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आईआईटी रुड़की करेगा जेपी प्लांट का निरीक्षण
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चंडीगढ़। जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के निरीक्षण के लिए अगले सप्ताह आईआईटी रुड़की की टीम चंडीगढ़ आएगी। निगम ने आईआईटी रुड़की को पत्र लिखकर टीम भेजने के लिए कहा है। रुड़की से आने वाली टीम मशीनों को चेक करेगी। साथ ही कचरा प्रोसेसिंग के बारे में भी रिपोर्ट देगी।
नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि फरवरी माह में हुई सदन की बैठक में तय हुआ था कि प्लांट को टेकओवर करने के बाद आईआईटी दिल्ली या रुड़की से टीम बुलाई जाएगी, जो मशीनों का निरीक्षण करेगी। मशीनों की तकनीक के बारे में भी टीम से रिपोर्ट ली जाएगी ताकि कचरा प्रोसेसिंग के लिए नई तकनीक के बारे में भी जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्लांट संचालन के बारे में भी टीम से पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। फिलहाल, जो मशीनें लगी हैं, उनसे कंपनी के कर्मचारी शहर के कचरे को प्रोसेस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में यह भी देखना होगा कि कंपनी अपनी मशीनें लेकर जाती है तो फिर निगम किस क्षमता की मशीनें लगाएगा।
दिल्ली आईआईटी की टीम ने कोरोना के कारण मना किया
कमिश्नर ने बताया कि पहले दिल्ली आईआईटी की टीम को प्लांट का निरीक्षण करने को कहा गया था, लेकिन टीम का कहना था कि दिल्ली में कोरोना का कहर काफी ज्यादा है। ऐसे में चंडीगढ़ जाना किसी सदस्य के लिए संभव नहीं है। उसके बाद आईआईटी रुड़की से बात की गई। उनकी सहमति के बाद ही पत्र लिखा गया है।
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प्लांट पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च
कमिश्नर ने बताया कि प्लांट को संचालित करने के लिए 60 लाख उसके ऑपरेशन, 15 लाख बिजली बिल, 25 लाख रुपये लेबर और 20 लाख रुपये उसकी मेंटीनेंस पर खर्च होंगे। सुरक्षा के लिहाज से प्लांट के बाहर गार्ड भी लगाए जाएंगे।
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नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि फरवरी माह में हुई सदन की बैठक में तय हुआ था कि प्लांट को टेकओवर करने के बाद आईआईटी दिल्ली या रुड़की से टीम बुलाई जाएगी, जो मशीनों का निरीक्षण करेगी। मशीनों की तकनीक के बारे में भी टीम से रिपोर्ट ली जाएगी ताकि कचरा प्रोसेसिंग के लिए नई तकनीक के बारे में भी जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्लांट संचालन के बारे में भी टीम से पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। फिलहाल, जो मशीनें लगी हैं, उनसे कंपनी के कर्मचारी शहर के कचरे को प्रोसेस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में यह भी देखना होगा कि कंपनी अपनी मशीनें लेकर जाती है तो फिर निगम किस क्षमता की मशीनें लगाएगा।
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दिल्ली आईआईटी की टीम ने कोरोना के कारण मना किया
कमिश्नर ने बताया कि पहले दिल्ली आईआईटी की टीम को प्लांट का निरीक्षण करने को कहा गया था, लेकिन टीम का कहना था कि दिल्ली में कोरोना का कहर काफी ज्यादा है। ऐसे में चंडीगढ़ जाना किसी सदस्य के लिए संभव नहीं है। उसके बाद आईआईटी रुड़की से बात की गई। उनकी सहमति के बाद ही पत्र लिखा गया है।
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प्लांट पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च
कमिश्नर ने बताया कि प्लांट को संचालित करने के लिए 60 लाख उसके ऑपरेशन, 15 लाख बिजली बिल, 25 लाख रुपये लेबर और 20 लाख रुपये उसकी मेंटीनेंस पर खर्च होंगे। सुरक्षा के लिहाज से प्लांट के बाहर गार्ड भी लगाए जाएंगे।