मीडिया चैनल्स ने उनके साहस को सराहा और बताया कि किस तरह एक साधारण टैक्सी ड्राइवर ने जान जोखिम में डालकर दो जीवन बचाए। हरदीप सिंह तूर की यह घटना न केवल मानवता और जिम्मेदारी की मिसाल है बल्कि यह भी दिखाती है कि सही निर्णय और धैर्य कठिन परिस्थितियों में कितने जीवन बदल सकते हैं।
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कनाडा में -23 डिग्री सेल्सियस की बर्फीली रात में पंजाब मूल के टैक्सी ड्राइवर हरदीप सिंह तूर ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचा कर जच्चा-बच्चा की जान बा ली। हरदीप ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन हरदीप की सतर्कता जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित रखा।
बीते शनिवार की देर रात हरदीप को इमरजेंसी कॉल मिली। महिला दर्द से कराह रही थी और उसका साथी उसे संभालने की कोशिश कर रहा था। हरदीप ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फैसला किया कि एंबुलेंस का इंतजार जानलेवा हो सकता है। शून्य से 23 डिग्री नीचे का तापमान, फिसलन भरी सड़कें और तेज़ हवाओं के बावजूद हरदीप ने टैक्सी को अस्पताल की ओर दौड़ा दिया।
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मैंने दो लोगों को बैठाया था, जब दरवाजा खुला तो तीन बाहर निकले
रास्ते में महिला की पीड़ा और चीखने की आवाज हरदीप के लिए चुनौती बन गईं। हर रेड लाइट और फिसलन वाले मोड़ पर उन्होंने धैर्य बनाए रखा। उनका पूरा ध्यान सुरक्षित ड्राइविंग और महिला-बच्चे की सुरक्षा पर था। पिछली सीट पर ही बच्चे का जन्म हुआ और हरदीप ने गर्व से कहा मैंने दो लोगों को बैठाया था, लेकिन जब दरवाजा खुला तो तीन लोग बाहर निकले।
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हरदीप की बहादुरी और सूझबूझ की खबर कनाडा और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी वायरल हो गई है। ग्लोबल न्यूज और अन्य मीडिया चैनल्स ने उनके साहस को सराहा और बताया कि किस तरह एक साधारण टैक्सी ड्राइवर ने जान जोखिम में डालकर दो जीवन बचाए। हरदीप सिंह तूर की यह घटना न केवल मानवता और जिम्मेदारी की मिसाल है बल्कि यह भी दिखाती है कि सही निर्णय और धैर्य कठिन परिस्थितियों में कितने जीवन बदल सकते हैं।