{"_id":"5fda59ac8ebc3e3d5a44e22c","slug":"important-order-of-punjab-and-haryana-high-court-regarding-tablighi-jamaat-cases","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश- तब्लीगी जमात से जुड़े मामलों का तीन माह में निपटारा हो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश- तब्लीगी जमात से जुड़े मामलों का तीन माह में निपटारा हो
Thu, 17 Dec 2020 12:33 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 17 Dec 2020 12:33 AM IST
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केस लंबित होने के चलते अपने वतन न लौट पाने की दलील देते हुए तब्लीगी जमात के लोगों द्वारा दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व ट्रायल कोर्ट को तीन माह के भीतर इन केस का निपटारा करने का आदेश दिया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि तब्लीगी जमात से जुड़े प्रदेश में 11 केस दर्ज थे जिनमें सात मामलों का निपटारा किया गया है।
विज्ञापन
एक में एफआईआर रद्द की गई है। दो केस अंबाला और एक गुरुग्राम में लंबित है। सरकार ने सभी केस एक स्थान पर ट्रायल की मांग का विरोध किया और कहा कि दो मामलों में ट्रायल जबकि एक में जांच जारी है। सभी पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार तीन महीने के भीतर इन केस का निपटारा सुनिश्चित करे।
विज्ञापन
तब्लीगी जमात से जुड़े नेपाल निवासी शेख मुस्तफा व अन्य विदेशियों ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ अप्रैल में अंबाला व अन्य स्थानों में केस दर्ज किया गया था। केस लंबित होने के चलते वह अपने वतन नहीं लौट पा रहे हैं। कोरोना काल के शुरुआती दौर में जमात से जुड़े लोगों के खिलाफ काफी संख्या में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार व दूसरे प्रदेशों में मामले दर्ज किए गए थे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने एक मौलाना की याचिका पर दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर जमात से जुड़े जितने भी केस हैं, उनका ट्रायल एक कोर्ट में कर शीघ्र निपटारा किया जाए। ऐसे ही आदेश बिहार हाईकोर्ट ने बिहार में जारी किए हैं।