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पीजीटी कंप्यूटर टीचरों के लिए जरूरी खबर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Jan 2014 12:09 PM IST
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हरियाणा सरकार द्वारा पीजीटी कंप्यूटर टीचर के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए बनाए गए नियमों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
कैथल निवासी ममता देवी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जसबीर सिंह की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार और हरियाणा के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करने के साथ ही राज्य में अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए अब तक आवेदन कर चुके पीजीटी कंप्यूटर टीचरों के आवेदन रद्द किए जाने पर भी रोक लगा दी।
याचिका में कहा गया है कि हरियाणा सरकार ने यह नियम यूजीसी के नियमों का उल्लंघन कर बनाए हैं। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार केवल रेगुलर कोर्स वाला उम्मीदवार ही पीजीटी कंप्यूटर शिक्षक के लिए आयोजित पात्रता परीक्षा में बैठने योग्य है।
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याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने सरकार द्वारा योग्यता में रेगुलर कोर्स शब्द जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हरियाणा की ए ग्रेड यूनिवर्सिटी, एमडीयू रोहतक, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, देवीलाल यूनिवर्सिटी सिरसा, जीजेयू हिसार, पीटीयू जालंधर पत्राचार के माध्यम से एमसीए करवा रही हैं।
देश भर में इन पाठ्यक्रमों को मान्यता प्राप्त है। केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा में भी इन कोर्स को मान्यता दी जाती है। हरियाणा सरकार ने भी कई विभागों में इन पत्राचार के माध्यम से कोर्स किए हुए उम्मीदवारों को नौकरी दी है।
लेकिन अब स्कूलों में पीजीटी कंप्यूटर टीचर की पात्रता परीक्षा में नियम में बदलाव कर सरकार ने इस परीक्षा में केवल नियमित कोर्स करने वालों को योग्य करार दिया।
पत्राचार कोर्स की इजाजत यूजीसी द्वारा नियंत्रित डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल करती है। काउंसिल ही इन कोर्स को करवाए जाने के लिए विश्वविद्यालय को मान्यता देती है।
बावजूद इसके हरियाणा सरकार के इस नियम से राज्य के हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद आदेश दिए हैं कि पत्राचार से कोर्स करने वाले जिन याचिकाकर्ता ने अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन किया है।
उनके आवेदन रद्द नहीं किए जाएंगे। साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांग लिया है।
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कैथल निवासी ममता देवी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जसबीर सिंह की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार और हरियाणा के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करने के साथ ही राज्य में अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए अब तक आवेदन कर चुके पीजीटी कंप्यूटर टीचरों के आवेदन रद्द किए जाने पर भी रोक लगा दी।
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याचिका में कहा गया है कि हरियाणा सरकार ने यह नियम यूजीसी के नियमों का उल्लंघन कर बनाए हैं। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार केवल रेगुलर कोर्स वाला उम्मीदवार ही पीजीटी कंप्यूटर शिक्षक के लिए आयोजित पात्रता परीक्षा में बैठने योग्य है।
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याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने सरकार द्वारा योग्यता में रेगुलर कोर्स शब्द जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हरियाणा की ए ग्रेड यूनिवर्सिटी, एमडीयू रोहतक, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, देवीलाल यूनिवर्सिटी सिरसा, जीजेयू हिसार, पीटीयू जालंधर पत्राचार के माध्यम से एमसीए करवा रही हैं।
देश भर में इन पाठ्यक्रमों को मान्यता प्राप्त है। केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा में भी इन कोर्स को मान्यता दी जाती है। हरियाणा सरकार ने भी कई विभागों में इन पत्राचार के माध्यम से कोर्स किए हुए उम्मीदवारों को नौकरी दी है।
लेकिन अब स्कूलों में पीजीटी कंप्यूटर टीचर की पात्रता परीक्षा में नियम में बदलाव कर सरकार ने इस परीक्षा में केवल नियमित कोर्स करने वालों को योग्य करार दिया।
पत्राचार कोर्स की इजाजत यूजीसी द्वारा नियंत्रित डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल करती है। काउंसिल ही इन कोर्स को करवाए जाने के लिए विश्वविद्यालय को मान्यता देती है।
बावजूद इसके हरियाणा सरकार के इस नियम से राज्य के हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद आदेश दिए हैं कि पत्राचार से कोर्स करने वाले जिन याचिकाकर्ता ने अध्यापक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन किया है।
उनके आवेदन रद्द नहीं किए जाएंगे। साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांग लिया है।