गोमांस की लैब टेस्टिंग पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
गोमांस को लेकर जिला कोर्ट के दिए फैसले को पलटते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया। दरअसल हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि हरियाणा में ऐसी लैब टेस्टिंग व्यवस्था नहीं है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किसी व्यक्ति से पकड़ा मांस गोमांस है या नहीं।
इसका पता लगाने के लिए इंटरनेट पर मौजूद अध्ययन फैसला लेने में मददगार साबित हो रहे हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस महेश ग्रोवर ने एक फैसले में ऐसे अध्ययन का हवाला दिया है।
मेवात के रहने वाले यूसुफ को पुलिस ने मांस के साथ पकड़ा था। इसमें शंका थी कि यह गोमांस है। स्थानीय पशु चिकित्सक की गवाही के आधार पर जिला अदालत ने मार्च 2009 में यूसुफ को दोषी करार दिया था। इस फैसले को यूसुफ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यूसुफ ने दावा किया था कि उससे पकड़ा मांस गोमांस नहीं है।
'मांस चखा कर साबित नहीं किया जा सकता कि गोमांस है या नहीं '
यूसुफ के वकील ने मांस की किस्मों के बारे भी कई तथ्य पेश किए थे और कहा था कि गोमांस अलग होता है। इसी तथ्य को इंटरनेट पर अध्ययन खंगाल कर जस्टिस ग्रोवर ने अप्रैल में दिए फैसले में जिला अदालत का फैसला रद्द करते हुए यूसुफ को बरी करार दिया।
बेंच ने अपने फैसले में अध्ययन का हवाला देते हुए गोमांस की पहचान का उल्लेख भी किया है। बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि लैब टेस्टिंग के अभाव में किसी अनुभवी को मांस चखा कर यह साबित नहीं किया जा सकता कि कोई मांस गोमांस है।
बेंच ने यह भी कहा कि किसी अधिकारी को कटघरे में बुलाकर मात्र मांस चखा कर उसके गोमांस कहने से किसी आरोपी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। सजा सुनाने से पहले मांस की किस्म की गहनता से जांच की जानी जरूरी है।