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VC को बेड पर लिटाने का मुद्दा गर्माया: विपक्ष बोला- मंत्री ने अपमान किया, IMA ने भी व्यवहार की निंदा की

Sat, 30 Jul 2022 01:26 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 30 Jul 2022 01:26 AM IST
सार

कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि पढ़े-लिखे स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वीसी राज बहादुर जैसे प्रसिद्ध डॉक्टर को अपमानित करने का इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। अगर भगवंत मान के मन में चिकित्सकों का जरा भी सम्मान है और वह भी ऐसे वरिष्ठ डॉक्टर वीसी के लिए तो उन्हें अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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IMA condemns humiliating act of Punjab Health Minister
वीसी डॉ. राज बहादुर से बात करते स्वास्थ्य मंत्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में फरीदकोट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के दौरे के दौरान स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा के अपमानजनक कृत्य पर आईएमए ने नाराजगी व्यक्त की है। पंजाब आईएमए अध्यक्ष डॉ. परमजीत मान के साथ आईएमए के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. एसपीएस सूच, डॉ. राजिंदर शर्मा, डॉ. सुनील कात्याल, डॉ. आरएस बल, डॉ. राकेश विग ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने प्रबंधों में कमी पर बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के वीसी डॉ. राज बहादुर को बेडशीट पर लिटा कर अपमानित किया है। 

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आईएमए नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री के फरमान की भी निंदा की। मंत्री के अपमानजनक व्यवहार के साथ-साथ कुलपति के कद के व्यक्ति का झुकना विशेष रूप से महान पेशे और सामान्य रूप से समाज के लिए एक अभिशाप से कम नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और अपने मंत्री से इसके लिए माफी मांगने और भविष्य में इस तरह के व्यवहार से परहेज करने के लिए कहना चाहिए अन्यथा आईएमए चिकित्सा बिरादरी के गौरव और प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगा।
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विपक्ष ने भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि पढ़े-लिखे स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वीसी राज बहादुर जैसे प्रसिद्ध डॉक्टर को अपमानित करने का इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। अगर भगवंत मान के मन में चिकित्सकों का जरा भी सम्मान है और वह भी ऐसे वरिष्ठ डॉक्टर वीसी के लिए तो उन्हें अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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प्रसिद्ध डॉक्टर और बाबा फरीद विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. राज बहादुर का सार्वजनिक अपमान स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा के खिलाफ दुर्व्यवहार के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। - कंवर संधू, पूर्व विधायक, पंजाब

स्वास्थ्य मंत्री के व्यवहार से डॉक्टरों में पनपा रोष 
स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा के वीसी डॉ. राज बहादुर को बेड पर लिटाने के कदम से मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों में रोष पाया जा रहा है। डॉक्टरों में रोष है कि स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष जिस तरह की तस्वीर पेश की गई है, पूरे अस्पताल में ऐसे हालात नहीं है। अस्पताल के करीब 40 वार्डो में से मंत्री ने महज दो वार्डो का ही जायजा लिया जबकि अति आधुनिक सुविधाएं वाले ज्यादातर वार्डों को देखने से किनारा ही किया गया।

यह है पूरा मामला
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा शुक्रवार को बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान स्किन वार्ड के फटे व गंदे गद्दे देख वह भड़क गए। उन्होंने पास खड़े यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. राज बहादुर का हाथ पकड़कर बेड पर लिटा दिया और कहा कि आप भी इस गंदगी का अहसास करें। मंत्री ने कहा कि यह चमड़ी रोग वार्ड है और आप जानते हैं त्वचा रोगों में सफाई की कितनी जरूरत होती है। इस पर वीसी ने कहा कि फंड की कमी की वजह से बेड और बिस्तर का प्रबंध नहीं हो सका। स्वास्थ्य मंत्री ने फिर कहा कि आप यहां के अधिकारी हैं। आप व्यवस्था को सुधार सकते थे। जो भी आपके पास है, उसकी तो साफ-सफाई करवा सकते थे।

कौन हैं डॉ. राज बहादुर
डॉ. राज बहादुर (71) देश के जाने-माने स्पाइनल सर्जन और क्षेत्रीय स्पाइनल इंजरी सेंटर, मोहाली के परियोजना निदेशक और सदस्य सचिव हैं। वह देश में सर्वोच्च चिकित्सा नियामक संस्था, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सदस्य भी हैं। वह पीजीआई आर्थोपीडिक्स डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष और चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज के निदेशक रह चुके हैं।  

मैंने इस्तीफा नहीं दिया है: डॉ. राजबहादुर
देर रात डॉ. राजबहादुर के इस्तीफे की खबर उड़ी। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने इस्तीफे की बात को नकार दिया। हालांकि इस दौरान उनका दर्द भी झलका। उन्होंने कहा- 45 साल के चिकित्सा पेशे के दौरान 13 उच्च प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया है लेकिन कभी भी इस तरह का व्यवहार नहीं किया गया। 

मेडिकल अस्पताल के लिए 200 करोड़ पैकेज की जरूरत 
बाबा फरीद विवि के तहत आने वाले गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कम से कम 200 करोड़ रुपये की जरूरत है लेकिन किसी भी राज्य सरकार ने अब तक ऐसी इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। अस्पताल एमआरआई, सीटी स्कैन व पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी की मशीनें लगभग 10 साल पुरानी हो चुकी हैं और इनकी जगह नई मशीनें लगाने के लिए 70 करोड़ रुपये की जरूरत है। 

इसके अलावा अस्पताल की कमियों को दूर करने के लिए भी 100 से 150 करोड़ की ग्रांट चाहिए। पिछली कांग्रेस सरकार ने अस्पताल में नए बेड व गद्दे खरीदने की हिदायतें दी थी लेकिन फंड के रूप में फूटी कौड़ी भी जारी नहीं की गई। हालांकि राज्य सरकार हर साल वेतन के लिए यूनिवर्सिटी को करीब 35 करोड़ रुपये रिलीज करती है, जबकि बाकी संसाधन उन्हें खुद ही जुटाने पड़ते हैं। 

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