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रसौली के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप

Fri, 12 Sep 2014 02:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 12 Sep 2014 02:12 PM IST
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Important Health Update and Tips for Womans

ट्राइसिटी की 70 से 80 फीसदी महिलाओं में चालीस साल और उसके बाद गर्भाश्य की रसौली की समस्या होती हैं। रसौली के ज्यादातर मामलों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते।

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रसौली होने पर मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्राव, दर्द और पेट में दबाव महसूस होता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को बार-बार गर्भपात और यहां तक कि बांझपन की समस्या हो सकती है।
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रसौली अगर गर्भाश्य के करीब होती है या रक्त प्रवाह रोकती है तो पीरियड के दौरान काफी दर्द होता है। गर्भाश्य के पास छोटी से रसौली भी हो तो उसका जल्द पता लग जाता है जबकि इससे दूर होने पर इसके लक्षण कम ही सामने आते हैं। हालांकि इसका तुरंत इलाज कराना आवश्यक है।
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रसौली का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे साधारण तकनीक है इसीलिए इसे हर साल करवाना चाहिए। एसिम्प्टॉमैटिक (जिसके लक्षण सामने नहीं आते) रसौली का पता लगाने के लिए एक अंतराल के बाद लगातार लगातार स्कैन कराने चाहिए। वहीं तेजी से बढ़ती रसौली का तुरंत इलाज कराया जाना चाहिए।

रसौली के लक्षणों को जानना और उनके माध्यम से होने वाली समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करना आवश्यक है। इसके लिए अब लेजर तकनीक आ चुकी है। इससे रसौली को आसानी से दूर किया जा सकता है।


मायोमैटिक सबसे सफल तकनीक है जिसके माध्यम से गर्भाश्य को निकाले या नुकसान पहुंचाए बिना एक छेद के माध्यम से हटाया जा सकता है।

यह छेद इतना छोटा होता है कि इसमें टांके लगाने की जरूरत नहीं होती। गर्भधारण के समय रसौली से ब्लीडिंग, गर्भपात, ब्रीच बेबी, प्लेसेंटल अबरप्शन जैसी दिक्कतें हो जाती हैं।

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